कम बारिश होने से इस राज्य में बर्बाद हो गई गेहूं की फसल, उत्पादन में 7 फीसदी तक गिरावट की संभावना

कम बारिश होने से इस राज्य में बर्बाद हो गई गेहूं की फसल, उत्पादन में 7 फीसदी तक गिरावट की संभावना

राहुल कटोच ने कहा कि हाल ही में हुई बारिश के कारण गेहूं की फसल रिकवरी चरण में है. हालांकि, आने वाले दिनों में, किसानों को पीला रतुआ की घटना के बारे में सतर्क रहने की जरूरत है और यदि लक्षण दिखाई देते हैं, तो उन्हें फसल पर प्रोपिकोनाज़ोल 25 प्रतिशत ईसी @ 1 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी का छिड़काव करना चाहिए.

हिमाचल प्रदेश में औसत से कम बारिश से गेहूं की फसल बर्बाद. (सांकेतिक फोटो)हिमाचल प्रदेश में औसत से कम बारिश से गेहूं की फसल बर्बाद. (सांकेतिक फोटो)
क‍िसान तक
  • Noida,
  • Feb 23, 2024,
  • Updated Feb 23, 2024, 1:59 PM IST

हिमाचल प्रदेश में इस बार सर्दी का मौसम लंबे समय तक शुष्क रहने के कारण फसलों के ऊपर बुरा असर पड़ा है. कृषि विभाग का अनुमान है कि कांगड़ा में शुष्क मौसम से सबसे अधिक प्रभावित गेहूं की फसल हुई है. इससे गेहूं के उत्पादन में लगभग 5 से 7 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है. ऐसे कांगड़ा जिले में गेहूं की खेती 91,000 हेक्टेयर में फैली हुई है. अनुमान है कि 4,000 से 5,000 हेक्टेयर क्षेत्र सूखे से गंभीर रूप से प्रभावित होगा, जहां उत्पादन में थोड़ी गिरावट देखी जा सकती है.

द हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, कांगड़ा के उप निदेशक (कृषि) राहुल कटोच ने कहा है कि हाल ही में हुई बारिश के कारण, गेहूं की फसल रिकवरी चरण में है. अधिकारियों ने नोट किया कि जनवरी के दौरान, फसल मुख्य रूप से ताज जड़ आरंभ चरण में थी और शुष्क मौसम से प्रतिकूल रूप से प्रभावित हुई थी. हालांकि, हाल की बारिश के कारण प्रभावित क्षेत्रों में संभावित सुधार का अनुमान है. पहाड़ी राज्य का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा सिंचाई के पानी के लिए बारिश पर निर्भर है. रबी सीजन में, गेहूं एक प्रमुख अनाज की फसल है. इसके बाद किसान मटर और मसूर की भी खेती करते हैं.

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पीला रतुआ रोग से करें बचाव

इसके अलावा किसान हिमाचल प्रदेश में सब्जियों की फसलें भी उगाई जाती हैं. बारिश की कमी के बीच जनवरी के दौरान कांगड़ा जिले के किसानों की रबी फसलों को लेकर चिंता बढ़ रही थी, क्योंकि कई क्षेत्र वर्षा आधारित हैं. राहुल कटोच ने कहा कि हाल ही में हुई बारिश के कारण गेहूं की फसल रिकवरी चरण में है. हालांकि, आने वाले दिनों में, किसानों को पीला रतुआ की घटना के बारे में सतर्क रहने की जरूरत है और यदि लक्षण दिखाई देते हैं, तो उन्हें फसल पर प्रोपिकोनाज़ोल 25 प्रतिशत ईसी @ 1 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी का छिड़काव करना चाहिए.

गठित की गईं निगरानी टीमें

विभाग ने जिले में फसलों की निगरानी के लिए चौधरी सरवन कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय, पाल्मापुर के साथ मिलकर निगरानी टीमें भी गठित की हैं. वहीं, कांगड़ा के उपायुक्त हेम राज बैरवा ने हाल ही में एक समीक्षा बैठक की, जिसमें जिले में कम बारिश के कारण फसलों को हुए नुकसान का आकलन करने और फसल बीमा योजना के तहत पंजीकृत किसानों को मुआवजा देने के लिए उचित कदम उठाने के निर्देश दिए गए. हिमाचल प्रदेश में जनवरी के दौरान छिटपुट वर्षा हुई. जबकि, दिसंबर में भी बारिश नहीं हुई थी.

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100 फीसदी कम बारिश

वहीं, बीते जनवरी महीने में खबर सामने आई थी कि इस साल हिमाचल प्रदेश में किसानों को लंबे समय तक सूखे का सामना करना पड़ा. सर्दी के मौसम में कम बारिश और कम बर्फबारी होने से रबी व बागवानी फसल की खेती करने वाले किसानों की चिंता बढ़ गई है. किसानों का कहना है कि अगर आने वाले दिनों में प्रयाप्त मात्रा में बारिश और बर्फबारी नहीं होती है, तो फसलों को नुकसान पहुंच सकता है, जिससे उत्पादन भी प्रभावित होगा. हिमाचल प्रदेश में दिसंबर में 83 फीसदी कम बारिश हुई. जबकि 12 जनवरी तक 100 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई थी.

 

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