विश्व में सर्वश्रेष्ठ चावल है काला नमकउत्तर प्रदेश के प्रसिद्ध जीआई टैग हासिल काला नमक चावल ने किसानों की आर्थिक तस्वीर बदलनी शुरू कर दी है. पिछले कुछ साल में इसकी खेती का रकबा, उत्पादन और बाजार मूल्य तेजी से बढ़ा है. इसकी वजह से किसानों की आय में अच्छी-खासी वृद्धि दर्ज की गई है. सरकार ने संसद में यह जानकारी दी है.
सरकारी आंकड़ों के अनुसार सिद्धार्थनगर जिले में साल 2018 से 2025 के बीच काला नमक चावल का उत्पादन पांच गुना से अधिक बढ़ गया है. वहीं इसकी बिक्री कीमत साल 2018 में करीब 40 रुपये प्रति किलोग्राम थी, जो साल 2026 में बढ़कर 150 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है. कीमत में इस बढ़ोतरी से किसानों का लाभ सामान्य धान की तुलना में तीन गुना से अधिक बढ़ा है.
काला नमक धान की खेती करने वाले किसानों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है. वर्ष 2018 में जहां इस फसल की खेती करने वाले किसानों की संख्या 2,915 थी, वहीं वर्ष 2024 तक यह बढ़कर करीब 23,000 पहुंच गई. इससे स्पष्ट है कि किसान अब इस पारंपरिक और सुगंधित धान की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं.
काला नमक चावल उत्पादकों को बढ़ावा देने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें वित्तीय, तकनीकी और मार्केटिंग सहायता उपलब्ध करा रही हैं.
प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (PMFME) और वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP) मार्जिन मनी योजना के तहत काला नमक चावल की प्रोसेसिंग और मिलिंग यूनिट लगाने वाले व्यक्तिगत उद्यमियों और किसान उत्पादक संगठनों (FPO) को 35 प्रतिशत तक की क्रेडिट लिंक्ड पूंजी सब्सिडी दी जा रही है. इस सब्सिडी की अधिकतम सीमा 10 लाख रुपये है.
सरकार द्वारा काला नमक महोत्सवों का आयोजन कर ब्रांड काला नमक को भी बढ़ावा दिया जा रहा है.
काला नमक चावल किसानों को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए सिद्धार्थनगर में ODOP योजना के तहत एक कॉमन फैसिलिटी सेंटर (CFC) लगाया गया है.
इस केंद्र के माध्यम से किसानों को आधुनिक प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और निर्यात संबंधित सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं. राज्य सरकार ने काला नमक चावल के उत्पादन, प्रोसेसिंग और प्रचार-प्रसार के लिए अलग से परियोजना फंड भी निर्धारित किया है.
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के नेतृत्व में राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रणाली काला नमक की पारंपरिक किस्मों के संरक्षण और नई उन्नत किस्मों के विकास पर काम कर रही है.
पारंपरिक काला नमक के अलावा अब छह उन्नत किस्में विकसित और अधिसूचित की जा चुकी हैं. इनमें काला नमक KN-3, बौना काला नमक-101, बौना काला नमक-102, काला नमक किरण, पूसा नरेंद्र काला नमक-1 और पूसा CRD काला नमक-2 शामिल हैं.
इनमें पूसा नरेंद्र काला नमक-1 और पूसा CRD काला नमक-2 बौनी और अधिक उत्पादन देने वाली किस्में हैं. इनकी औसत उपज 4.5 टन प्रति हेक्टेयर है, जबकि पारंपरिक किस्मों की औसत उपज लगभग 2.5 टन प्रति हेक्टेयर रहती है.
काला नमक की खेती का क्षेत्र बढ़ाने के लिए ब्रीडर सीड कार्यक्रम के तहत अतिरिक्त बीज उत्पादन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है. हर साल लगभग 15 से 20 क्विंटल ब्रीडर बीज तैयार किया जाता है.
पिछले पांच वर्षों (2021-22 से 2025-26) के दौरान काला नमक धान की अलग-अलग किस्मों के कुल 389.6 क्विंटल क्वालिटी बीज तैयार कर किसानों में वितरित किए गए हैं.
सरकार काला नमक चावल के निर्यात को भी बढ़ावा दे रही है. कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) क्षेत्रीय किसान उत्पादक संगठनों को सीधे अंतरराष्ट्रीय खरीदारों से जोड़ रहा है.
काला नमक चावल का निर्यात सिंगापुर और नेपाल जैसे देशों में किया जा रहा है. इसके अलावा इसे "बुद्ध राइस" के नाम से ब्रांडिंग कर जापान, थाइलैंड, वियतनाम, सिंगापुर और म्यांमार जैसे बौद्ध देशों के प्रीमियम बाजारों तक पहुंचाने की रणनीति पर काम हो रहा है.
सिद्धार्थनगर और आसपास के तराई जिलों को APEDA के एग्री एक्सपोर्ट जोन ढांचे में शामिल किया गया है, जिससे निर्यात पैकेजिंग, रेसिड्यू टेस्टिंग और क्वारंटीन के लिए प्राथमिकता के आधार पर वित्तीय सहायता मिल रही है.
कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर में यह जानकारी देते हुए कहा कि काला नमक चावल के उत्पादन, प्रोसेसिंग और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है, जिसका सीधा लाभ किसानों की आय बढ़ाने में दिखाई दे रहा है.
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