
त्योहारी सीजन के बीच ग्राहकों को अरहर दाल की महंगाई का झटका लग सकता है. इसकी वजह है पूर्वी अफ्रीकी देशों में अरहर का महंगा होना. पूर्वी अफ्रीका जैसे देशों में, जहां अरहर (पिजन-पी) का उत्पादन होता है, वहां उम्मीद से कम फसल होने के कारण इसकी कीमतें 10 प्रतिशत से अधिक बढ़ गई हैं. दूसरी ओर, भारत में अरहर के आयात के मामले में अफ्रीकी उत्पादक देश मुख्य बाजार बनकर उभरे हैं. अफ्रीकी देशों में अरहर की महंगाई का प्रभाव भारत के बाजारों में भी दिख सकता है.
इंडिया पल्सेस एंड ग्रेन्स एसोसिएशन (IPGA) के चेयरमैन बिमल कोठारी ने 'बिजनेसलाइस' से कहा, "अफ्रीकी अरहर बहुत सस्ती थी. उम्मीद से कम फसल की चिंता के कारण अफ्रीका में कीमतें लगभग 10 रुपये प्रति किलोग्राम बढ़ गई हैं. अफ्रीकी अरहर अब 70-75 रुपये प्रति किलो बिक रही है, जो पहले 65 रुपये में बिकती थी." हालांकि अफ्रीका में कीमतें बढ़ी हैं, फिर भी वे भारत के 8,450 रुपये प्रति क्विंटल के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से कम हैं.
कोठारी ने कहा कि कीमतों में यह बढ़ोतरी उम्मीद से कम फसल के कारण हुई है. उन्होंने कहा, "पहले हमें उम्मीद थी कि फसल पिछले साल से बेहतर होगी. अब व्यापारिक अनुमानों के अनुसार, फसल शायद पिछले साल जितनी अच्छी न हो. पिछले साल की तुलना में उत्पादन में कमी हो सकती है."
अरहर के दाम में संभावित तेजी की एक और वजह है. मंडियों में इसका भाव एमएसपी से ऊपर चल रहा है. एगमार्कमेट की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, बीते 29 सितंबर को अरहर का भाव 8615 रुपये प्रति क्विंटल रहा जबकि 28 सितंबर को यह रेट 8686 रुपये दर्ज किया गया.
26 सितंबर को मामूली गिरावट के साथ अरहर का भाव 8495 रुपये रहा. अरहर के एमएसपी 8450 रुपये प्रति क्विंटल की तुलना में ये सभी भाव अधिक हैं. सरकारी रेट में इस वृद्धि का असर खुदरा बाजार में अरहर की महंगाई के रूप में दिख सकता है.
मंडियों में अरहर की आवक पर एक नजर डालें तो बीते 3 दिनों में इसमें बढ़ोतरी है. 29 सितंबर को आवक 2592 मीट्रिक टन रही जबकि 28 सितंबर को 2202 मीट्रिक टन और 27 सितंबर को 403 मीट्रिक टन आवक दर्ज की गई.
अरहर के अलावा, बाकी दालों के दाम में भी तेजी के संकेत हैं. त्योहारों के समय मांग बढ़ने और कमजोर मॉनसून की वजह से फसल खराब होने के डर से, मुख्य दालों—जैसे चना, मूंग, मटर और तुअर (अरहर)—की कीमतों में पिछले महीने 11% तक की बढ़ोतरी हुई है. सिर्फ पिछले हफ्ते ही कीमतों में 3% से 5% तक की बढ़ोतरी हुई है.
इंडियन पल्सेस एंड ग्रेन्स एसोसिएशन (IPGA) के आंकड़ों के मुताबिक, देश में सबसे अधिक खाई जाने वाली दाल 'चना' की थोक कीमतों में दिल्ली में पिछले महीने 11% की बढ़ोतरी हुई. इसी दौरान, मूंग की कीमतों में 10.6%, तुअर में 6.5% और मटर में 6% की बढ़ोतरी हुई.
एसोसिएशन ने बताया कि अल नीनो का असर अब साफ तौर पर दिख रहा है, खासकर कर्नाटक और महाराष्ट्र के बड़े हिस्सों को सूखाग्रस्त घोषित किए जाने के बाद.