गर्मी की मार से घटेगा कॉफी उत्पादन! 2026-27 में 4% गिरावट का अनुमान

गर्मी की मार से घटेगा कॉफी उत्पादन! 2026-27 में 4% गिरावट का अनुमान

मुंबई कार्यालय के अनुसार, भारत में 2026-27 फसल वर्ष के दौरान कॉफी उत्पादन में करीब 4 प्रतिशत की कमी आ सकती है. इसकी मुख्य वजह खराब मौसम और कम पैदावार रहने का अनुमान है.

दुनिया में छाई भारतीय कॉफी!दुनिया में छाई भारतीय कॉफी!
क‍िसान तक
  • Noida,
  • May 24, 2026,
  • Updated May 24, 2026, 9:33 AM IST

अमेरिकी कृषि विभाग (USDA) के मुंबई कार्यालय के अनुसार, भारत में 2026-27 फसल वर्ष के दौरान कॉफी उत्पादन में करीब 4 प्रतिशत की कमी आ सकती है. इसकी मुख्य वजह खराब मौसम और कम पैदावार रहने का अनुमान है. रिपोर्ट के मुताबिक, 2026-27 में देश का कुल कॉफी उत्पादन लगभग 61.4 लाख बैग (प्रत्येक बैग 60 किलोग्राम) यानी करीब 3.68 लाख टन रहने की संभावना है. इसमें 15.6 लाख बैग अरेबिका कॉफी और 45.8 लाख बैग रोबस्टा कॉफी शामिल होगी. वहीं, 2025-26 फसल वर्ष के लिए कॉफी उत्पादन का अनुमान 64 लाख बैग यानी करीब 3.84 लाख टन पर बरकरार रखा गया है. इसमें 17.3 लाख बैग अरेबिका और 47 लाख बैग रोबस्टा कॉफी शामिल है.

सरकारी कॉफी बोर्ड ने अभी तक 2026-27 के लिए अपने शुरुआती या फूल आने के बाद के फसल अनुमानों और 2025-26 के लिए अंतिम फसल अनुमानों की घोषणा नहीं की है. 2025-26 के लिए अपने शुरुआती अनुमानों में, बोर्ड ने 4.03 लाख टन फसल का अनुमान लगाया था, जिसमें 1.18 लाख टन अरेबिका और 2.84 लाख टन रोबस्टा शामिल थे.

गर्मी की मार से घटेगा कॉफी उत्पादन

USDA की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में अरेबिका का उत्पादन सामान्य से कम मॉनसून बारिश और असामान्य रूप से ज़्यादा तापमान के कारण कम होने की उम्मीद है, जिसका फूलों के खिलने और फल लगने पर बुरा असर पड़ सकता है. इसके विपरीत, रोबस्टा का उत्पादन अपेक्षाकृत मज़बूत रहने का अनुमान है, जो मौसम में बदलाव के प्रति इसकी ज़्यादा सहनशीलता को दर्शाता है. भारत के कुल कॉफी उत्पादन में रोबस्टा का हिस्सा 75 प्रतिशत से ज़्यादा है.

मौसम की मार से कम हो सकता है उत्पादन

रिपोर्ट के अनुसार, मार्च और अप्रैल में समय पर हुई बारिश से कॉफी के पौधों में फूल आने और शुरुआती विकास में मदद मिली थी. लेकिन हाल के दिनों में पड़ रही तेज गर्मी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. बढ़ते तापमान के कारण मिट्टी में नमी तेजी से कम हो रही है और पौधों को ज्यादा पानी की जरूरत पड़ रही है. रिपोर्ट में कहा गया है कि बीच-बीच में हुई हल्की और अनियमित बारिश हालात को संभालने के लिए पर्याप्त नहीं रही है. इससे कॉफी के पौधों में फल बनने की प्रक्रिया प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है. अच्छी पैदावार के लिए फरवरी-मार्च में फूल आने के समय और अप्रैल-मई में पर्याप्त बारिश बेहद जरूरी होती है. 

विशेषज्ञों के मुताबिक, अरेबिका कॉफी पर इसका असर ज्यादा पड़ सकता है, क्योंकि यह रोबस्टा की तुलना में गर्मी के प्रति अधिक संवेदनशील होती है और इसे ज्यादा पानी की जरूरत होती है. लगातार गर्म मौसम के कारण अरेबिका के पौधों की वृद्धि प्रभावित हो सकती है, फूल झड़ सकते हैं और सिंचाई की जरूरत बढ़ सकती है.

बेमौसम मौसम ने बढ़ाई मुश्किलें

रिपोर्ट में बताया गया है कि अरेबिका कॉफी की फसल गर्मी से सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकती है. यह किस्म रोबस्टा के मुकाबले ज्यादा नाजुक होती है और इसे अधिक पानी की जरूरत पड़ती है. लगातार बढ़ते तापमान के कारण पौधों की वृद्धि प्रभावित हो सकती है, फूल झड़ सकते हैं और सिंचाई की जरूरत बढ़ सकती है. वहीं, रोबस्टा कॉफी के लिए सामान्य से कम बारिश कुछ हद तक फायदेमंद साबित हो सकती है. पिछले दो सालों में ज्यादा बारिश होने से फंगल रोगों का खतरा बढ़ गया था. कम बारिश होने पर ऐसे रोगों के फैलने की संभावना घट सकती है.

भविष्य में इसकी मांग बढ़ने की संभावना

हालांकि, मौसम में लगातार हो रहे बदलाव किसानों के लिए चिंता का कारण बने हुए हैं. बेमौसम बारिश और लंबे सूखे की घटनाओं से उत्पादन को लेकर अनिश्चितता बढ़ रही है. रिपोर्ट के अनुसार, 2026-27 में अरेबिका कॉफी की पैदावार में करीब 8 प्रतिशत की गिरावट आ सकती है, जबकि रोबस्टा की पैदावार में लगभग 2 प्रतिशत की मामूली कमी रहने का अनुमान है. दूसरी ओर, भारत में कॉफी की खपत बढ़ने की उम्मीद है. 2026-27 में घरेलू खपत करीब 15.8 लाख बैग (94,800 टन) रहने का अनुमान है. इसकी मुख्य वजह इंस्टेंट कॉफी की बढ़ती लोकप्रियता है. रिपोर्ट के मुताबिक, देश में घुलनशील (इंस्टेंट) कॉफी की मांग लगातार बढ़ रही है और आने वाले समय में इसका हिस्सा कुल घरेलू खपत का लगभग 73 प्रतिशत तक पहुंच सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में प्रति व्यक्ति कॉफी की खपत अभी भी वैश्विक औसत से काफी कम है, इसलिए भविष्य में इसकी मांग और बढ़ने की अच्छी संभावना है.

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