Kala namak Rice : काला नमक चावल में मिलावट के खेल ने किसानों को किया मायूस, खेती छोड़ने को हुए मजबूर

Kala namak Rice : काला नमक चावल में मिलावट के खेल ने किसानों को किया मायूस, खेती छोड़ने को हुए मजबूर

सिद्धार्थ नगर जनपद काला नमक चावल के लिए जाना जाता है. इस जनपद में काला नमक चावल को जीआई टैग भी मिल चुका है.2018 में काला नमक चावल को ओडीओपी में शामिल कराया लेकिन अब 5 साल के बाद भी जिले में ग्रेडिंग की व्यवस्था नहीं होने के चलते मिलावट का खेल जारी है जिसके कारण अब इस धान की खेती करने वाले किसानों के लिए अब घाटे का सौदा बनता जा रहा है.

काला नमक चावल में होने लगी है मिलावटकाला नमक चावल में होने लगी है मिलावट
धर्मेंद्र सिंह
  • Siddharth Nagar,
  • Oct 22, 2023,
  • Updated Oct 22, 2023, 4:41 PM IST

उत्तर प्रदेश का सिद्धार्थ नगर जनपद काला नमक चावल (Kala namak rice)  के लिए जाना जाता है. इस जनपद में काला नमक चावल को जीआई टैग भी मिल चुका है. प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने 2018 में काला नमक चावल को ओडीओपी में शामिल कराया लेकिन अब 5 साल के बाद भी जिले में ग्रेडिंग की व्यवस्था नहीं होने के चलते मिलावट का खेल जारी है.  खेती करने वाले किसानों के लिए काला नमक धान बोना अब घाटे का सौदा बनता जा रहा है. जिले में अब काला नमक चावल की परंपरागत प्रजातियों को कुछ किसानों के द्वारा ही बोया जाता है जबकि बौनी प्रजाति का चावल बड़े पैमाने पर बोया जा रहा है और बेचा भी जा रहा है. परंपरागत प्रजाति की खेती करने वाले किसान हताश होकर अब खेती करना छोड़ रहे हैं. 

काला नमक चावल की गिरती साख

काला नमक चावल को 2018 में ओडीओपी में शामिल किया गया लेकिन इसका लाभ जिले के किसानों को ज्यादा दिन तक नहीं मिल सका. सरकारी प्रोत्साहन के बाद 15000 हेक्टेयर तक इस धान की खेती होने लगी यहां तक की ₹15000 प्रति क्विंटल तक इसकी कीमत भी पहुंच गई. बाद में बौनी प्रजाति और मिलावट की वजह से इसकी कीमत गिरने लगी जिसके चलते 8000 से लेकर ₹9000 प्रति कुंतल तक कीमत जा पहुंची. डेढ़ साल पहले सरकार की ओर से काला नमक चावल की जांच के लिए लैब बनाने की योजना बनाई गई लेकिन यह काम भी अधर में रह गया है. जिन ग्राहकों ने परंपरागत काला नमक चावल का स्वाद चख लिया है लेकिन मिलावट के चलते अब उनका मोह भंग होने लगा है.

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स्वाद और सुगंध में हो गई मिलावट

काला नमक चावल की खेती करने वाले किसान मुरलीधर मिश्र बताते हैं कि धान की परंपरागत प्रजाति में जो स्वाद और सुगंध है वह बौनी प्रजाति में नहीं है. कुछ किसानों ने लालच में इसका खेल ही बिगाड़ दिया है. जिन लोगों को एक बार शुद्ध चावल नहीं मिला वे अब दोबारा इसका उपयोग करने में हिचकने लगे हैं. दूसरे किसान जय हिंद का कहना है कि काला नमक चावल की खेती अब घाटे का सौदा बन गई है. दो से तीन सालों में तेजी से दाम बढ़ा था लेकिन अब गिर गया है. शोहरतगढ़ के किसान तिलक राम पांडे ने बताया कि उनके गांव में अभी भी किसानों के घर में 100 कुंतल से ज्यादा काला नमक चावल रखा हुआ है लेकिन उन्हें  ग्राहक नहीं मिल रहे हैं. मिलावट की वजह से किसने को नुकसान होने लगा है. किसान संतोष चौधरी ने बताया कि पिछले 22 साल से काला नमक की खेती कर रहे हैं लेकिन इस बार चावल नहीं बिक सका है. ऐसे में किसान काला नमक धान की खेती कैसे करेगा। 

इरी का रिसर्च प्रोजेक्ट भी अटका

अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान वाराणसी ने जिले के बर्डपुर में शोध संस्थान बनाने के लिए जमीन को चिन्हित किया था. 14 करोड़ की लागत से प्रोजेक्ट को शुरू करने की योजना थी.  काला नमक के किसान व्यापारी शोध प्रोजेक्ट के शुरू न होने से परेशान है. उद्योग विभाग के उपायुक्त दयाशंकर सरोज ने बताया कि इस मामले में शासन से कई बार पत्राचार किया गया है लेकिन नियमों में बदलाव करके शोध प्रोजेक्ट को शुरू किया जाएगा.

 मिलावट की जांच के लिए नहीं बन सका लैब

2021 में काला नमक तत्कालीन तत्कालीन जिलाधिकारी संजीव रंजन को अच्छा काम करने के लिए पीएम अवार्ड भी मिला. सम्मान की राशि 20 लाख रुपए से काला नमक भवन बनाया गया जिसमें लैब भी बनाया जाना था. काला नमक चावल प्रोत्साहन बोर्ड का गठन भी हुआ लेकिन बोर्ड ने अपना काम शुरू नहीं किया. बोर्ड की नियम शर्तों का खाका भी नहीं खींचा गया जिसके चलते अब किसान मायूस है. 

 

 

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