
भारत और नीदरलैंड कृषि क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में काम कर रहे हैं. दोनों देश बीज तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), जलवायु अनुकूल खेती और कृषि नवाचार पर मिलकर काम करने की संभावनाएं तलाश रहे हैं. नीदरलैंड के राज्य सचिव सिल्वियो एर्केंस ने कहा कि दोनों देशों के बीच मजबूत साझेदारी से किसानों की आय बढ़ाने और खेती को बदलती परिस्थितियों के लिए तैयार करने में मदद मिल सकती है.
भारत दौरे पर आए नीदरलैंड के राज्य सचिव सिल्वियो एर्केंस ने कहा कि दोनों देश कृषि क्षेत्र में कुछ ठोस साझेदारियां बनाने पर ध्यान दे रहे हैं. इसके लिए इस साल सरकार से सरकार के स्तर पर बातचीत जारी रखने पर सहमति बनी है. एर्केंस के मुताबिक, बीज तकनीक दोनों देशों के बीच सहयोग का एक अहम क्षेत्र हो सकता है. नीदरलैंड बीज नवाचार और तकनीक के क्षेत्र में मजबूत स्थिति रखता है, जबकि भारत दुनिया के बड़े बीज बाजारों और उत्पादकों में शामिल है. ऐसे में दोनों देशों के बीच इस क्षेत्र में सहयोग की काफी संभावनाएं हैं.
कृषि में तकनीक के इस्तेमाल को लेकर भी दोनों देशों के बीच बातचीत हो रही है. एर्केंस ने कहा कि भारत और नीदरलैंड किसानों के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI और अलग-अलग माप तकनीकों के इस्तेमाल से नए समाधान विकसित करने की संभावनाएं तलाश रहे हैं. भारत और नीदरलैंड ने मई 2026 में अपने संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाया था. इसके बाद दोनों देशों ने कृषि, खाद्य व्यवस्था, AI, तकनीक और नवाचार समेत कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए रोडमैप तैयार किया है.
डच राज्य सचिव ने कहा कि जलवायु बदलाव का असर भारत और नीदरलैंड दोनों देशों के किसानों पर पड़ रहा है. इसके अलावा दुनिया में चल रही भू-राजनीतिक परिस्थितियों का असर खाद, सप्लाई चेन और खेती की लागत पर भी पड़ रहा है. ऐसे समय में खेती को ज्यादा मजबूत और बदलती परिस्थितियों के अनुसार तैयार करना जरूरी है. दोनों देशों के बीच सहयोग के जरिए ऐसी तकनीक और तरीके विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है, जिनसे किसान इन चुनौतियों का सामना बेहतर तरीके से कर सकें. भारत-नीदरलैंड के 2026-2030 के रणनीतिक साझेदारी रोडमैप में भी जलवायु अनुकूल कृषि, जिम्मेदार कृषि मूल्य श्रृंखला, खाद्य सुरक्षा और कृषि तकनीक पर सहयोग बढ़ाने की बात कही गई है.
एर्केंस ने भारत की खेती के तरीके की भी तारीफ की. उन्होंने खास तौर पर डेयरी क्षेत्र में भारत के समग्र यानी पूरे सिस्टम को साथ लेकर चलने वाले तरीके को महत्वपूर्ण बताया. उनका कहना है कि भारतीय कृषि व्यवस्था में कुछ ऐसे तरीके हैं, जिनसे नीदरलैंड के किसान और कृषि व्यवस्था भी सीख सकती है. दोनों देशों के बीच डेयरी और पशुपालन के क्षेत्र में पहले से सहयोग चल रहा है. मई 2026 में बेंगलुरु के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर एनिमल हसबेंड्री में डेयरी प्रशिक्षण के लिए इंडो-डच सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने की घोषणा भी की गई थी.
भारत और नीदरलैंड के बीच कृषि क्षेत्र में पहले से कई स्तरों पर सहयोग चल रहा है. दोनों देशों के बीच कृषि सहयोग के लिए जॉइंट वर्किंग ग्रुप भी काम करता है. भारत में डच विशेषज्ञता के साथ कृषि क्षेत्र में कई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस विकसित किए जा रहे हैं. इनका उद्देश्य आधुनिक ग्रीनहाउस खेती, बेहतर कृषि इनपुट और छोटे किसानों की क्षमता बढ़ाने में मदद करना है. दोनों देश एग्रीटेक और बायोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भी ज्ञान और तकनीक साझा करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. रणनीतिक साझेदारी के रोडमैप में नई कृषि तकनीक विकसित करने, स्टार्टअप को सहयोग देने और किसानों के लिए बेहतर तकनीक तैयार करने पर भी जोर दिया गया है.
एर्केंस ने भारत और यूरोपीय संघ के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को भी कृषि और सप्लाई चेन के लिहाज से महत्वपूर्ण बताया. उनके अनुसार, इससे वैश्विक अनिश्चितता के बीच सप्लाई चेन को अलग-अलग स्रोतों से जोड़ने में मदद मिल सकती है. भारत और नीदरलैंड के नेताओं ने मई 2026 में भारत-EU मुक्त व्यापार समझौते को जल्द लागू करने की दिशा में आगे बढ़ने की जरूरत पर जोर दिया था. दोनों देशों ने माना था कि इस समझौते से व्यापार और आर्थिक सहयोग के नए अवसर बन सकते हैं.
एर्केंस ने कहा कि दुनिया में बड़ी ताकतें बहुत तेजी से नई तकनीक विकसित कर रही हैं. ऐसे समय में भारत और नीदरलैंड के लिए मिलकर काम करना जरूरी है, ताकि दोनों देश कृषि और दूसरी तकनीकों में तेजी से हो रहे बदलावों के साथ आगे बढ़ सकें. उनका भारत दौरा 27 सितंबर से 2 अक्टूबर 2026 तक है. नीदरलैंड सरकार के मुताबिक, इस दौरे का उद्देश्य कृषि, बागवानी, टिकाऊ खाद्य प्रसंस्करण और नई वैल्यू चेन में दोनों देशों के संबंधों को मजबूत करना है. (ANI)
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