
तेलंगाना में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए हैदराबाद स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ प्लांट हेल्थ मैनेजमेंट (NIPHM) और राज्य सरकार की सोसाइटी फॉर एलिमिनेशन ऑफ रूरल पॉवर्टी (SERP) ने संयुक्त पहल शुरू की है. इस पहल के तहत राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (NMNF) के तहत राज्यभर में 326 बायो-इनपुट रिसोर्स सेंटर (BRC) लगाए जाएंगे. इन केंद्रों का उद्देश्य किसानों तक प्राकृतिक खेती से जुड़े जैविक इनपुट और तकनीकों को गांव स्तर पर पहुंचाना है.
इस अभियान को गति देने के लिए NIPHM ने 56 जिला स्तरीय अधिकारियों और 318 महिला उद्यमियों को विशेष प्रशिक्षण दिया है. SERP ने कृषि विभाग के सहयोग से विभिन्न जिलों से महिलाओं का चयन कर उन्हें प्रशिक्षण के लिए भेजा. प्रशिक्षण पूरा होने के बाद इन महिलाओं को गांवों में BRC स्थापित करने के लिए आवश्यक उपकरण और अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं.
इन केंद्रों के माध्यम से प्रशिक्षित महिलाएं जीवामृत, बीजामृत, दशपर्णी अर्क और अग्नास्त्र जैसे प्राकृतिक जैविक उत्पाद तैयार करेंगी. इनका उपयोग अपने खेतों के साथ-साथ आसपास के किसानों के खेतों में भी किया जाएगा. इससे रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भरता कम करने और कम लागत वाली खेती को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.
NIPHM की महानिदेशक तारा सत्यवती के मार्गदर्शन में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रमों का उद्देश्य विशेष रूप से कम बारिश वाले क्षेत्रों में महिलाओं को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए सक्षम बनाना है. इससे विविध फसलों की टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने और मिट्टी की क्वालिटी बनाए रखने में मदद मिलेगी.
NIPHM के निदेशक ओ. पी. शर्मा ने कहा कि प्रशिक्षित महिलाएं केवल जैविक इनपुट तैयार ही नहीं करेंगी, बल्कि अन्य किसानों और ग्रामीण महिलाओं को भी प्राकृतिक खेती की कम लागत वाली तकनीकों की जानकारी देंगी. इससे गांव स्तर पर मिट्टी और पौधों के स्वास्थ्य में सुधार के साथ प्राकृतिक खेती का दायरा भी तेजी से बढ़ेगा.
SERP की मुख्य कार्यकारी अधिकारी दिव्या देवराजन और मुख्य परिचालन अधिकारी रजिता ने ट्रेनिंग प्रोग्राम की रूपरेखा तैयार करने, प्रतिभागियों को जोड़ने और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों के लिए NIPHM को वित्तीय सहयोग उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. इस साझेदारी को तेलंगाना में प्राकृतिक खेती के विस्तार की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है. (पीटीआई)