अमरूद के बागों में तेजी से फैल रहा ये खतरनाक रोग, लखनऊ और बदायूं जिले सबसे अधिक प्रभावित, जानें- सलाह

अमरूद के बागों में तेजी से फैल रहा ये खतरनाक रोग, लखनऊ और बदायूं जिले सबसे अधिक प्रभावित, जानें- सलाह

Guava Farming: सीआईएसएच के निदेशक डॉ. टी. दामोदारन ने बताया कि नीमैटोड कई अमरूद उत्पादक क्षेत्रों में रोपण सामग्री के माध्यम से फैल गया और संक्रमित बागों की उत्पादन क्षमता खराब दर्ज की गई या नए संक्रमित बागों में पौधे मर गए. हालांकि,अमरूद के उत्पादन के अंतर्गत आने वाला बहुत सा क्षेत्र अभी भी संक्रमित हैं.

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नवीन लाल सूरी
  • LUCKNOW,
  • Apr 07, 2026,
  • Updated Apr 07, 2026, 6:21 PM IST

फफूंदी के संक्रमण से होने वाला अमरूद का उकठा रोग पिछले कई दशकों से एक गंभीर समस्या रहा है. लेकिन 2014-2016 के आसपास भारत के अमरूद की नर्सरी में रूट-नॉट नीमैटोड के संक्रमण ने अमरूद के बागों के अस्तित्व को और बिगाड़ दिया है. इसी क्रम में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान (ICAR-CISH) रहमानखेड़ा, लखनऊ ने मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर (MIDH) परियोजना , 'यूपी के हॉट स्पॉट क्षेत्रों में जड़ मेल विशिष्ट बीमारियों को रूटस्टॉक्स, रासायनिक और जैविक उपायों के माध्यम से कम करने' के लिए जड़ग्रन्थि रोग से प्रभावित अमरूद की नर्सरी और बागों को सुधारने के लिए प्रयास शुरू किए हैं

संक्रमित बागों की उत्पादन क्षमता खराब 

सीआईएसएच के निदेशक डॉ. टी. दामोदारन ने बताया कि नीमैटोड कई अमरूद उत्पादक क्षेत्रों में रोपण सामग्री के माध्यम से फैल गया और संक्रमित बागों की उत्पादन क्षमता खराब दर्ज की गई या नए संक्रमित बागों में पौधे मर गए. हालांकि,अमरूद के उत्पादन के अंतर्गत आने वाला बहुत सा क्षेत्र अभी भी संक्रमित हैं.

प्रधान वैज्ञानिक ने जारी किया मोबाइल नंबर

निदेशक डॉ. टी. दामोदारन ने कहा कि हम लखनऊ और बदायूं जिलों में सबसे अधिक प्रभावित अमरूद की नर्सरी और बागों को सूत्रकृमि मुक्त बनाने के लिए बेहतर प्रयास कर रहे हैं. अमरूद के अनेक संक्रमित बाग और नर्सरी को उपचारों के प्रयोग और निगरानी के लिए संस्थान द्वारा अपनाया गया है. हालांकि, हमारी पहुंच सीमित है, और हम अमरूद उगाने वालों से अनुरोध करते हैं कि वे अपने बागों के उपचार के लिए संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक डॉ.पीके शुक्ला से उनके मोबाइल नंबर 9451290652 पर संपर्क कर सकते हैं.

रोकथाम के लिए ये उपचार

उन्होंने बताया कि हमारी समेकित रोग प्रबंधन योजना में सूत्रकृमि संक्रमित अमरूद नर्सरी और बागों का नेमेटिसाइड, फ्लुओपाइराम के साथ मिट्टी में उपचार शामिल है. इसके बाद ट्राइकोडरमा या बैसिलस का अकेले या नीम की खली या कम्पोस्ट के साथ संयोजन में मिट्टी में प्रयोग किया जाएगा. अमरूद के बागों में जड़-ग्रंथि सूत्रकृमि की रोकथाम के लिए उपचार की सामग्री लागत परियोजना के तहत संस्थान द्वारा वहन की जाएगी और उसका प्रयोग संसथान के प्रशिक्षित युवा पेशेवरों की देखरेख में किसानों द्वारा किया जाएगा.

'उकठा रोग' के संक्रमण से बचाने के उपाय

डॉ. टी. दामोदारन ने आगे बताया कि अमरूद के पेड़ को उकठा रोग के संक्रमण से बचाने के लिए संक्रमण की चपेट में आने वाली शाखों को काट दें. इन शाखों को खेत से बाहर निकाल कर नष्ट कर दें. अगर पूरा पौधा संक्रमित हो जाए तो जड़ सहित निकालकर उसे जला दें या फिर गड्ढा खोदकर मिट्टी में दफन कर दें. 

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