
अमेरिका और इजरायल के ईरान हमले के बाद हरियाणा के करनाल में चावल निर्यातक चिंतित नजर आ रहे हैं. किसानों में भी चिंता है कि उनकी उपज विदेशों में नहीं जाएगी. इससे उन्हें भारी नुकसान उठाना होगा. हरियाणा में बासमती की खेती बड़े पैमाने पर होती है जिसका निर्यात भी अधिक होता है. लेकिन ईरान पर अमेरिकी हमले के बाद बासमती निर्यात संकट में आ गया है. इसे लेकर व्यापारी और किसानों में गहरी चिंता है.
करनाल में भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष रत्न मान समेत किसान नेताओं ने बातचीत में कहा इस वक्त विश्व स्तर पर बहुत गंभीर स्थिति बनी हुई है. उन्होंने कहा कि लड़ाई का सबसे ज्यादा असर चावल निर्यात पर पड़ेगा क्योंकि विदेशों में भेजी जाने वाली खेप बिल्कुल रुक जाएगी. उन्होंने कहा आर्थिक तौर पर इसका असर पड़ना भी शुरू हो चुका है. बासमती के अलावा बहुत सारी ऐसी चीजें हैं जो यह ईरान सहित कई खाड़ी देशों में निर्यात की जाती हैं.
किसानों ने कहा, भारत सरकार से अपील करना चाहते हैं, इस लड़ाई को रोका जाना चाहिए, और सामान्य जीवन के साथ व्यापार और आना जाना सब कुछ वैसा ही होना चाहिए. किसानों ने कहा कि चावल निर्यात का बहुत बड़ा काम ईरान में होता है जो कि पूरी तरह बाधित हो चुका है.
ईरान भेजे जाने वाले निर्यात और यहां तक कि अफगानिस्तान जाने वाली खेप भी, जो ईरान के सबसे बड़े पोर्ट, बंदर अब्बास से होकर जाते हैं, रुक गए हैं. ये खेप तब तक रुकी रहेगी जब तक हालात ठीक नहीं हो जाते, और इसका असर मार्केट पर पड़ेगा. चावल के पेमेंट में भी देरी हो सकती है.
हरियाणा भारत के बासमती चावल के व्यापार में अहम भूमिका निभाता है. देश के सालाना बासमती एक्सपोर्ट का लगभग 35 प्रतिशत हरियाणा से आता है.
हरियाणा के व्यापारियों का कहना है कि इसका असर मार्केट में पहले से ही दिख रहा है. करनाल के राइस मिलर्स ने कहा कि अनिश्चितता लगभग तुरंत शुरू हो गई. सोमवार से, लड़ाई शुरू होने के बाद अनिश्चितता की स्थिति है. लड़ाई के एक दिन के अंदर, व्यापार पर असर पड़ा है, जिससे बासमती के रेट में लगभग 4-5 रुपये प्रति किलो की गिरावट आई है, जो 400-500 रुपये प्रति क्विंटल है.
राइस मिलर्स ने पहले भी इसी तरह की रुकावटों की ओर इशारा किया. उन्होंने पिछले साल ईरान-इजराइल लड़ाई का जिक्र करते हुए कहा कि पिछली बार जून में असर पड़ा था. उन्होंने कहा कि भारत के बासमती एक्सपोर्ट में हरियाणा का सबसे ज्यादा योगदान है और मौजूदा हालात का असर पड़ेगा. ईरान भारतीय बासमती का एक मुख्य खरीदार बना हुआ है.
भारत के कुल बासमती चावल एक्सपोर्ट में हरियाणा का हिस्सा लगभग 40 परसेंट है. कैथल, करनाल और कुरुक्षेत्र जैसे खास जिले प्रीमियम क्वालिटी की बासमती किस्मों के प्रोडक्शन के लिए जाने जाते हैं.
करनाल बासमती एक्सपोर्ट का मेन हब है, वहीं कैथल और सोनीपत भी विदेशी शिपमेंट में हिस्सा लेते हैं. एक्सपोर्टर युद्ध के दौरान जहाजों के लिए इंश्योरेंस कवरेज की कमी को लेकर भी परेशान हैं, जिससे उनका रिस्क बढ़ जाता है.
सऊदी अरब के बाद ईरान भारत का दूसरा सबसे बड़ा बासमती चावल मार्केट है. भारत ने मार्च में खत्म हुए वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान ईरान को लगभग 10 लाख टन खुशबूदार अनाज एक्सपोर्ट किया.
भारत ने 2024-25 के दौरान लगभग 60 लाख टन बासमती चावल एक्सपोर्ट किया, जिसकी डिमांड मुख्य रूप से मिडिल ईस्ट और वेस्ट एशियन मार्केट से आई. दूसरे बड़े खरीदारों में इराक, यूनाइटेड अरब अमीरात और यूनाइटेड स्टेट्स शामिल हैं.