खेत में ड्रोन उतरा तो बदली खेती की तस्वीर! किसानों का पैसा और समय बचा रहीं ‘ड्रोन दीदी’

खेत में ड्रोन उतरा तो बदली खेती की तस्वीर! किसानों का पैसा और समय बचा रहीं ‘ड्रोन दीदी’

नमो ड्रोन दीदी योजना के तहत मुंगेली की गोदावरी साहू किसानों के खेतों में ड्रोन से नैनो यूरिया, नैनो डीएपी और कीटनाशकों का छिड़काव कर रही हैं। ड्रोन से एक दिन में 20-25 एकड़ तक छिड़काव हो रहा है, जिससे किसानों का समय और लागत बच रही है.

धर्मेंद्र सिंह
  • Raipur ,
  • Oct 06, 2026,
  • Updated Oct 06, 2026, 8:19 AM IST

खेती में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल अब किसानों के लिए समय और लागत दोनों कम करने का जरिया बन रहा है. छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा संचालित नमो ड्रोन दीदी योजना के तहत स्व-सहायता समूहों की महिलाओं को ड्रोन तकनीक का प्रशिक्षण देकर कृषि कार्यों से जोड़ा जा रहा है.इसका फायदा किसानों के साथ-साथ ग्रामीण महिलाओं को भी मिल रहा है.

मुंगेली जिले की नगर पंचायत सरगांव की नमो ड्रोन दीदी गोदावरी साहू ऐसी ही महिला हैं, जो ड्रोन के जरिए किसानों के खेतों में नैनो यूरिया, नैनो डीएपी और कीटनाशकों का छिड़काव कर रही हैं. गोदावरी साहू बिहान के अंतर्गत जय माता दी महिला स्व-सहायता समूह की सदस्य हैं.

ग्वालियर में लिया 15 दिन का प्रशिक्षण

गोदावरी साहू को नमो ड्रोन दीदी योजना के तहत इफको के माध्यम से ग्वालियर में 15 दिन का प्रशिक्षण दिया गया.इस दौरान उन्हें ड्रोन तकनीक की थ्योरी के साथ-साथ प्रैक्टिकल प्रशिक्षण भी मिला. ग्राउंड लेवल पर ड्रोन को सुरक्षित तरीके से संचालित करने और कृषि कार्यों में इसके इस्तेमाल की जानकारी दी गई.

इसके बाद फूलपुर में उन्हें 5 दिवसीय ड्रोन तकनीक प्रशिक्षण भी दिया गया.प्रशिक्षण पूरा करने के बाद अब वह किसानों के खेतों में ड्रोन से खाद और कीटनाशकों का छिड़काव कर रही हैं.

एक दिन में 20 से 25 एकड़ तक छिड़काव

गोदावरी साहू के मुताबिक ड्रोन के जरिए एक दिन में करीब 20 से 25 एकड़ खेत में कीटनाशक का छिड़काव किया जा सकता है.इससे किसानों को खेत में मजदूर लगाकर छिड़काव कराने की जरूरत कम पड़ती है और उनका काफी समय भी बचता है.

खास तौर पर ऐसी फसलों में ड्रोन तकनीक उपयोगी साबित हो रही है, जिनकी ऊंचाई अधिक होती है और जिनके बीच जाकर दवाई का छिड़काव करना किसानों के लिए मुश्किल होता है.

गन्ने की फसल में मिली बड़ी राहत

गांव के एक किसान ने बताया कि पहले वह गन्ने की फसल में कृषि यंत्र से स्प्रेयर के जरिए दवाई का छिड़काव करते थे. गन्ने की फसल ऊंची होने के कारण खेत के अंदर जाकर छिड़काव करना काफी मुश्किल होता था. इसमें समय भी ज्यादा लगता था और कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता था.अब ड्रोन की मदद से खेत में प्रवेश किए बिना ही फसल पर दवाई का छिड़काव किया जा रहा है. किसान के मुताबिक इससे कम समय और कम खर्च में फसल का छिड़काव हो रहा है.

महिला सशक्तिकरण के साथ किसानों को फायदा

नमो ड्रोन दीदी योजना का एक बड़ा पहलू यह है कि इसके जरिए ग्रामीण महिलाओं को नई तकनीक से जोड़ा जा रहा है.महिलाएं ड्रोन चलाने का प्रशिक्षण लेकर कृषि सेवा उपलब्ध करा रही हैं और इसके जरिए आय के नए अवसर भी तैयार हो रहे हैं.वहीं किसानों को भी खेत में समय पर और कम लागत में छिड़काव की सुविधा मिल रही है. इस तरह ड्रोन तकनीक महिला सशक्तिकरण और आधुनिक खेती, दोनों को एक साथ बढ़ावा दे रही है.

गोदावरी साहू का कहना है कि ड्रोन के इस्तेमाल से किसानों का समय और पैसा दोनों बच रहे हैं. वहीं किसान भी आधुनिक तकनीक के इस इस्तेमाल को खेती के लिए उपयोगी बता रहे हैं.

किसान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की किसान हितैषी योजनाओं के लिए आभार जताते हुए कहा कि ड्रोन के रूप में उन्हें खेती में एक नया और उपयोगी मददगार मिला है.

 

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