UP में 'बांस की खेती' किसानों के लिए बनेगी आमदनी का बड़ा जरिया, जानें योगी सरकार की पूरी योजना

UP में 'बांस की खेती' किसानों के लिए बनेगी आमदनी का बड़ा जरिया, जानें योगी सरकार की पूरी योजना

Bamboo Farming: प्रदेश में बांस का उत्पादन बढ़ने से इन उद्योगों को स्थानीय स्तर पर कच्चा माल मिलेगा. इससे किसानों को बाजार से जुड़ने और अपनी उपज बेचने के नए अवसर मिल सकते हैं. वहीं, मुख्य सचिव एसपी गोयल ने बांस से तैयार उत्पादों का मूल्य संवर्धन करने पर जोर दिया.

यूपी में 5,000 हेक्टेयर में होगा बांस का रोपणयूपी में 5,000 हेक्टेयर में होगा बांस का रोपण
क‍िसान तक
  • LUCKNOW,
  • Oct 30, 2026,
  • Updated Oct 30, 2026, 9:02 AM IST

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार में बांस की खेती (Bamboo Farming) का दायरा बढ़ाने के लिए प्लान तैयार किया है. योगी सरकार ने आगामी वृक्षारोपण अभियान के तहत प्रदेश में 5,000 हेक्टेयर भूमि पर बांस के पौधे लगाने का लक्ष्य तय किया है. इस पहल से किसानों को अतिरिक्त आमदनी का अवसर मिलेगा. साथ ही बांस से फर्नीचर, अगरबत्ती और अन्य उत्पाद बनाने वाले उद्योगों को भी स्थानीय स्तर पर कच्चा माल उपलब्ध हो सकेगा. प्रदेश के मुख्य सचिव एसपी गोयल ने 'राष्ट्रीय बांस मिशन' की समीक्षा बैठक की. इस दौरान उन्होंने प्रदेश में बांस उत्पादन का दायरा बढ़ाने पर जोर दिया.

5,000 हेक्टेयर में होगा बांस का रोपण

मामले में मुख्य सचिव गोयल ने संबंधित विभागों के अधिकारियों को 5,000 हेक्टेयर में बांस के रोपण का लक्ष्य को पूरा करने के लिए प्रभावी कार्ययोजना तैयार करने और समयबद्ध तरीके से अभियान को लागू करने के निर्देश दिए. बैठक में बताया गया कि बांस की खेती किसानों के लिए आमदनी का एक अतिरिक्त जरिया बन सकती है. बांस का इस्तेमाल फर्नीचर बनाने के साथ पार्टिकल बोर्ड, एमडीएफ (मीडियम डेंसिटी फाइबर बोर्ड) और कई अन्य काष्ठ आधारित उत्पादों के निर्माण में किया जाता है.

बांस से तैयार उत्पादों को मिलेगा बढ़ावा

प्रदेश में बांस का उत्पादन बढ़ने से इन उद्योगों को स्थानीय स्तर पर कच्चा माल मिलेगा. इससे किसानों को बाजार से जुड़ने और अपनी उपज बेचने के नए अवसर मिल सकते हैं. वहीं, मुख्य सचिव एसपी गोयल ने बांस से तैयार उत्पादों का मूल्य संवर्धन करने पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि बांस आधारित उद्योगों को बढ़ावा मिलने से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की नई संभावनाएं विकसित होंगी. इससे किसानों को खेती के अलावा बांस के प्रसंस्करण, उत्पाद निर्माण और विपणन जैसी गतिविधियों से भी जुड़ने का अवसर मिलेगा.

'राष्ट्रीय बांस मिशन' के तहत कार्ययोजना पर जोर

दरअसल, बांस आधारित गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के लिए 'राष्ट्रीय बांस मिशन' को वन विभाग के कार्बन क्रेडिट कार्यक्रम से जोड़ने की संभावनाओं पर भी विचार किया गया. इससे बांस उत्पादन को पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ने में मदद मिल सकती है. सरकार की इस पहल से प्रदेश में बांस की खेती, प्रसंस्करण और इससे जुड़े उद्योगों को नई दिशा मिलने की उम्मीद है.

गंगा किनारे बांस रोपण की तैयारी

बैठक में नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत गंगा और उसकी सहायक नदियों के तटवर्ती क्षेत्रों में बांस लगाने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई. वन विभाग की ओर से नदी किनारे पहले से ही बांस रोपण का काम किया जा रहा है. इस पहल का उद्देश्य नदी तटों पर हरित क्षेत्र बढ़ाने के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी प्रोत्साहित करना है.

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