हरियाणा में धान की रोपाई ने पकड़ी रफ्तार, किसानों को अच्छी पैदावार की उम्मीद

हरियाणा में धान की रोपाई ने पकड़ी रफ्तार, किसानों को अच्छी पैदावार की उम्मीद

हरियाणा में धान की रोपाई ने रफ्तार पकड़ ली है और किसान अच्छी पैदावार की उम्मीद के साथ खेतों में जुटे हैं. 15.60 लाख हेक्टेयर में खेती का लक्ष्य रखा गया है, जबकि कृषि विभाग किसानों को आधुनिक तकनीक और जल संरक्षण के उपायों के लिए लगातार मार्गदर्शन दे रहा है.

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हरियाणा में धान की रोपाई ने पकड़ी रफ्तार, किसानों को अच्छी पैदावार की उम्मीदधान की नर्सरी (सांकेतिक तस्‍वीर)

हरियाणा में 15 जून से धान की रोपाई (Paddy Farming) की आधिकारिक शुरुआत के बाद से पूरे राज्य में कृषि कार्यों ने तेजी पकड़ ली है. किसान अपने खेतों में धान के पौधे लगाने में जुट गए हैं और इस बार अच्छी पैदावार की उम्मीद भी जताई जा रही है. जहां पहले गेहूं की कटाई के बाद खेत खाली पड़े थे, अब वही खेत हरे-भरे धान के पौधों से भरते जा रहे हैं.

खेतों में बढ़ी हलचल, नर्सरी पहले से तैयार

राज्य के किसानों ने समय रहते धान की अलग-अलग किस्मों की नर्सरी तैयार कर ली थी, जिसके चलते रोपाई का काम तेजी से चल रहा है. खेतों में मजदूरों की मदद से धान के पौधे लगाए जा रहे हैं. किसान इस बार मौसम को भी अनुकूल मान रहे हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि समय पर बारिश होने से सिंचाई में आसानी होगी और फसल अच्छी होगी.

15.60 लाख हेक्टेयर में धान की खेती का लक्ष्य

हरियाणा सरकार ने इस सीजन में करीब 15.60 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती का लक्ष्य रखा है. इसमें सबसे अधिक क्षेत्र करनाल जिले के लिए तय किया गया है, जहां 1.85 लाख हेक्टेयर में धान की रोपाई होगी. इसके बाद कैथल में 1.65 लाख हेक्टेयर, जींद में 1.50 लाख हेक्टेयर, सिरसा में 1.45 लाख हेक्टेयर, फतेहाबाद में 1.35 लाख हेक्टेयर, कुरुक्षेत्र में 1.20 लाख हेक्टेयर और हिसार में 1.05 लाख हेक्टेयर का लक्ष्य रखा गया है. वहीं यमुनानगर, अंबाला और सोनीपत जैसे जिलों में भी करीब 90-90 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती की जाएगी.

किसानों की पसंद बन रही अलग-अलग धान की किस्में

इस बार किसान लगभग बराबर मात्रा में पारंपरिक और बासमती धान की खेती कर रहे हैं. करीब 50 प्रतिशत क्षेत्र में परमल (PR) किस्में जैसे PR-114, PR-126 और PR-131 लगाई जा रही हैं, जो सरकार द्वारा एमएसपी पर खरीदी जाती हैं. वहीं बाकी 50 प्रतिशत क्षेत्र में बासमती धान की किस्में लगाई जा रही हैं, जिनकी मांग देश और विदेश दोनों बाजारों में है.

बासमती किस्मों में Pusa Basmati-1509, Pusa-1121, Pusa-1718 और Pusa-1692 की काफी मांग देखी जा रही है. किसान भी इन किस्मों को बेहतर मुनाफे के लिए चुन रहे हैं.

किसानों का अनुभव और तैयारी

किसानों का कहना है कि इस बार मौसम काफी हद तक अनुकूल रहा है, जिससे रोपाई का काम आसानी से हो रहा है. एक किसान यशबीर ने बताया कि उन्होंने लगभग 10 एकड़ में PR-114 और 15 एकड़ में Pusa-1509 बासमती की रोपाई शुरू कर दी है. वहीं दूसरे किसान विकास ने बताया कि उन्होंने 10 एकड़ में बासमती 1509 लगा दी है और बाकी खेतों में अगले कुछ दिनों में रोपाई पूरी कर लेंगे. किसानों का कहना है कि कृषि विभाग की नियमित सलाह से उन्हें काफी मदद मिल रही है और वे खाद व पानी का संतुलित उपयोग करने पर ध्यान दे रहे हैं ताकि लागत कम हो और उत्पादन बेहतर हो सके.

कृषि विभाग और वैज्ञानिकों की सक्रिय भूमिका

कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अधिकारी और आईसीएआर के वैज्ञानिक लगातार गांवों का दौरा कर रहे हैं और किसानों को खेती की आधुनिक तकनीकों, खाद के सही उपयोग और पानी की बचत के तरीकों के बारे में जागरूक कर रहे हैं. विभाग की ओर से फील्ड स्टाफ और तकनीकी विशेषज्ञों को भी तैनात किया गया है ताकि किसानों को किसी भी समस्या का तुरंत समाधान मिल सके.

डीएसआर तकनीक को भी मिल रहा बढ़ावा

कृषि विभाग के अनुसार इस बार करनाल जैसे प्रमुख जिलों में पारंपरिक रोपाई के साथ-साथ डायरेक्ट सीडेड राइस (DSR) तकनीक को भी बढ़ावा दिया जा रहा है. अब तक करीब 16,000 एकड़ क्षेत्र में डीएसआर तकनीक अपनाई जा चुकी है, जिससे पानी की बचत और लागत में कमी आने की उम्मीद है.

बेहतर उत्पादन की उम्मीद

अधिकारियों का मानना है कि अगर मौसम इसी तरह अनुकूल रहा और किसान आधुनिक तकनीकों का सही उपयोग करते रहे, तो इस बार हरियाणा में धान का उत्पादन अच्छा रह सकता है. पूरी रोपाई प्रक्रिया सुचारू रूप से चल रही है और आने वाले दिनों में इसमें और तेजी आने की उम्मीद है.

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