जहर मुक्त दशहरी आम... लखनऊ के किसान गिरजा शंकर ने पेश किया प्राकृतिक खेती का शानदार मॉडल

जहर मुक्त दशहरी आम... लखनऊ के किसान गिरजा शंकर ने पेश किया प्राकृतिक खेती का शानदार मॉडल

Natural Farming Tips:आज पूरी दुनिया में प्राकृतिक खेती के महत्‍व को पहचाना जा चुका है. यह खेती का ऐसा मॉडल है जिसमें लागत कम और शानदार कमाई की जा सकती है. अब वह उसे गांव वालों को भी अपनाने के लिए प्रोत्‍साहित कर रहे हैं. मलिहाबाद के किसान गिरजा ने बताया कि एक एकड़ में वो अमरूद की बागवानी भी कर रहे हैं.

poison free dasheri mangoes farming by lucknow farmer girija shankar maurya made model of natural farmingलखनऊ के मलिहाबाद के रहने वाले किसान गिरजा शंकर मौर्यpoison free dasheri mangoes farming by lucknow farmer girija shankar maurya made model of natural farmingलखनऊ के मलिहाबाद के रहने वाले किसान गिरजा शंकर मौर्य
नवीन लाल सूरी
  • LUCKNOW,
  • Jun 02, 2026,
  • Updated Jun 02, 2026, 8:15 AM IST

उत्तर प्रदेश में प्राकृतिक खेती को मिशन मोड में आगे बढ़ाने की एक बड़ी पहल प्रगतिशील किसान गिरजा शंकर मौर्य ने की है. लखनऊ के ग्राम भदेसर मऊ, मलिहाबाद के रहने वाले गिरजा शंकर जहर मुक्त तरीके से तैयार दशहरी आम की बागवानी 2017 से करते आ रहे है. इंडिया टुडे के किसान तक से बातचीत में उन्होंने बताया कि 3 एकड़ में आम का बाग है. जहां हम प्राकृतिक और जहर मुक्त तरीके से दशहरी आम की खेती करते है. गिरजा बताते हैं कि 2017 में लखनऊ स्थित भीमराव अंबेडकर विश्‍वविद्यालय में आयोजित सेमिनार में पद्मश्री से सम्‍मानित सुभाष पालेकर से 'जीरो बजट खेती सिद्धांत' का गुर सीखकर उन्‍होंने अपने खेतों में जो प्रयोग किया.

Amazon और Flipkart के जरिए देश में सप्लाई

उससे दशहरी आम की पैदावार बहुत अधिक हुई, वहीं इसका स्वाद भी बेमिसाल है. वो दशहरी आम की सप्लाई राजस्थान, मध्यप्रदेश समेत कई राज्यों में ऑनलाइन मार्केटिंग Amazon और Flipkart के जरिए कर रहे है. उन्होंने बताया कि 160-165 रुपये प्रति किलो की दर से नैचुरल फार्मिंग का दशहरी आम हाथो हाथ बिक जाता है. पैदावार के सवाल पर गिरजा ने बताया कि पिछले साल 8-9 क्विंटल आम हुआ था. लेकिन इस साल दहशरी आम की फसल अच्छी होगी. 

खेती का ऐसा मॉडल है जिसमें लागत कम 

आज पूरी दुनिया में प्राकृतिक खेती के महत्‍व को पहचाना जा चुका है. यह खेती का ऐसा मॉडल है जिसमें लागत कम और शानदार कमाई की जा सकती है. अब वह उसे गांव वालों को भी अपनाने के लिए प्रोत्‍साहित कर रहे हैं. मलिहाबाद के किसान गिरजा ने बताया कि एक एकड़ में वो अमरूद की बागवानी भी कर रहे हैं. लेकिन ज्यादा फोकस दशहरी आम पर ज्यादा रहता है. वहीं दशहरी के साथ थोड़ी अरुणिमा और अंबिका की वैरायटी को भी लगाया है. जबकि आम के पेड़ के नीचे कैरी बनाकर प्राकृतिक हल्दी की खेती भी कर रहे है. 

खेती में प्राकृतिक सामग्रियों का उपयोग

38 साल के इस किसान ने नैचुरल फार्मिंग का शानदार मॉडल पेश किया है.उन्होंने बताया कि हमेशा से खेत में गाय के गोबर, गोमूत्र और अन्य प्राकृतिक सामग्रियों का उपयोग किया जाता है. इस मिश्रण को ‘जीवामृत’ कहते हैं, जिसमें गोबर, गोमूत्र, गुड़, चना बेसन और मिट्टी होती है. इसे खेत में डाला जाता है. वहीं नीम की पत्तियों का घोल बनाकर खेतों में डाला जाता है, जिससे फसलों में रोगों के साथ कीटों से नुकसान कम हो. 

रसायनिक उर्वरक, कीटनाशक की आवश्यकता नहीं

गिरजा शंकर ने आगे बताया कि इस तरीके में किसी बाहरी सामग्री जैसे रसायनिक उर्वरक, कीटनाशक की आवश्यकता नहीं होती है. उन्होंने बताया कि प्राकृतिक खेती को अपनाकर कम लागत में शुद्ध लाभ कमाया जा सकता है.उन्‍होंने बताया कि जमीन में जीवाणुओं को बढ़ाकर उसकी उर्वरकता और नाइट्रोजन कंटेंट को बढ़ाया जा सकता है.फिर रासायनिक खादों की जरूरत नहीं है. यही काम रासायनिक खाद करती है लेकिन, उसके कई साइड इफेक्‍ट सामने आते हैं.

नैचुरल फार्मिंग में थोड़ा नुकसान

ग्रेजुएशन तक की पढ़ाई कर चुके गिरजा शंकर के अनुसार, नैचुरल फार्मिंग में थोड़ा नुकसान तो होता है, क्योंकि इसकी खेती पर हमेशा ध्यान देना होता है. थोड़ी से सावधानी हटी तो फसल नुकसान हो सकती है. जैविक खेती और प्राकृतिक खेती में कई समानतायें है, लेकिन ये दोनों ही तरीके एक-दूसरे से काफी अलग हैं. दरअसल, जैविक खेती में जीवांश की खाद, जैव उर्वरक, कीटनाशकों को खरीदकर इस्तेमाल किया जाता है. जैसे वर्मी कंपोस्ट को बनाने में भी काफी लागत आती है, कीटनाशक के लिये नीम ऑइल पेस्टिसाइड खरीदना होता है और मिट्टी-फसल की जरूरत के हिसाब से उर्वरकों और पोषक तत्वों की सप्लाई भी करनी होती है.

प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में बनाई अपनी पहचान

जहां जैविक खेती का उद्देश्य उत्पादन और उत्पादकता दोनों को बढ़ाना होता है. वहीं प्राकृतिक खेती में उत्पादन बढ़ाने जैसा कोई मकसद नहीं होता, बल्कि ये खर्च के बोझ को कम करती है. सबसे खास बात है कि गिरजा अपने खेत में मल्टी लेयर फार्मिंग करते हैं. गिरजा शंकर मौर्य को प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में कई पुरस्‍कारों से सम्‍मानित किया जा चुका है. आज उनकी पहचान उत्तर प्रदेश समेत देश के अलग-अलग राज्यों में नैचुरल फार्मिंग के क्षेत्र में तेजी से बढ़ रही हैं.

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