
पंजाब के अबोहर के किसान बगावती मूड में चल रहे हैं. ताजा मामला कपास के दाम को लेकर है. यहां किसानों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है. पहले भी विरोध में उतरे थे, लेकिन सरकारी आश्वासन के बाद उन्होंने कदम पीछे खींच लिए थे. दरअसल मामला कॉटन कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया यानी कि CCI का है जिसने किसानों से कहा था कि उन्हें जल्द कपास के सही रेट मिलेंगे. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. लिहाजा किसान फिर से विरोध में उतरे हैं और उनका आरोप है कि सीसीआई ने उनके साथ दाम के नाम पर धोखा किया है. गुरुवार को अबोहर के किसानों ने अबोहर में जिला प्रशासन के खिलाफ विरोध का मोर्चा खोला और कपास के अच्छे दाम की मांग की.
किसानों का आरोप है कि सीसीआई उनकी कपास की फसल खरीदने में 'अनिच्छा दिखा रही है'. नरमा कपास से लदे कई वाहन पुराने शहर क्षेत्र में किसानों ने लगा गए और सड़कों को जाम कर दिया. प्रशासन के अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को समझाने की कोशिश की, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ. विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व करने वाले संयुक्त किसान मोर्चा के कार्यकर्ता सुभाष गोदारा और बब्बल बुट्टर ने 'दि ट्रिब्यून' से कहा कि सीसीआई केंद्र सरकार की एक एजेंसी है जो पंजाब में किसानों के साथ भेदभाव करके उन्हें “जानबूझकर परेशान” कर रही है.
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सीसीआई ने केवल कपास के कुछ ही ढेर खरीदे हैं. अधिकारी प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति में नरमा खरीद की शर्तों में ढील देने पर सहमत हुए थे, लेकिन बाद में वे मुकर गए. इसके कारण किसानों को केंद्रीय एजेंसी के किसान विरोधी रवैये के बारे में लोगों को बताने के लिए पुराने शहर में घुसने के लिए मजबूर होना पड़ा. किसान नेताओं ने कहा. सीसीआई के अधिकारियों ने कहा कि उन्हें उपज की नमी और क्वालिटी पर निर्धारित मानदंडों से समझौता करना मुश्किल हो रहा है.
कपास का यह हाल केवल पंजाब में ही नहीं है बल्कि और भी कई राज्यों में है. पिछले एक साल से कपास किसान दाम को लेकर परेशान हैं. किसानों का कहना है कि जिस लागत के साथ उन्होंने खेती की, अब उस लागत को निकालना भी मुश्किल हो रहा है. खेती का खर्च लगातार बढ़ रहा है जबकि कमाई वैसी नहीं मिल रही है. पंजाब में अबोहर के किसानों ने इसी मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन किया है जो कि केंद्र की एजेंसी सीसीआई के खिलाफ है.
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