
मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध का सीधा असर अब भारत के मसाला व्यापार पड़ने लगा है. इसका सबसे ज्यादा असर एशिया की सबसे बड़ी कृषि मंडी 'ऊंझा APMC' पर देखने को मिल रहा है. बता दें कि ये मंडी गुजरात के मेहसाणा जिले में है. जीरा, सौंफ और अजवाइन जैसे मसालों के निर्यात पर मानो पूरी तरह से ब्रेक लग गया है. ऊंझा APMC के चेयरमैन दिनेश पटेल ने चिंता जताते हुए कहा है कि युद्ध के कारण समुद्री रास्तों में कंटेनर फंस गए हैं और व्यापारियों के सैकड़ों करोड़ रुपये दांव पर लगे हैं. सबसे दुखद बात यह है कि एक्सपोर्ट रुकने का सीधा नुकसान हमारे किसानों को भी उठाना पड़ रहा है.
इन दिनों गुजरात की मंडियों में जीरा, सौंफ, मेथी और अजवाइन जैसे मसालों का हार्वेस्टिंग सीजन चल रहा है. अकेले ऊंझा APMC में हर दिन 40 से 50 हजार बोरी जीरे की आवक हो रही है. देश के अंदर तो इन मसालों की मांग अच्छी है, लेकिन ईरान युद्ध और मिडिल ईस्ट के तनाव ने भारत के निर्यातकों की नींद उड़ा दी है.
ऊंझा APMC के चेयरमैन दिनेश पटेल के मुताबिक, एक्सपोर्ट फिलहाल पूरी तरह से रुका हुआ है. व्यापारियों और प्रोसेसर्स के 200 से 300 कंटेनर होर्मुज की खाड़ी (Strait of Hormuz) और मिडिल ईस्ट के रास्तों में फंसे हुए हैं. स्थिति इतनी तनावपूर्ण है कि कई कंटेनर्स को तो गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पर ही रोक दिया गया है.
चेयरमैन के मुताबिक, युद्ध के कारण दूसरे देशों में जाने वाले माल का मालभाड़ा यानी फ्रेट चार्जेस (Freight Charges) आसमान छू रहे हैं. लागत बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक्सपोर्ट की डिमांड बहुत कम हो गई है, जब माल ही नहीं बिकेगा, तो किसानों को उनके उत्पाद का सही दाम कैसे मिलेगा? इसका सीधा और नकारात्मक असर किसानों की आमदनी पर पड़ रहा है.
व्यापारियों की परेशानी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस समय उनके करीब 300 से 400 करोड़ रुपये विदेशी व्यापार में फंसे हुए हैं. चेयरमैन दिनेश पटेल ने साफ कर दिया है कि जब तक मिडिल ईस्ट में स्थिति साफ और सामान्य नहीं होती, तब तक मसाला निर्यातकों और व्यापारियों के लिए आगे का व्यापार करना बेहद मुश्किल बना रहेगा. (मनीष मिस्त्री की रिपोर्ट)