
बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि और आंधी-तूफान से प्रभावित किसानों को त्वरित राहत देने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने सख्त रुख अपनाया है. प्रमुख सचिव राजस्व अपर्णा यू ने जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि फसल क्षति का आकलन कर 24 घंटे के भीतर प्रभावित किसानों और परिवारों तक राहत राशि पहुंचाना हर हाल में सुनिश्चित किया जाए. लखनऊ में समीक्षा बैठक के दौरान प्रमुख सचिव ने साफ कहा कि जनहित से जुड़े कार्यों में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
उन्होंने सभी जिलाधिकारियों, अपर जिलाधिकारियों और राजस्व-राहत कर्मियों को संवेदनशीलता के साथ प्राथमिकता पर राहत कार्य पूरा करने के निर्देश दिए. साथ ही चेतावनी दी कि राहत वितरण में ढिलाई बरतने वाले कर्मचारियों के खिलाफ तुरंत कड़ी कार्रवाई की जाएगी.
प्रशासन को केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित न रखते हुए, प्रभावित परिवारों से सीधे संपर्क करने पर भी जोर दिया गया है. जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे पीड़ित परिवारों से व्यक्तिगत संवाद स्थापित करें, ताकि वास्तविक स्थिति का आकलन कर समय पर सहायता दी जा सके.
सरकार ने स्पष्ट किया है कि राहत वितरण के लिए धन की कोई कमी नहीं है. 15 मार्च से अब तक करीब 20 करोड़ रुपये की राहत राशि जिलों को जारी की जा चुकी है. यदि किसी जिले में अतिरिक्त बजट की जरूरत हो, तो उसे तुरंत राहत आयुक्त कार्यालय से मांगने को कहा गया है.
भारतीय मौसम विभाग ने 31 मार्च तक कई जिलों में खराब मौसम की चेतावनी जारी की है. ऐसे में आम लोगों से सतर्क रहने और सावधानी बरतने की अपील की गई है. प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि मौसम से जुड़ी जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाई जाए.
सरकारी आंकड़ों के अनुसार 15 से अब तक खराब मौसम के चलते 17 लोगों की मौत, 11 पशुओं की हानि और सहारनपुर व ललितपुर में कुल 1661.75 हेक्टेयर फसल प्रभावित हुई है. साथ ही, लोगों को अलर्ट करने के लिए सचेत एप के जरिए करोड़ों संदेश भेजे गए हैं.
राहत राशि पाने में किसी तरह की दिक्कत आने पर लोग टोल फ्री नंबर 1070 पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं. सरकार ने भरोसा दिलाया है कि हर प्रभावित परिवार तक समय पर मदद पहुंचाना प्राथमिकता है.