
देश में इस साल गेहूं उत्पादन के शुरुआती अनुमान पर बेमौसम बारिश का असर दिखाई दे सकता है. निजी एजेंसी एग्रीवॉच ने अपने आकलन में कहा है कि इस बार कुल गेहूं उत्पादन में 1 से 1.5 फीसदी तक गिरावट आ सकती है. यह सर्वे रॉलर फ्लोर मिलर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (Roller Flour Millers’ Federation of India) की ओर से कराया गया था. सरकार ने जहां इस बार 120.21 मिलियन टन उत्पादन का अनुमान जताया है, वहीं अब मौसम के असर से इस लक्ष्य पर हल्का दबाव बनता दिख रहा है.
बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, एग्रीवॉच ने अपनी शुरुआती रिपोर्ट में कहा है कि पंजाब, बिहार और उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों में 10 से 15 फीसदी तक उत्पादन घटने की आशंका है. इसके अलावा पांच राज्यों के 21 जिलों में 5 से 10 फीसदी तक फसल प्रभावित हुई है. रिपोर्ट के मुताबिक, नुकसान का असर क्षेत्रवार अलग-अलग है, जहां कई जगह सीमित तो कुछ पॉकेट्स में ज्यादा नुकसान दर्ज किया गया है.
बता दें कि 11 से 22 मार्च के बीच उत्तर और मध्य भारत के कई हिस्सों में बारिश, ओलावृष्टि और तेज हवाएं दर्ज की गई थी. जिसके चलते पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और मध्य प्रदेश के गेहूं क्षेत्रों में इस दौरान फसल को नुकसान पहुंचा. हालांकि, पश्चिम बंगाल और गुजरात में असर सीमित रहा.
वहीं, किसानों ने कहा दावा किया है कि फसल गिरने और ओलों की मार से दाने की गुणवत्ता प्रभावित हुई है. दानों की चमक कम होने और सिकुड़ने की शिकायतें सामने आई हैं. बारिश से पहले तापमान 35 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने से भी फसल पर दबाव बना. उत्तर प्रदेश के हापुड़ के किसान बलबीर त्यागी ने कहा कि इस बार बारिश ने तापमान को कुछ हद तक संतुलित भी किया है और 2022 जैसी लंबी गर्मी की स्थिति नहीं बनी, इसलिए कुल असर सीमित रह सकता है. हालांकि, जिन इलाकों में तेज बारिश और हवाएं चलीं वहां नुकसान ज्यादा है.
राज्यों में उत्तर प्रदेश सबसे ज्यादा प्रभावित नजर आ रहा है, जहां 23 जिलों में अलग-अलग स्तर पर नुकसान दर्ज किया गया है. बिजनौर में नुकसान का स्तर ज्यादा बताया गया है. पंजाब में भी कई जिलों में असर है, हालांकि गंभीर नुकसान सीमित क्षेत्रों में ही है. बिहार के 10 जिलों में फसल प्रभावित हुई है, जिनमें बेगूसराय और सुपौल में नुकसान अधिक रहने की संभावना है.
हरियाणा में फसल गिरने और नमी के कारण ज्यादातर जगहों पर मध्यम स्तर का नुकसान हुआ है. वहीं, मध्य प्रदेश और राजस्थान में असर कम तीव्रता का रहा है, जिससे व्यापक नुकसान की स्थिति नहीं बनी है. हालांकि, इस बार मौसम के उतार-चढ़ाव का असर 2022 जितना गंभीर नहीं है, लेकिन जहां फसल पकने के चरण में बारिश और ओलावृष्टि हुई, वहां उत्पादन के साथ गुणवत्ता पर असर दिख सकता है. ऐसे में आने वाले दिनों में वास्तविक उत्पादन आंकड़ों पर नजर बनी रहेगी.