यूपी में एजेंसियों को तूर-चना-मसूर और सरसों खरीद का टारगेट तय, फसल बेचने के लिए Farmer ID अन‍िवार्य

यूपी में एजेंसियों को तूर-चना-मसूर और सरसों खरीद का टारगेट तय, फसल बेचने के लिए Farmer ID अन‍िवार्य

उत्तर प्रदेश में रबी विपणन वर्ष 2026-27 के लिए तूर, चना, मसूर और सरसों की सरकारी खरीद 7 अप्रैल से शुरू होगी. राज्य सरकार ने एजेंसियों के बीच लक्ष्य तय कर दिए हैं और किसानों के लिए फार्मर रजिस्ट्री अनिवार्य कर दी है, जिससे उन्हें एमएसपी का लाभ मिल सके.

UP Agri Min Surya Pratap ShahiUP Agri Min Surya Pratap Shahi
क‍िसान तक
  • Noida,
  • Apr 01, 2026,
  • Updated Apr 01, 2026, 9:11 PM IST

उत्तर प्रदेश में रबी मार्केटिंग सीजन 2026-27 के लिए तूर, चना, मसूर और लाही-सरसों की सरकारी खरीद की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं. राज्य सरकार ने मूल्य समर्थन योजना के तहत इन फसलों की खरीद के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी करते हुए एजेंसियों के बीच लक्ष्य तय कर दिए हैं. निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, प्रदेश में खरीद प्रक्रिया 7 अप्रैल से शुरू होगी. कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने स्पष्ट किया कि इस बार मूल्य समर्थन योजना (PSS) का लाभ केवल उन्हीं किसानों को मिलेगा, जिन्होंने अपनी फार्मर रजिस्ट्री पूरी कर ली है. उन्होंने किसानों से अपील की कि वे जल्द से जल्द पंजीकरण कराकर खरीद प्रक्रिया में शामिल हों, ताकि उन्हें एमएसपी का लाभ समय पर मिल सके.

केंद्रीय एजेंसियों में 80:20 फीसदी का बंटवारा

सरकार ने खरीद लक्ष्य का 80 प्रतिशत हिस्सा नैफेड और 20 प्रतिशत एनसीसीएफ को सौंपा है. नैफेड को प्रदेश के अधिकांश जनपदों में खरीद की जिम्मेदारी दी गई है, जबकि एनसीसीएफ को चुनिंदा जिलों में कार्य करना होगा. दोनों एजेंसियों को फसलवार स्पष्ट लक्ष्य दिए गए हैं, जिससे खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता और गति सुनिश्चित हो सके.

फसलों के लिए तय हुआ बड़ा खरीद लक्ष्य

इस वर्ष तूर के लिए 1,13,780 मीट्रिक टन, चना के लिए 2,24,000 मीट्रिक टन, मसूर के लिए 6,77,000 मीट्रिक टन और लाही-सरसों के लिए 5,30,000 मीट्रिक टन खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. इसके तहत नैफेड के माध्यम से तूर की 91,024 मीट्रिक टन, चना की 1,79,200 मीट्रिक टन, मसूर की 5,41,600 मीट्रिक टन और सरसों की 4,24,000 मीट्रिक टन खरीद की जाएगी, जबकि एनसीसीएफ के जरिए तूर की 22,756 मीट्रिक टन, चना की 44,800 मीट्रिक टन, मसूर की 1,35,400 मीट्रिक टन और सरसों की 1,06,000 मीट्रिक टन खरीद सुनिश्चित की जाएगी. इनमें मसूर और सरसों का दायरा सबसे बड़ा रखा गया है, जबकि चना और तूर के लिए भी पर्याप्त मात्रा तय की गई है, जिससे किसानों को उनकी उपज का बेहतर दाम मिलने की उम्मीद है.

राज्य एजेंसियों को भी मिली अहम जिम्मेदारी

राज्य स्तर पर क्रय एजेंसियों के बीच लक्ष्यों का स्पष्ट प्रतिशत आधारित विभाजन किया गया है. यूपीपीसीयू को सबसे बड़ा 40 प्रतिशत हिस्सा सौंपा गया है, जबकि यूपीपीसीएफ को 20 प्रतिशत लक्ष्य दिया गया है. इसके अलावा जैफेड और यूपीएसएस को 15-15 प्रतिशत तथा हॉफेड को 10 प्रतिशत क्रय लक्ष्य आवंटित किया गया है. सभी एजेंसियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे निर्धारित प्रतिशत और आवंटित क्षेत्रों के अनुसार ही खरीद कार्य सुनिश्चित करें, ताकि प्रक्रिया सुचारू और पारदर्शी बनी रहे.

जिलावार केंद्र और सख्त निगरानी

शासन ने निर्देश दिए हैं कि खरीद केंद्रों की संख्या जिलों में वास्तविक उत्पादन और सरप्लस के आधार पर तय होगी. जिलाधिकारी की अनुमति से केंद्र खोले जाएंगे और पीएसएस गाइडलाइन्स का सख्ती से पालन कराया जाएगा. पूरी प्रक्रिया की निगरानी शासन स्तर से की जाएगी ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी न हो और किसानों को समय पर भुगतान मिल सके.

केंद्र के साथ समन्वय पर जोर

इस समीक्षा बैठक से पहले कृषि मंत्री ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आयोजित वर्चुअल बैठक में भी भाग लिया. इसमें फार्मर आईडी, उर्वरकों के संतुलित उपयोग, कृषि अभियानों और खरीद रणनीति जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई. इससे स्पष्ट है कि राज्य और केंद्र मिलकर किसानों को बेहतर समर्थन देने की दिशा में काम कर रहे हैं.

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