
कश्मीर घाटी में अचानक हुई ओलावृष्टि ने सेब किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है. दक्षिण और उत्तर कश्मीर के कई गांवों में मटर के आकार के ओले 20-25 मिनट तक बरसते रहे, जिससे बागों में खिले फूल झड़ गए और फसल को भारी नुकसान हुआ है, जिससे हजारों किसान परेशान हो गए. कुलगाम के निहामा गांव के किसान गुलाम मोहम्मद के मुताबिक, इस अचानक आई आपदा ने पूरे इलाके के किसानों को हताश कर दिया है और इससे इस साल सेब की पैदावार पर बड़ा असर पड़ सकता है.
यह ओलावृष्टि उस समय हुई जब पेड़ों पर फूल पूरी तरह खिले हुए थे. ओलों की वजह से पेड़ों से फूल गिर गए, जिससे जमीन फूलों से ढक गई. इस नुकसान की वजह से इस साल सेब की पैदावार काफी कम हो सकती है और किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ सकता है.
कई बागवानों का कहना है कि यह समस्या बार-बार हो रही है. पिछले कुछ सालों से मौसम अचानक खराब हो जाता है, और जब ऐसा पेड़ों में फूल आने के समय होता है, तो नुकसान बहुत ज्यादा हो जाता है. उन्होंने बताया कि किसानों के पास फसलों को बचाने के लिए कोई खास सुरक्षा नहीं है, इसलिए पूरा नुकसान उन्हें खुद ही उठाना पड़ता है. साथ ही उन्हें सरकार या संस्थानों से बहुत कम मदद मिलती है.
बागवानों का कहना है कि अभी जो मुआवजा दिया जा रहा है, वह सिर्फ 800 से 1,000 रुपये प्रति कनाल है, जो असल नुकसान के मुकाबले बहुत कम है. किसानों को बार-बार मौसम की मार झेलनी पड़ रही है, लेकिन उन्हें न तो पर्याप्त सुरक्षा मिल रही है और न ही सही मुआवजा.
प्राकृतिक आपदाओं से किसानों को आर्थिक सुरक्षा देने के लिए 2016 में शुरू की गई प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना अभी तक जम्मू-कश्मीर में पूरी तरह लागू नहीं हो पाई है. बागवानी फसलों के लिए बीमा लागू करने के लिए कई बार टेंडर निकाले गए, लेकिन कंपनियों की तरफ से ज्यादा रुचि नहीं दिखाई गई. हालांकि, सरकार ने विधानसभा में बताया कि दो कंपनियां-Agriculture Insurance Company of India और Tata AIG General Insurance सेब और केसर की फसलों के लिए बीमा योजना लागू करने के लिए चुनी गई हैं. सरकार के अनुसार, टेंडर की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और अब इन कंपनियों को काम सौंपने की प्रक्रिया चल रही है.