
भारत की मुख्य मसाला फसलों में इस बार एक मिला-जुला रुख दिख रहा है. मिर्च का उत्पादन तेजी से घटने की उम्मीद है, जबकि पिछले साल की कीमतों में तेजी के बाद हल्दी का प्रोडक्शन फिर से बढ़ेगा. चीन के बढ़ते दबदबे के बीच अदरक एक्सपोर्ट में उतार-चढ़ाव रह सकता है. इंटरनेशनल स्पाइस कॉन्फ्रेंस (ISC 2026) में पेश की गई क्रॉप इंटेलिजेंस से पता चलता है कि इस साल तीनों फसलों की सप्लाई फिर से ठीक हो सकती है जो पहले कुछ चुनौतियों से जूझ रही थी.
भारत दुनिया का सबसे बड़ा मिर्च प्रोड्यूसर है और यहां सालाना लगभग 20 लाख टन मिर्च उगाया जाता है. इस सीजन में आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक में कम रकबा और मौसम में बदलाव के कारण प्रोडक्शन में 35-40 परसेंट की गिरावट का अनुमान है. मिर्च की बुवाई अक्टूबर-नवंबर तक बढ़ा दी गई थी, और कटाई लगातार जारी है. उत्पादन में गिरावट की वजह से बाजार में उम्मीद से कम आवक है.
हालांकि कैरी-फॉरवर्ड स्टॉक (पिछले साल का स्टॉक) साल-दर-साल 8-10 परसेंट ज्यादा होने का अनुमान है, लेकिन ट्रेड अनुमान बताते हैं कि रकबे में कटौती के कारण असरदार सप्लाई अभी भी लगभग 30 परसेंट कम हो सकती है. इसका असर पिछले महीने से देखा जा रहा है. जनवरी से मिर्च की कीमतें बढ़ी हैं क्योंकि आवक निराशाजनक रही. एक्सपोर्ट डिमांड स्थिर बनी हुई है, और हाल के सीजन में चीन एक बड़ा खरीदार बनकर उभरा है.
हल्दी के बाजार, जिनमें 2023 की कम फसल और कम स्टॉक के बाद 2024-25 में तेजी देखी गई थी, अब सप्लाई-पॉज़िटिव हो रहे हैं. भारत, दुनिया भर में हल्दी के प्रोडक्शन का लगभग 80 परसेंट खुद पैदा करता है. रिपोर्ट के मुताबिक 2026 में प्रोडक्शन में 15 परसेंट की बढ़ोतरी की उम्मीद है, जो खासकर महाराष्ट्र में रकबे में 20 परसेंट बढ़ोतरी की वजह से है.
हालांकि, ज्यादा बारिश ने पैदावार में लगभग 5 परसेंट की कमी की है और कुछ इलाकों में चिंता बढ़ा दी है. 2024 मध्य से कीमतों में लगभग 16 परसेंट की गिरावट आई है क्योंकि प्रोडक्शन बेहतर हुआ है और बाजार में ज्यादा फसल की उम्मीदें बनी हैं. फिर भी, पिछले साल एक्सपोर्ट में 11 परसेंट की बढ़ोतरी और इंपोर्ट में तेज गिरावट के बाद स्टॉक का लेवल काफी कम बना हुआ है. ट्रेडर्स का कहना है कि आने वाले समय में दाम में स्थिरता लाने के लिए स्टॉक को सही मात्रा में बनाए रखना जरूरी होगा.
भारत लगभग 20 लाख टन के साथ दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा अदरक प्रोड्यूसर बना हुआ है, लेकिन इस सीजन में कम रकबे के कारण प्रोडक्शन लगभग 12 परसेंट गिर गया है. लगभग 90 परसेंट प्रोडक्शन देश में ही इस्तेमाल हो जाता है, जिससे एक्सपोर्ट की मात्रा कम ही बचती है.
अदरक के निर्यात में उतार-चढ़ाव है. अदरक का सबसे बड़ा खरीदार बांग्लादेश बना हुआ है, जहां शिपमेंट का लगभग 80 परसेंट हिस्सा जाता है. 2025 में सूखी अदरक का एक्सपोर्ट बढ़ा, जिससे प्रोडक्शन में सुधार के बावजूद घरेलू स्टॉक कम हो गया. भारत के अदरक निर्यात पर चीन का असर देखा जा रहा है जो अकेले 60 लाख टन पैदाावार करता है और पूरी दुनिया के एक्सपोर्ट बाजार पर हावी है. रिपोर्ट्स में कहा गया है कि चीन का अदरक एक्सपोर्ट जैसे-जैसे बढ़ रहा है, भारत के निर्यात में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है.