
भारत में कपास की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, क्योंकि स्पिनिंग मिलों और व्यापारियों की मांग काफी ज्यादा है. घरेलू बाजार में कीमतें दुनिया के बाजार के साथ बढ़ रही हैं. वहीं, डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होने से कपास का आयात भी महंगा हो गया है. इस बीच, शुक्रवार को कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) ने कपास के दाम में 300 रुपये प्रति कैंडी (356 किलो) की बढ़ोतरी की है. इस बढ़ोतरी के साथ ही इस महीने की शुरुआत से अब तक कीमतों में कुल 1,900 रुपये प्रति कैंडी का इजाफा हो चुका है.
CCI के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर ललित गुप्ता ने बताया कि कीमतें बढ़ाने का फैसला वैश्विक बाजार के रुझान को देखते हुए लिया गया है. उन्होंने कहा कि कपास और सूत की मांग अभी काफी मजबूत बनी हुई है. उन्होंने यह भी बताया कि CCI ने कुल 1.05 करोड़ गांठ कपास खरीदी है, जिसमें से सिर्फ मार्च महीने में ही 39 लाख गांठ (हर गांठ 170 किलो) बेच दी गई है. इससे साफ है कि बाजार में कपास की मांग काफी अच्छी बनी हुई है.
इंटरकॉन्टिनेंटल एक्सचेंज (ICE) में कॉटन फ्यूचर्स मार्च की शुरुआत से अब तक 14 फीसदी से ज्यादा बढ़ चुके हैं. मई 2026 के लिए कीमत 69 सेंट प्रति पाउंड से ऊपर और जुलाई के लिए 71 सेंट से ज्यादा चल रही है. कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (CAI) के पूर्व अध्यक्ष अतुल गनात्रा का कहना है कि रुपये की कमजोरी और अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती कीमतों को देखते हुए आने वाले समय में अच्छी क्वालिटी वाले कपास के दाम और बढ़ सकते हैं.
रायचूर के सोर्सिंग एजेंट रामानुज दास बूब ने बताया कि डॉलर मजबूत होने और वैश्विक कीमतें बढ़ने से आयात महंगा हो गया है, इसलिए देश में कॉटन की मांग बढ़ रही है. उन्होंने कहा कि सिर्फ मिलों ही नहीं, बल्कि बड़ी अंतरराष्ट्रीय ट्रेडिंग कंपनियां भी भारतीय कॉटन में रुचि दिखा रही हैं, क्योंकि उन्हें मौजूदा कीमतें फायदे की लग रही हैं. हाल के दिनों में युद्ध की वजह से वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हुई है. इसके चलते चीन, बांग्लादेश और वियतनाम जैसे देशों से भारतीय कॉटन यार्न की मांग भी तेजी से बढ़ी है.