
महाराष्ट्र में रबी सीजन के दौरान प्याज की खेती में लगातार बढ़ोतरी हो रही है. दरअसल, सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025–26 में राज्य में रबी प्याज का कुल रकबा 6.59 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया है, जो पिछले वर्ष 2024–25 के 6.52 लाख हेक्टेयर से थोड़ा अधिक है. वहीं, साल 2023–24 के 4.65 लाख हेक्टेयर की तुलना में काफी ज्यादा है. ऐसे में यह साफ संकेत है कि राज्य के किसान फिर से बड़े पैमाने पर रबी प्याज की खेती की ओर तेजी से लौट रहे हैं. सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक यह जानकारी महाराष्ट्र कृषि विभाग के आंकड़ों पर आधारित है. इन आंकड़ों से यह भी स्पष्ट होता है कि राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों में रबी प्याज के रकबे का रुझान एक जैसा नहीं है.
इस आंकड़े में सबसे अहम बात यह सामने आई है कि नाशिक क्षेत्र में रबी प्याज के रकबे में कमी दर्ज की गई है, जबकि पुणे क्षेत्र में प्याज की खेती का रकबा बढ़ा है. यानी जहां नाशिक क्षेत्र में किसान कुछ हद तक प्याज की खेती से पीछे हटे हैं, वहीं पुणे संभाग के किसानों ने इसमें ज्यादा रुचि दिखाई है. वैसे तो नाशिक को परंपरागत रूप से प्याज का बड़ा केंद्र माना जाता है, लेकिन बीते कुछ वर्षों में वहां किसानों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ा है. मौसम की अनिश्चितता, अधिक बारिश, भंडारण की समस्या, और कई बार बाजार में कम कीमत मिलने के कारण किसानों का भरोसा कुछ हद तक डगमगाया है. यही कारण माना जा रहा है कि नाशिक में रबी प्याज के रकबे में गिरावट देखने को मिली है.
वहीं दूसरी ओर पुणे क्षेत्र में हालात कुछ अलग हैं. यहां किसानों ने बेहतर सिंचाई व्यवस्था, फसल प्रबंधन और बाजार तक बेहतर पहुंच के चलते रबी प्याज की खेती को तेजी से अपनाया है. कई क्षेत्रों में प्याज को नकदी फसल के रूप में देखा जा रहा है, जिससे किसानों को अच्छी आमदनी की उम्मीद है.
2023–24 में प्याज की खेती का रकबा सबसे कम रहा, लेकिन इसके बाद तेजी से बढ़ोतरी हुई है. वहीं, 2024–25 में बड़ी छलांग देखने को मिली और 2025–26 में यह बढ़ोतरी भले ही मामूली हो, लेकिन ट्रेंड सकारात्मक बना हुआ है.
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि किसान अब फसल विविधीकरण पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं. सिर्फ पारंपरिक फसलों पर निर्भर रहने के बजाय किसान प्याज जैसी नकदी फसलों को भी प्राथमिकता दे रहे है. वहीं, रबी प्याज की खास बात ये है कि अगर मौसम और बाजार दोनों अनुकूल रहे, तो इससे अच्छी कमाई संभव हो सकती है. इसके अलावा, सरकार की योजनाएं, बेहतर बीज, आधुनिक खेती तकनीक और भंडारण सुविधाओं में धीरे-धीरे सुधार भी किसानों को रबी प्याज की ओर आकर्षित कर रहा है.
रबी प्याज का रकबा बढ़ने का सीधा असर बाजार पर भी पड़ता है. जब उत्पादन अच्छा होता है, तो प्याज की मांग बढ़ती है और कीमतों में स्थिरता आती है. इससे किसानों को तो फायदा होता ही है, साथ ही आम ग्राहकों को भी राहत मिलती है, क्योंकि प्याज की कीमतें अचानक बहुत ज्यादा नहीं बढ़ती.
कुल मिलाकर देखा जाए तो महाराष्ट्र में रबी प्याज की खेती एक बार फिर मजबूती पकड़ रही है. रकबे में बढ़ा हुआ आंकड़ा ये दिखाता है कि किसान इस फसल पर भरोसा कर रहे हैं. ऐसे में आने वाले वर्षों में अगर सही नीतियां, बेहतर बाजार व्यवस्था और किसानों को उचित दाम मिलते रहे, तो रबी प्याज का रकबा और भी बढ़ सकता है और यह महाराष्ट्र की कृषि अर्थव्यवस्था में एक मजबूत भूमिका निभा सकता है.