कम लागत, ज्यादा मुनाफा: IIVR की 15 नई सब्जी किस्में किसानों के लिए बनेगी वरदान

कम लागत, ज्यादा मुनाफा: IIVR की 15 नई सब्जी किस्में किसानों के लिए बनेगी वरदान

भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान के की ओर से सब्जी की 15 नई किस्मों का राज्य स्तरीय विमोचन किया गया. सब्जी की ये किस्में कम लागत और कम पानी में बेहतर उत्पादन देने वाली है. इससे सब्जी की खेती करने वाले किसानों को काफी फायदा होगा.

धर्मेंद्र सिंह
  • Varanasi ,
  • Mar 29, 2026,
  • Updated Mar 29, 2026, 8:34 AM IST

भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (आईआईवीआर) ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए 15 नई सब्जी किस्मों का राज्य स्तरीय विमोचन किया है. सब्जी की ये 15 नई किस्में कम लागत और कम पानी में बेहतर उत्पादन देने वाली है. साथ ही ये सभी किस्में रोग रोधी भी है. वहीं, इन किस्मों का विमोचन 15वीं राज्य समिति की बैठक में जारी की गईं, जो संस्थान के वैज्ञानिक अनुसंधान और नवाचार का बड़ा परिणाम हैं.

टमाटर की कम पानी में ज्यादा उत्पादन वाली किस्में

नई किस्मों में टमाटर की कई विशेष वैरायटी शामिल है. ‘काशी चेरी टमाटर-3’ (पीले फल) और ‘काशी चेरी टमाटर-14’ (लाल फल) बाजार में आकर्षण बढ़ाएंगी. ‘काशी दक्ष’ कम नमी में भी बेहतर उत्पादन देती है और 50 फीसदी तक पानी की कर सकती है. वहीं,  ‘काशी श्रेष्ठा’ आकर्षक लाल फलों के लिए जानी जाएगी, जबकि ‘काशी आर्या’ टमाटर लीफ कर्ल वायरस के प्रति प्रतिरोधी है. 

मटर की किस्में: रोगों से सुरक्षा और बेहतर स्वाद

मटर में ‘काशी त्रिशक्ति’ पाउडरी मिल्ड्यू, डाउनी मिल्ड्यू और रस्ट जैसे रोगों के प्रति प्रतिरोधी है. वहीं ‘काशी धन्वी’ अगेती, मीठी और रोग सहनशील किस्म है, जिससे किसानों को जल्दी और बेहतर उत्पादन मिलेगा. 

अन्य सब्जियों में भी नवाचार की झलक

अन्य फसलों में ‘काशी अर्पिता’ (करेला) ग्रीष्मकालीन खेती के लिए उपयुक्त है, जबकि ‘काशी प्रिया’ (लौकी) उच्च तापमान में भी अच्छी पैदावार देती है. इसके अलावा ग्वार (क्लस्टर बीन) की नई किस्म उच्च फाइबर और प्रोटीन से भरपूर है. ‘काशी रुद्राक्ष’ (विंग्ड बीन) गहरे बैंगनी रंग और पोषण के लिए खास है, जबकि ‘काशी लाल चौलाई’ गर्मी और बरसात दोनों मौसमों में उगाई जा सकती है. 

सिंघाड़ा, बेबी कॉर्न और कमल को भी नई पहचान

‘काशी सिंघाड़ा-1’ उत्तर प्रदेश की पहली उन्नत सिंघाड़ा किस्म है, जो अगेती होने के साथ उच्च गुणवत्ता वाली है. साथ ही ‘काशी परी’ (बेबी कॉर्न) प्रति पौधा 3–5 भुट्टे देती है. वहीं ‘काशी वैभव’ (कमल/लोटस) देश की पहली अगेती और बहुवर्षीय किस्म के रूप में सामने आई है. 

इन किस्मों से होगा किसानों को फायदा 

भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि इन किस्मों के विकास में मौसम के अनुकूल कम समय और कम लागत में किसानों को बेहतर मुनाफा देने वाली सब्जी फसलों पर विशेष ध्यान दिया गया है. यह पहल “विकसित भारत 2047” मिशन के अनुरूप है. उन्होंने कहा कि ये नई किस्में किसानों को बेहतर उत्पादन, कम लागत, रोगों से सुरक्षा और पोषण सुरक्षा प्रदान करेंगी, जिससे उनकी आय में भी वृद्धि होगी. 

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