
तेलंगाना सरकार ने केंद्र सरकार से कच्चे पाम तेल (क्रूड पाम ऑयल) पर आयात शुल्क बढ़ाने की मांग की है. राज्य सरकार का कहना है कि इससे देश में पाम ऑयल का घरेलू उत्पादन बढ़ेगा और किसानों को उनकी फसल का बेहतर दाम मिलेगा. तेलंगाना के कृषि मंत्री तुम्मला नागेश्वर राव ने इस संबंध में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखा है.
राज्य सरकार का कहना है कि कुछ साल पहले जब कच्चे पाम तेल पर 44 प्रतिशत आयात शुल्क था, तब किसानों को अच्छे दाम मिलते थे. लेकिन अब यह शुल्क घटकर 16.50 प्रतिशत रह गया है. पिछले वर्ष यह 27.50 प्रतिशत था. शुल्क कम होने से विदेशों से सस्ता पाम तेल भारत में आ रहा है, जिसका सीधा असर देश में उत्पादित पाम तेल की कीमतों पर पड़ रहा है.
कृषि मंत्री ने अपने पत्र में कहा है कि आयात शुल्क कम होने के कारण घरेलू बाजार में कच्चे पाम तेल की कीमतें गिर गई हैं. जब पाम तेल की कीमतें कम होती हैं, तो किसानों को उनके पाम फल का भी कम दाम मिलता है. इससे उनकी आय प्रभावित होती है और खेती का लाभ कम हो जाता है.
तेलंगाना सरकार का मानना है कि यदि आयात शुल्क को फिर से 44 प्रतिशत कर दिया जाए, तो देश में उत्पादित पाम तेल को बेहतर बाजार मिलेगा. इससे किसानों को भी अपनी उपज का अच्छा मूल्य मिल सकेगा.
तेलंगाना आज देश में पाम ऑयल की खेती करने वाले प्रमुख राज्यों में शामिल हो गया है. राज्य का दावा है कि देश में कुल पाम ऑयल खेती क्षेत्र का लगभग 36 प्रतिशत हिस्सा अकेले तेलंगाना के पास है. वर्तमान में राज्य में लगभग एक लाख हेक्टेयर क्षेत्र में पाम ऑयल की खेती हो रही है.
राज्य सरकार आने वाले वर्ष 2026-27 में 34 हजार हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र में पाम ऑयल की खेती बढ़ाने का लक्ष्य लेकर चल रही है. सरकार का मानना है कि इससे किसानों की आय बढ़ेगी और देश को खाद्य तेल के आयात पर कम निर्भर रहना पड़ेगा.
कृषि मंत्री के अनुसार पाम ऑयल की खेती अन्य तिलहन फसलों की तुलना में किसानों को अधिक उत्पादन और बेहतर कमाई देती है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि एक बार पौधे लगाने के बाद यह लगभग 30 वर्षों तक उत्पादन देता रहता है. इससे किसानों को बार-बार नई फसल लगाने की जरूरत नहीं पड़ती.
उन्होंने बताया कि पाम ऑयल की खेती करने वाले किसान औसतन प्रति एकड़ 2 से 3 लाख रुपये तक की आय प्राप्त कर सकते हैं. यही कारण है कि कई किसान अब इस फसल की ओर आकर्षित हो रहे हैं.
भारत में खाद्य तेल की मांग लगातार बढ़ रही है. बढ़ती आबादी और बदलती खानपान की आदतों के कारण खाने के तेल की जरूरत हर साल बढ़ रही है. ऐसे में पाम ऑयल की खेती को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि देश में पाम ऑयल का उत्पादन बढ़ता है, तो भारत को विदेशों से कम तेल आयात करना पड़ेगा. इससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी और किसानों को भी नया अवसर मिलेगा.
वर्तमान में पाम ऑयल के ताजे फलों के गुच्छों (एफएफबी) का मूल्य 23,500 रुपये प्रति टन है. तेलंगाना सरकार का मानना है कि आयात शुल्क बढ़ने से किसानों को और बेहतर दाम मिल सकते हैं. यही वजह है कि राज्य सरकार केंद्र से जल्द इस मामले पर सकारात्मक निर्णय लेने की उम्मीद कर रही है.
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