हिमाचल में इस साल मॉनसून ने जून में दस्तक दी थी और तब से ही इसका कहर जारी है. एक के बाद एक होती प्राकृतिक आपदा ने किसानों और व्यापारियों को परेशान कर दिया है. हालत यह है कि अगर मौसम नहीं सुधरा और बारिश बंद नहीं हुई तो इस बार दिल्ली की बाजार से हिमाचल प्रदेश के सेब नदारद रहने वाले हैं. लैंडस्लाइड्स और बादल फटने की घटनाओं के चलते कई सड़कें बंद हैं और सेब से लदे ट्रक रास्ते में ही अटके हैं. व्यापारियों को अब बड़े नुकसान की चिंता सताने लगी है. आपको बता दें कि हिमाचल प्रदेश से अच्छी-खासा मात्रा में सेब दिल्ली भेजा जाता है.
हिमाचल प्रदेश में लगातार बारिश ने सेब के व्यापारियों को परेशान कर दिया है. हिमाचल से सेब न सिर्फ देश बल्कि विदेशों में जाता है. लेकिन इस बार लगातार बारिश, बादल फटने और अचानक आई बाढ़ ने व्यापारियों की चिंता बढ़ा दी है. लेकिन अब यही सेब यहां पर सड़ने को मजबूर हो गया है. राज्य में आई प्राकृतिक आपदा ने सेब के व्यापार और खेत पर भी बड़ा असर डाला है. कुल्लू में सेब के एक व्यापारी दिनेश चंद्र ठाकुर ने एक न्यूज चैनल से बातचीत में कहा कि इस बार प्राकृतिक आपदा का असर उनके व्यापार पर भी नजर आने वाला है.
उनका कहना था कि जितना खर्च किया गया था, उसकी आधी लागत भी निकाल पाना इस बार मुश्किल है. उन्होंने कहा कि इस बार नुकसान ऐसा है कि उनके हाथ में कुछ नहीं आने वाला है. व्यापारियों की मानें तो इलाके के सारी सड़कें टूट गई हैं और इसकी वजह से माल नहीं पहुंच पा रहा है. मौसम ठीक होने पर सेब 4000 रुपये तक बिक जाता था लेकिन अब हजार से 1500 रुपये तक ही मिलेंगे. कुल्लू के इस व्यापारी ने बताया कि सेब पहुंच ही नहीं पा रहा है. खेत में भी काफी फसल सड़ चुकी है.
इस बार हिमाचल प्रदेश में जून में मॉनसून ने दस्तक दी थी. तब से ही यहां से माल सप्लाई बंद है. व्यापारियों का कहना है डिमांड आ रही है लेकिन माल सप्लाई ही नहीं पहुंच पा रही है. उनका कहना था कि अभी कम से कम हफ्ते 10 दिन तक यही स्थिति रहने वाली है. जब तक मॉनसून नहीं थमेगा तब तक यही स्थिति रहने वाली है. व्यापारियों ने कहा कि अगर स्थिति नहीं सुधरी तो माल सड़ जाएगा और फेंकना पड़ेगा. उन्होंने बताया कि अगर माल कोल्ड स्टोरेज में है तब तो 2 से 3 महीने तक चल जाता है लेकिन अगर कोल्ड स्टोरेज में नहीं है तो 15 से 20 दिन में ही फल सड़ जाता है.
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