खरीफ फसलों पर मौसम की मारपिछले कुछ हफ्तों से लगातार गर्म और सूखा मौसम न सिर्फ इंसानों के लिए, बल्कि फसलों के लिए भी नुकसानदायक है. धान सहित गन्ने, कपास, सूरजमुखी, मूंग, उड़द, सब्जियों और फलों जैसी सभी खरीफ फसलें भीषण गर्मी से बुरी तरह प्रभावित हो सकती हैं. यह खतरा इसलिए भी गंभीर है क्योंकि इस बार अल नीनो की मार पड़ रही है.
पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी के कपास विशेषज्ञों के अनुसार, ज्यादा गर्मी का कपास के पौधों पर बुरा असर पड़ता है. तने के चारों ओर एक पीला घेरा बन जाता है, जो बैक्टीरिया और बीमारी फैलाने वाले दूसरे कीटाणुओं के हमले के प्रति संवेदनशील होता है. नतीजतन, तना मुरझा जाता है और पौधा मर जाता है.
जून का गर्म तापमान फलों की फसलों, खासकर नए लगाए गए फलों के पेड़ों के लिए भी असहनीय होता है, जिन्हें काफी सुरक्षा की जरूरत होती है. यूनिवर्सिटी के बागवानी विशेषज्ञों के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम दिशा से तेज धूप सीधे पेड़ों के तनों पर पड़ने से अक्सर फलों के पौधों को 'सन-बर्न' (धूप से झुलसने) जैसी चोटें आती हैं. सूखे मौसम के कारण पानी भाप बनकर उड़ने से नमी का नुकसान ज्यादा होता है, जिससे पेड़ों के तने नमी खो देते हैं. उनमें दरारें पड़ जाती हैं और कभी-कभी छाल पूरी तरह से उखड़ जाती है, जिससे अंदर की परतें खुल जाती हैं. कभी-कभी ऐसे नुकसान से पौधा मर जाता है या उसके किसी हिस्से को गंभीर नुकसान पहुचता है. आम, लीची, खट्टे फलों (सिट्रस), अमरूद और पपीते के फलों के पेड़ गर्म मौसम से होने वाले नुकसान के प्रति ज्यादा संवेदनशील होते हैं.
PAU के वैज्ञानिकों ने किसानों को फलों के पौधों को गर्मी से बचाने के लिए उचित सावधानी बरतने की सलाह दी है. उन्होंने पेड़ों के निचले तनों पर सफेद रंग (व्हाइट वॉश) का घोल लगाने की सलाह दी है. सफेद रंग का घोल 100 लीटर पानी में 25 किलो बुझा हुआ चूना, 500 ग्राम कॉपर सल्फेट और 500 ग्राम गोंद मिलाकर तैयार किया जा सकता है. साथ ही, नियमित अंतराल पर बार-बार सिंचाई करने से गर्मी के तनाव को कम करने में मदद मिलती है. जो नए फलों के पौधे नाजुक होते हैं, उन्हें सरकंडा, पराली या खजूर के पत्तों से बनी छप्पर या कुल्ली लगाकर गर्मी से बचाया जाना चाहिए.
खेतों में लगी मिर्च, भिंडी और कुकुरबिट्स (जैसे करेला, लौकी) जैसी सब्जियां भी गर्मी से प्रभावित होती हैं. अधिक तापमान इन सब्जियों में फल लगने की क्षमता को प्रभावित करता है. किसानों से इन फसलों में फूल और फल झड़ने की खबरें मिली हैं. ऐसा असामान्य तापमान के कारण हो रहा है, जो परागण की प्रक्रिया में बाधा डालता है और इस तरह फल नहीं लग पाते हैं. इसलिए, किसानों को सलाह दी जाती है कि वे थोड़ी-थोड़ी मात्रा में लेकिन बार-बार सिंचाई करें ताकि कुछ हद तक ठंडा माहौल बना रहे.
खासकर मचान या सहारे पर उगाई गई करेले की फसल में धूप से झुलसने (सन-बर्न) की समस्या भी देखी गई है. यह कोई बीमारी नहीं है, बल्कि ज्यादा तापमान के कारण होने वाली समस्या है. जो किसान नेट-हाउस में खेती कर रहे हैं, वे नेट-हाउस की मिट्टी को पलटकर या उसकी जुताई करके ज्यादा तापमान का फायदा उठा सकते हैं, ताकि मिट्टी से फैलने वाली बीमारियों के कीटाणु और निमेटोड्स खत्म हो सकें. मिट्टी का तापमान और बढ़ाने के लिए इसे पॉलीथीन की शीट से भी ढका जा सकता है.
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