
तेलंगाना के दाल उत्पादक किसानों के लिए एक अच्छी खबर है. दरअसल, बाजार में कीमतें न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP से नीचे रहने के कारण , तेलंगाना सरकार ने हस्तक्षेप करने और राज्य विपणन संघ (मार्केटिंग फेडरेशन) के माध्यम से खरीफ सीजन से तुअर (अरहर) की खरीद करने का निर्णय लिया है. राज्य सरकार का अनुमान है कि इस सीजन में कुल उत्पादन लगभग 3 लाख टन होगा, क्योंकि किसानों ने 2.02 लाख हेक्टेयर जमीन पर तुअर की खेती की है. दलहन फसल की 8,000 रुपये निर्धारित है, जबकि किसानों को बाजार में केवल 7,200 रुपये ही मिल रहे हैं.
प्रोफेसर जयशंकर, तेलंगाना कृषि विश्वविद्यालय की बाजार खुफिया इकाई ने अनुमान लगाया है कि कटाई के समय (जनवरी से फरवरी 2026) तुअर की कीमत प्रति क्विंटल लगभग 6,900-7,200 होगी.
तेलंगाना में पिछली खरीफ फसल के दौरान तुअर की खेती के क्षेत्र में मामूली गिरावट आई है, हालांकि देश में तुअर की कुल खेती के क्षेत्र में इसकी हिस्सेदारी बढ़ी है. कुल 46.09 लाख हेक्टेयर तुअर क्षेत्र में इसकी हिस्सेदारी 4.09 प्रतिशत थी, जबकि पिछले वर्ष यह घटकर 42.50 लाख हेक्टेयर रह गई, जिससे तेलंगाना में अरहर की हिस्सेदारी बढ़कर 6.09 प्रतिशत हो गई. तेलंगाना में अक्टूबर 2025 में तुअर की कीमत 6,441 रुपये प्रति क्विंटल थी, जबकि पिछले वर्ष इसी महीने में यह 8,022 रुपये प्रति क्विंटल थी.
तेलंगाना के कृषि मंत्री थुम्मला नागेश्वर राव ने कहा कि हमने हस्तक्षेप करने और उपज की खरीद करने का फैसला किया है. हमें केंद्र सरकार से 1.71 लाख टन तक की खरीद की अनुमति मिल गई है. तुअर के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) का संचालन 26 मार्च तक जारी रहेगा. प्रस्तावित 82 खरीद केंद्रों में से 13 केंद्र वर्तमान में चालू हैं. पिछले कुछ दिनों में मार्कफेड ने 32 किसानों से 30.25 टन तुअर 0.24 करोड़ रुपये में खरीदा है. उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे तुअर उत्पादन के केंद्र तैयार होते जाएंगे, हम वहां और केंद्र खोलेंगे.