एमपी के ‘बंगला पान’ की विदेशों में बढ़ी धाक, पाकिस्तान-बांग्लादेश तक पहुंची मांग

एमपी के ‘बंगला पान’ की विदेशों में बढ़ी धाक, पाकिस्तान-बांग्लादेश तक पहुंची मांग

मध्यप्रदेश का प्रसिद्ध ‘बंगला पान’ अब देश की सीमाओं से निकलकर विदेशों में भी अपनी पहचान बना रहा है. पाकिस्तान और बांग्लादेश सहित कई देशों में इसकी मांग बढ़ी है. पान की खेती को प्रोत्साहन देने के लिए राज्य सरकार ने 10 जिलों के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार की है.

धर्मेंद्र सिंह
  • Bhopal ,
  • Jun 01, 2026,
  • Updated Jun 01, 2026, 9:07 AM IST

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में किसानों की आय बढ़ाने और पारंपरिक कृषि आधारित व्यवसायों को नई पहचान दिलाने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं. इन्हीं प्रयासों का परिणाम है कि मध्यप्रदेश का प्रसिद्ध "बंगला पान" अब देश की सीमाओं को पार कर अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी अलग पहचान बना रहा है. अपनी विशिष्ट सुगंध, बेहतरीन स्वाद और लंबे समय तक ताजगी बनाए रखने की क्षमता के कारण प्रदेश का पान पड़ोसी देशों तक पहुंच चुका है.

छतरपुर का बंगला पान बना अंतरराष्ट्रीय पहचान का प्रतीक

मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले में उगाया जाने वाला बंगला पान अपनी उत्कृष्ट गुणवत्ता के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है.इसकी पतली बनावट, हल्की मिठास और लंबे समय तक ताजगी बनाए रखने की क्षमता इसे अन्य किस्मों से अलग बनाती है. यही कारण है कि इसकी मांग पाकिस्तान, बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे पड़ोसी देशों तक पहुंच चुकी है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगातार बढ़ती मांग ने पान उत्पादकों के लिए नए अवसर पैदा किए हैं.

पान की खेती से बढ़ रही हैं कई जिलों में किसानों की आय 

प्रदेश के छतरपुर, रीवा, मंदसौर, नरसिंहपुर और टीकमगढ़ सहित कई जिलों में वर्षों से पान की खेती की जा रही है. यह खेती हजारों किसानों के लिए आय का प्रमुख स्रोत बनी हुई है.पान उत्पादन से जुड़े किसान परंपरागत खेती के साथ-साथ इस व्यवसाय के माध्यम से बेहतर आर्थिक लाभ अर्जित कर रहे हैं.

रीवा का पान भी बाजारों में बना पसंदीदा

रीवा जिले के महसांव क्षेत्र के दो गांवों में उत्पादित पान की भी विशेष पहचान है. यहां का पान उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों वाराणसी, प्रयागराज और लखनऊ तक बड़े पैमाने पर भेजा जाता है.इन शहरों में मध्यप्रदेश के पान की गुणवत्ता और स्वाद को काफी पसंद किया जाता है, जिससे किसानों को अच्छा बाजार और बेहतर मूल्य मिल रहा है.

10 जिलों के लिए बनी विशेष कार्य योजना

राज्य सरकार ने पान की खेती को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार की है. इस योजना के तहत प्रदेश के 10 जिलों को शामिल किया गया है, जिसके लिए 1 करोड़ 3 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है. योजना के माध्यम से किसानों को आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण, उन्नत किस्मों की रोपाई सामग्री और बरोज निर्माण के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है.सरकार का उद्देश्य पान उत्पादन को आधुनिक बनाते हुए किसानों की उत्पादकता और आय दोनों में वृद्धि करना है.

पीढ़ियों से पान उत्पादन से जुड़ा है चौरसिया समाज

मध्यप्रदेश में पान की खेती मुख्य रूप से चौरसिया समाज द्वारा की जाती है. यह समाज पीढ़ियों से इस व्यवसाय से जुड़ा हुआ है और अपने अनुभव तथा पारंपरिक ज्ञान के आधार पर उच्च गुणवत्ता का पान तैयार करता है. वर्षों से विकसित तकनीकों और मेहनत के कारण प्रदेश का पान बाजार में अपनी अलग पहचान बनाए हुए है.

बरोज तकनीक से तैयार होता है गुणवत्तापूर्ण पान

पान की खेती सामान्य फसलों की तुलना में अधिक मेहनत और देखभाल की मांग करती है.इसके लिए "बरोज" नामक विशेष संरक्षित ढांचे का निर्माण किया जाता है, जहां तापमान और नमी को नियंत्रित रखा जाता है.इन संरचनाओं में पौधों की विशेष देखभाल की जाती है, जिससे उच्च गुणवत्ता वाला पान तैयार होता है। यही तकनीक मध्यप्रदेश के पान को विशेष बनाती है.

पान उत्पादकों के सामने चुनौतियां भी कम नहीं

हालांकि पान उत्पादन किसानों को अच्छी आय उपलब्ध करा रहा है, लेकिन वर्तमान समय में उन्हें कई चुनौतियों का सामना भी करना पड़ रहा है. पान मसाला और गुटखा जैसे उत्पादों के बढ़ते प्रचलन से पारंपरिक पान की मांग प्रभावित हुई है.युवा पीढ़ी का रुझान इन उत्पादों की ओर बढ़ने से पान की खपत में कमी देखने को मिली है, जिसका असर किसानों की आय पर भी पड़ा है.

सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व बनाए हुए है मांग

चुनौतियों के बावजूद भारतीय संस्कृति में पान का महत्व आज भी बरकरार है. पूजा-पाठ, विवाह समारोह, धार्मिक अनुष्ठानों और अतिथि सत्कार में पान का विशेष स्थान है. यही सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व पान की स्थायी मांग को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है.

प्रोत्साहन और बेहतर विपणन से खुलेंगे नए अवसर

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पान उत्पादकों को बेहतर विपणन सुविधाएं, आधुनिक तकनीक, प्रसंस्करण इकाइयों और निर्यात के लिए पर्याप्त प्रोत्साहन मिले तो मध्यप्रदेश का पान वैश्विक बाजार में और अधिक मजबूत पहचान बना सकता है.इससे न केवल किसानों की आय में वृद्धि होगी, बल्कि प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती मिलेगी.

 

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