25 दिन के इंतजार के बाद मेहरबान हुआ मॉनसून', अकोला में शुरू हुई खरीफ की बुवाई, खेतों में लौटी किसानों की उम्मी

25 दिन के इंतजार के बाद मेहरबान हुआ मॉनसून', अकोला में शुरू हुई खरीफ की बुवाई, खेतों में लौटी किसानों की उम्मी

25 दिनों के लंबे इंतजार के बाद अकोला में मानसून की पहली अच्छी बारिश हुई, जिससे खरीफ फसलों की बुवाई शुरू हो गई है. किसान और महिलाएं खेतों में पूरे उत्साह से बीज बो रहे हैं. कृषि विभाग ने सही समय और उचित तरीके से बुवाई करने की सलाह दी है. किसानों को इस साल अच्छी पैदावार और बेहतर फसल की उम्मीद है.

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25 दिन के इंतजार के बाद मेहरबान हुआ मॉनसून', अकोला में शुरू हुई खरीफ की बुवाई, खेतों में लौटी किसानों की उम्मी25 दिन बाद आई बारिश, खेतों में फिर दिखी रौनक

महाराष्ट्र के अकोला जिले में करीब 25 दिनों के लंबे इंतजार के बाद आखिरकार मॉनसून ने जोरदार दस्तक दे दी है. पहली अच्छी बारिश के साथ ही सूखे पड़े खेतों में फिर से रौनक लौट आई है. कई दिनों से बारिश का इंतजार कर रहे किसान अब पूरे उत्साह के साथ खेतों में उतर गए हैं. गांवों में खेती का काम तेजी से शुरू हो गया है और हर तरफ नई उम्मीद का माहौल दिखाई दे रहा है.

महिलाएं हाथों से बो रही हैं बीज

अकोला के डोंगरगांव में खेतों का दृश्य ग्रामीण भारत की पारंपरिक खेती की तस्वीर पेश कर रहा है. खेतों में महिलाएं झुककर अपने हाथों से एक-एक बीज जमीन में बो रही हैं. वहीं उनके पीछे किसान बैलों की जोड़ी के साथ हल चलाकर उन बीजों को मिट्टी से ढंक रहे हैं. यह मेहनत आने वाले महीनों में अच्छी फसल और किसानों की खुशहाली की उम्मीद लेकर आई है. कुछ दिन पहले तक यही खेत सूखे पड़े थे, लेकिन अब बारिश के बाद इनमें फिर से जीवन लौट आया है.

खरीफ फसलों की बुवाई ने पकड़ी रफ्तार

बारिश के बाद अकोला जिले में खरीफ सीजन की बुवाई तेजी से शुरू हो गई है. खेतों में पर्याप्त नमी मिलने के कारण किसान बिना समय गंवाए बुवाई का काम कर रहे हैं. इस साल जिले में लगभग 5 लाख 41 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की खेती का लक्ष्य रखा गया है. इनमें सबसे अधिक करीब 2 लाख 28 हजार हेक्टेयर में सोयाबीन की बुवाई होगी, जबकि लगभग 1 लाख 82 हजार हेक्टेयर में कपास की खेती की जाएगी. इसके अलावा तुअर, मूंग, उड़द, मक्का, ज्वार और बाजरा जैसी फसलों की बुवाई भी शुरू हो चुकी है.

किसानों को अच्छी पैदावार की उम्मीद

खेतों में काम कर रहे किसान योगेश नागापुरे का कहना है कि समय पर हुई बारिश ने किसानों के चेहरे पर मुस्कान लौटा दी है. अगर आने वाले दिनों में मानसून इसी तरह साथ देता रहा, तो इस साल अच्छी पैदावार होने की पूरी उम्मीद है. किसानों का मानना है कि समय पर बारिश खेती के लिए सबसे जरूरी होती है और इस बार मानसून ने उनकी उम्मीदों को फिर से जगा दिया है.

कृषि विभाग ने दी जरूरी सलाह

कृषि विभाग ने किसानों से कहा है कि बुवाई तभी करें जब खेतों में पर्याप्त नमी हो. विभाग के अनुसार, लगभग 90 से 100 मिलीमीटर बारिश होने के बाद ही बुवाई करना सबसे बेहतर माना जाता है. बीज को 2 से 4 सेंटीमीटर की गहराई पर बोना चाहिए ताकि अंकुरण अच्छी तरह हो सके. साथ ही फसल के अनुसार संतुलित मात्रा में फास्फोरस और पोटाश का उपयोग करने की भी सलाह दी गई है. विशेषज्ञों का कहना है कि सही समय और सही तरीके से की गई बुवाई से फसल की पैदावार बढ़ती है.

गांवों में लौट आई उम्मीद की हरियाली

मानसून की पहली अच्छी बारिश ने अकोला के किसानों में नई ऊर्जा और उम्मीद भर दी है. खेतों में महिलाओं द्वारा हाथों से बीज बोने और किसानों के बैलों के साथ हल चलाने का दृश्य यह बताता है कि खरीफ सीजन की शुरुआत पूरे उत्साह के साथ हो चुकी है. अब किसानों की नजर आने वाली बारिश पर टिकी है. यदि मौसम इसी तरह साथ देता रहा, तो इस साल अच्छी फसल होने की संभावना है और किसानों की मेहनत रंग ला सकती है.

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