पंजाब की शान हैं धान की ये 5 किस्में, ज्यादा पैदावार से लेकर कम पानी की खेती तक जानें पूरी जानकारी

पंजाब की शान हैं धान की ये 5 किस्में, ज्यादा पैदावार से लेकर कम पानी की खेती तक जानें पूरी जानकारी

पंजाब को देश का धान का कटोरा कहा जाता है और यहां की खेती में धान की कई बेहतरीन किस्मों का अहम योगदान है. बदलते मौसम, पानी की कमी और बढ़ती लागत के बीच किसान अब ऐसी किस्मों को पसंद कर रहे हैं, जो कम समय में तैयार हों, कम पानी में अच्छी पैदावार दें और बाजार में बेहतर मांग रखती हों. आइए जानते हैं पंजाब में उगाई जाने वाली उन 5 प्रमुख धान किस्मों के बारे में.

धान की खेतीधान की खेती
संदीप कुमार
  • Noida,
  • Jun 20, 2026,
  • Updated Jun 20, 2026, 9:16 AM IST

पंजाब में धान की खेती की बात हो और देश में इसका नाम सबसे ऊपर न आए, ऐसा हो नहीं सकता. उपजाऊ मिट्टी, भरपूर सिंचाई सुविधाओं और आधुनिक कृषि तकनीकों के दम पर पंजाब लंबे समय से देश के प्रमुख धान उत्पादक राज्यों में शामिल है. लेकिन अब खेती की तस्वीर बदल रही है. लगातार घटता भूजल स्तर, मौसम में बदलाव और बढ़ती लागत ने किसानों को ऐसी धान किस्मों की ओर बढ़ने के लिए मजबूर किया है, जो कम जोखिम में बेहतर उत्पादन दे सकें. यही वजह है कि पंजाब के किसान अब सिर्फ ज्यादा पैदावार ही नहीं, बल्कि कम पानी की जरूरत, अच्छी क्वालिटी और बाजार में ज्यादा मांग वाली किस्मों को भी प्राथमिकता दे रहे हैं. पंजाब में कई उन्नत धान किस्मों की खेती होती है, लेकिन कुछ किस्में अपनी शानदार पैदावार और बेहतर मुनाफे के कारण किसानों के बीच खास पहचान बना चुकी हैं. आइए जानते हैं पंजाब में उगाई जाने वाली उन 5 प्रमुख धान किस्मों के बारे में.

1. पीआर 126 (PR 126)

पीआर 126 पंजाब में सबसे ज्यादा पसंद की जाने वाली धान किस्मों में से एक है. इसे पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU), लुधियाना द्वारा विकसित किया गया है. इस किस्म की सबसे बड़ी खासियत इसकी कम अवधि में तैयार होने वाली फसल है. जहां कई पारंपरिक धान किस्मों को पकने में ज्यादा समय लगता है, वहीं PR 126 लगभग 123-125 दिनों में तैयार हो जाती है. कम अवधि वाली यह किस्म किसानों के लिए कई मायनों में फायदेमंद है. इस किस्म की खेती में पानी की खपत भी कम होती है .इसके अलावा यह पराली प्रबंधन में भी मददगार मानी जाती है. अच्छी पैदावार क्षमता और बेहतर चावल क्वालिटी के कारण यह किस्म पंजाब के किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हुई है.

2. पीआर 131 (PR 131)

PR 131 पंजाब में खेती की जाने वाली एक और लोकप्रिय धान किस्म है. यह अपनी अच्छी पैदावार, मजबूत पौधों और बेहतर दाने की क्वालिटी के लिए जानी जाती है. इस किस्म की बालियां अच्छी तरह विकसित होती हैं, जिससे किसानों को स्थिर उत्पादन मिलने की उम्मीद रहती है. पंजाब के मौसम और खेती की परिस्थितियों के अनुकूल होने के कारण बड़ी संख्या में किसान इसकी खेती करना पसंद करते हैं.

3. पूसा बासमती 1121

बासमती चावल की बात करें तो पूसा बासमती 1121 का नाम सबसे प्रमुख किस्मों में लिया जाता है. अपने लंबे और पतले दाने, शानदार खुशबू और पकने के बाद बढ़ने वाली लंबाई के कारण यह किस्म देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी काफी प्रसिद्ध है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी मांग बनी रहती है, जिससे किसानों को सामान्य धान की तुलना में बेहतर कीमत मिलने की संभावना रहती है. हालांकि, इसकी अच्छी पैदावार के लिए किसानों को रोग प्रबंधन और वैज्ञानिक खेती तकनीकों का ध्यान रखना जरूरी होता है.

4. पूसा बासमती 1509

पूसा बासमती 1509 पंजाब के किसानों के बीच काफी लोकप्रिय बासमती किस्म है. इसकी खासियत यह है कि यह पूसा बासमती 1121 की तुलना में जल्दी तैयार हो जाती है. कम अवधि वाली फसल होने के कारण इसमें पानी की जरूरत कम होती है और किसान समय पर अगली फसल की तैयारी कर सकते हैं. अच्छी क्वालिटी वाले चावल और निर्यात बाजार में मांग के कारण यह किस्म किसानों को बेहतर अवसर प्रदान करती है.

5. PR 114

PR 114 पंजाब की पुरानी और भरोसेमंद धान किस्मों में शामिल रही है. लंबे समय से किसान इसकी खेती करते आ रहे हैं. यह किस्म अपनी स्थिर पैदावार और पंजाब के वातावरण के प्रति अच्छी अनुकूलता के लिए जानी जाती है. हालांकि, अब कई किसान कम अवधि वाली नई किस्मों की ओर बढ़ रहे हैं, लेकिन आज भी कई क्षेत्रों में PR 114 पर किसानों का भरोसा कायम है.

पंजाब में धान की खेती का तरीका

पंजाब में किसान आमतौर पर धान की खेती के लिए सबसे पहले नर्सरी तैयार करते हैं, जब पौधे तैयार हो जाते हैं, तो उन्हें खेतों में रोपाई के लिए लगाया जाता है. हालांकि, पानी की बचत और खेती की लागत कम करने के लिए अब कई किसान धान की सीधी बिजाई (Direct Seeded Rice-DSR) तकनीक को भी अपना रहे हैं. इस तकनीक में खेत में सीधे बीज बोए जाते हैं, जिससे पानी और मजदूरी दोनों की बचत होती है.

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