प्याज कीमतों में भारी गिरावट, महाराष्ट्र के किसानों ने सरकार से MIS लागू करने की मांग की

प्याज कीमतों में भारी गिरावट, महाराष्ट्र के किसानों ने सरकार से MIS लागू करने की मांग की

पश्चिम एशिया में युद्ध के असर से प्याज की कीमतों में भारी गिरावट आई है. महाराष्ट्र के किसान लागत से कम दाम मिलने पर संकट में हैं और सरकार से मार्केट इंटरवेंशन स्कीम लागू करने की मांग कर रहे हैं.

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क‍िसान तक
  • New Delhi ,
  • Mar 30, 2026,
  • Updated Mar 30, 2026, 1:28 PM IST

पश्चिमी एशिया में युद्ध के चलते प्याज की थोक कीमतें लगभग आधी होकर 800 रुपये प्रति क्विंटल रह गई हैं, जिससे किसानों के लिए अपनी उत्पादन लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है. ऐसे में महाराष्ट्र के प्याज किसानों के सबसे बड़े संगठन ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से 'मार्केट इंटरवेंशन स्कीम' (MIS) लागू करने की अपील की है. यह केंद्र सरकार की एक ऐसी नीति है, जो कीमतों के उत्पादन लागत से नीचे गिरने पर किसानों को मजबूरी में कम दाम पर बेचने (डिस्ट्रेस सेल) से बचाती है.

मुख्यमंत्री को 28 मार्च को लिखे एक पत्र में, नासिक स्थित 'महाराष्ट्र प्याज उत्पादक किसान संघ' ने बताया कि पिछले चार हफ्तों में, युद्ध के कारण प्याज से भरे 150 से ज्यादा कंटेनर अलग-अलग बंदरगाहों पर फंस गए हैं. इससे घरेलू बाजारों में प्याज की भारी आवक हो गई है, जिसके चलते थोक कीमतें तेजी से गिर गई हैं.

कीमतें गिरकर 800 रुपये प्रति क्विंटल

प्याज किसान संघ के अध्यक्ष भरत दिघोले ने 'हिंदुस्तान टाइम्स' को बताया, "फरवरी के आखिरी हफ्ते में, युद्ध शुरू होने से पहले, प्याज की कीमतें 1,500 रुपये प्रति क्विंटल से काफी ऊपर थीं. लेकिन पिछले तीन दिनों में, कीमतें गिरकर 800 रुपये प्रति क्विंटल या उससे भी नीचे आ गई हैं. कुछ मामलों में तो कीमतें 300 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई हैं."

उन्होंने बताया कि प्याज के उत्पादन की लागत 1,000 रुपये प्रति क्विंटल से ज्यादा है, और कीमतों में आई इस भारी गिरावट ने किसानों को भारी नुकसान की मार झेलने पर मजबूर कर दिया है.

मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कीमतों में आई गिरावट का जिक्र करते हुए यह भी कहा गया है, "हालात की गंभीरता और कीमतों में लगभग 50% की गिरावट साफ तौर पर यह दर्शाती है कि बाजार में प्याज की 'डिस्ट्रेस सेल' हो रही है. यह स्थिति सरकार के हस्तक्षेप के लिए निर्धारित मानदंडों को पूरा करती है. इसलिए राज्य सरकार को MIS लागू करने के लिए तुरंत केंद्र सरकार को एक प्रस्ताव भेजना चाहिए. इससे कीमतों को ऊपर उठाने में मदद मिलेगी."

निर्यात नीतियों के कारण गिरे दाम

पत्र में यह भी कहा गया है कि प्याज किसान पहले से ही निर्यात नीतियों के कारण समस्याओं का सामना कर रहे थे, और युद्ध ने इस संकट को और भी गहरा कर दिया है. पत्र के अनुसार, निर्यात नीतियों से जुड़ी बाधाओं के कारण पिछले दो वर्षों में प्याज का निर्यात 2.5 मिलियन टन से घटकर 1.2 मिलियन टन रह गया है.

दिघोले ने कहा, "किसानों को राहत देने के लिए सरकार को तहसील स्तर पर प्याज की खरीद करनी चाहिए."

महाराष्ट्र राज्य कृषि मूल्य आयोग के प्रमुख पाशा पटेल ने बताया कि मुख्यमंत्री प्याज की कीमतों से जुड़े इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं, और वह जल्द ही केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल से मिलकर निर्यात से जुड़े इस मसले पर चर्चा करेंगे. "पिछले कुछ हफ्तों से प्याज की कीमतें गिर रही हैं और मुख्यमंत्री ने तीन दिन पहले ही इस पर एक बैठक की थी. उन्होंने प्रशासन को निर्देश दिया है कि एक कमेटी बनाई जाए, जिसमें कृषि और वित्त विभागों के अतिरिक्त मुख्य सचिव और मार्केटिंग विभाग के सचिव शामिल हों, ताकि प्याज किसानों की मदद के लिए तुरंत उपाय सुझाए जा सकें. उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया है कि वह जल्द ही इस मुद्दे पर गोयल से मुलाकात करेंगे," पटेल ने HT को बताया.

उन्होंने कहा कि प्याज की सप्लाई बढ़ा दी गई है और उसे बेचने के लिए बाजार उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं.

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