रबी सीजन की सुस्त शुरुआत: मॉनसून की कमी से गेहूं की बुआई पर असर, जानिए ताजा आंकड़े

रबी सीजन की सुस्त शुरुआत: मॉनसून की कमी से गेहूं की बुआई पर असर, जानिए ताजा आंकड़े

कृषि मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मॉनसून में 13% की कमी के कारण गेहूं की रबी बुआई प्रभावित हुई है. इस सीजन में अब तक केवल 11,000 हेक्टेयर में ही गेहूं की बुआई हो सकी है, जो पिछले साल की इसी अवधि (27,000 हेक्टेयर) से काफी कम है. सरकार ने इस फसल वर्ष के लिए 121 मिलियन टन गेहूं उत्पादन का लक्ष्य रखा है.

Due to the impact of El Niño, temperatures in India are expected to remain above normal this winter, posing a risk to the wheat cropDue to the impact of El Niño, temperatures in India are expected to remain above normal this winter, posing a risk to the wheat crop
क‍िसान तक
  • नई दिल्ली,
  • Oct 27, 2026,
  • Updated Oct 27, 2026, 11:01 AM IST

कृषि मंत्रालय ने रबी बुआई का ताजा आंकड़ा जारी किया है.  आंकड़ों के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की कमी के बीच कुछ राज्यों में गेहूं की बुआई शुरू हो गई है. अब तक 11,000 हेक्टेयर क्षेत्र में बुआई हुई है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में 27,000 हेक्टेयर में बुआई हुई थी.

मंत्रालय ने 23 अक्टूबर तक के बुआई के आंकड़े जारी करते हुए कहा, "कुछ राज्यों में गेहूं की बुआई अभी शुरू हुई है."

मिट्टी में नमी कम, गेहूं पर असर

गेहूं एक प्रमुख रबी फसल है, जिसे आमतौर पर अक्टूबर-नवंबर में बोया जाता है और मार्च-अप्रैल में काटा जाता है. फसल वर्ष 2025-26 (जुलाई-जून) में 336 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूं की बुआई की गई थी.

पिछले साल 120.7 मिलियन टन के रिकॉर्ड उत्पादन के बाद, मंत्रालय ने फसल वर्ष 2026-27 के लिए 121 मिलियन टन गेहूं उत्पादन का लक्ष्य रखा है.

मौसम विभाग के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मॉनसून (जून-सितंबर) में 13 प्रतिशत की कमी रही. मॉनसून कमजोर रहने से रबी सीजन की शुरुआत में मिट्टी में नमी कम रह जाती है और जलाशयों और नहरों में जल स्तर भी कम हो जाता है.

चूंकि गेहूं की बुआई के बाद कई बार सिंचाई की जरूरत होती है, इसलिए कम बारिश के कारण बुआई में देरी हो सकती है, बुआई का कुल रकबा घट सकता है और पैदावार पर भी असर पड़ सकता है.

कई राज्यों में स्थिति चिंताजनक

पंजाब और राजस्थान पर इसका विशेष असर पड़ने की आशंका है, जहां बारिश में क्रमशः 38 प्रतिशत और 22 प्रतिशत की कमी रही है, और सितंबर के अंत में जलाशयों में पानी का स्तर भी सामान्य से कम था. भारत के कुल गेहूं बुआई क्षेत्र में इन दोनों राज्यों की हिस्सेदारी लगभग 31 प्रतिशत है, इसलिए वहां सिंचाई की कमी का असर राष्ट्रीय स्तर पर गेहूं की बुआई पर पड़ सकता है.

विशेषज्ञों का कहना है कि राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात, बुंदेलखंड और मध्य भारत के कुछ हिस्सों में, जहां खेती मुख्य रूप से बारिश पर निर्भर है या सिंचाई की सुविधा कम है, वहां भी स्थिति चिंताजनक है. इन क्षेत्रों में मॉनसून की कमी से मिट्टी में आई नमी की भरपाई के लिए नहर या भूजल सिंचाई का विकल्प आसानी से नहीं मिल पाता है.

अन्य फसलों की बात करें तो, 23 अक्टूबर तक धान की बुआई 1.02 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में हुई है, जबकि एक साल पहले इसी समय यह 2.13 लाख हेक्टेयर थी. आंकड़ों के अनुसार, दालों के तहत रकबा 4.39 लाख हेक्टेयर के मुकाबले 3.27 लाख हेक्टेयर रहा, जबकि तिलहनों की बुआई एक साल पहले के 21.34 लाख हेक्टेयर के मुकाबले 13.38 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में की गई.

वहीं, मोटे अनाजों का रकबा 13,000 हेक्टेयर के मुकाबले बढ़कर 23,000 हेक्टेयर हो गया.

आंकड़ों से पता चलता है कि 23 अक्टूबर तक कुल रबी फसलों की बुआई 18.02 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में की गई, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 28.26 लाख हेक्टेयर थी.

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