
खेती में लगातार बढ़ती लागत और पारंपरिक फसलों से जुड़ी चुनौतियों के बीच किसान अब वैकल्पिक और लाभकारी फसलों की ओर रुख कर रहे हैं. मध्य प्रदेश के सागर जिले की बीना तहसील के ग्राम पुरेना के किसान अनमोल दुबे ने भी खेती में ऐसा ही नया प्रयोग किया है.उन्होंने पारंपरिक खेती से अलग हटकर औषधीय फसल रोजल हिबिस्कस की खेती को अपनाया है.
खास बात यह है कि किसान ने इस फसल में रासायनिक खाद और रासायनिक दवाओं का इस्तेमाल नहीं किया.जैविक एवं प्राकृतिक तरीके से तैयार खाद का उपयोग कर फसल को तैयार किया जा रहा है. अब उनकी फसल फ्लावरिंग स्टेज पर पहुंच चुकी है और खेत में फूल आने लगे हैं.
कृषि विभाग के दिशा-निर्देशों के अनुसार किसान अनमोल दुबे ने जून माह में रोजल हिबिस्कस की फसल की बोनी की थी. नियमित देखभाल और प्राकृतिक तरीके से फसल प्रबंधन के बाद अब फसल अच्छी अवस्था में पहुंच गई है.हाल ही में कृषि विभाग की टीम ने किसान के खेत पर पहुंचकर फसल का निरीक्षण किया. अधिकारियों के मुताबिक फसल की स्थिति बेहद अच्छी और संतोषजनक पाई गई। फसल में फूल आने के साथ ही इसकी फ्लावरिंग स्टेज शुरू हो चुकी है.
किसान अनमोल दुबे ने बताया कि उन्होंने रोजल हिबिस्कस की खेती में किसी भी प्रकार की रासायनिक दवा या रासायनिक उर्वरक का प्रयोग नहीं किया.फसल के लिए जैविक और प्राकृतिक तरीके से तैयार खाद का इस्तेमाल किया गया.
किसान का यह प्रयोग इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि खेती में लागत कम करने और मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए प्राकृतिक एवं जैविक खेती को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है.
फसल की वर्तमान स्थिति का जायजा लेने के लिए वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी बीना अवधेश राय के नेतृत्व में कृषि विभाग के कृषि विस्तार अधिकारियों की टीम किसान के खेत पर पहुंची.अधिकारियों ने फसल की अवस्था, फ्लावरिंग और खेत में अपनाई जा रही प्रबंधन तकनीकों का निरीक्षण किया. साथ ही आगामी चरण में फसल की बेहतर देखभाल और उत्पादन के लिए किसान को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए.
रोजल हिबिस्कस जैसी औषधीय फसलों की खेती किसानों के लिए पारंपरिक खेती के अलावा वैकल्पिक आय का रास्ता खोल सकती है.यही वजह है कि किसान अनमोल दुबे का प्रयोग क्षेत्र के दूसरे किसानों के लिए भी खासा महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
अनमोल दुबे ने यह दिखाने की कोशिश की है कि खेती में सिर्फ पारंपरिक फसलों पर निर्भर रहने के बजाय नई फसल, नई तकनीक और प्राकृतिक खेती को अपनाकर भी आगे बढ़ा जा सकता है.
किसान अनमोल दुबे की खेती को स्थानीय स्तर पर एक प्रेरणादायक मॉडल के तौर पर देखा जा रहा है.एक तरफ उन्होंने औषधीय फसल को अपनाया, वहीं दूसरी तरफ रासायनिक खाद और दवाओं से दूरी बनाकर जैविक एवं प्राकृतिक तरीके से फसल तैयार करने का प्रयास किया.कृषि विभाग भी ऐसे किसानों को प्रोत्साहित कर रहा है, जो पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर वैकल्पिक और लाभकारी फसलों का प्रयोग कर रहे हैं.
किसान अनमोल दुबे की यह कहानी सिर्फ एक खेत में तैयार हो रही फसल की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस बदलाव की कहानी है, जिसमें किसान खेती को नए नजरिए से देखने लगा है.पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर औषधीय फसल, रासायनिक खाद-दवाओं से दूरी और प्राकृतिक तरीके से खेती—अनमोल दुबे का यह प्रयोग दूसरे किसानों को भी खेती में नए विकल्प तलाशने की प्रेरणा दे रहा है.