
देश के कई राज्यों में आम की खेती बड़े पैमाने पर होती है और आम किसानों के लिए महत्वपूर्ण फसल है. आम को खाने में स्वादिष्ट और पौष्टिक माना जाता है. कभी-कभी कुछ आम की किस्मों में द्विवार्षिक फलन (Biennial fruiting) की समस्या आती है. इसका मतलब यह है कि ये पेड़ हर साल फल नहीं देते, बल्कि एक साल अच्छे फल देते हैं और अगले साल कम या नहीं देते. लेकिन यह समस्या पूरे देश में नहीं होती, केवल उत्तर भारत के कुछ क्षेत्रों में देखी जाती है. दक्षिण भारत में इस समस्या का असर बहुत कम होता है.
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के कई संस्थानों ने इस समस्या पर शोध किए हैं. इनमें आईसीएआर-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (नई दिल्ली), आईसीएआर-भारतीय बागवानी अनुसंधान संस्थान (बेंगलुरु) और आईसीएआर-केंद्रीय उपोष्णकटिबंधीय बागवानी संस्थान (लखनऊ) शामिल हैं. वैज्ञानिकों ने आम की किस्मों जैसे दशहरी, लंगड़ा, चौसा, फजली और अल्फोंसो में इस समस्या को देखा है. इनके अध्ययन से पता चला है कि द्विवार्षिक फलने के कई कारण हो सकते हैं. इनमें पेड़ की आनुवंशिक विशेषताएं, नाइट्रोजन और कार्बन का भंडारण, फूल बनने का हार्मोनल नियंत्रण, जलवायु जैसे मौसम और तापमान, कृषि पद्धतियां और पेड़ पर लगे फलों की संख्या शामिल हैं.
आईसीएआर ने आम की खेती में इस समस्या को कम करने के लिए कई कदम उठाए हैं. सबसे पहले उन्होंने नियमित फल देने वाली किस्मों और संकरों का विकास किया. इनमें आम्रपाली, मल्लिका, पूसा अरुणिमा, पूसा लालिमा, पूसा प्रतिभा, पूसा श्रेष्ठ, पूसा मनोहरी, अर्का उदय, अर्का सुप्रभात, अवध अभया, सीआईएसएच-अरुणिका, सीआईएसएच-अंबिका, अवध समृद्धि, नीलम, तोतापुरी, बंगनपल्ली और सोनपरी जैसी किस्में शामिल हैं. इन किस्मों की गुणवत्तापूर्ण पौध सामग्री का वितरण आईसीएआर संस्थानों और पंजीकृत नर्सरियों के माध्यम से किसानों तक किया जाता है.
इसके अलावा बागवानी के एकीकृत विकास मिशन ने रोग मुक्त पौध सामग्री तैयार करने के लिए स्वच्छ पौध कार्यक्रम शुरू किया है. इससे किसानों को स्वस्थ और मजबूत पौधे मिलते हैं, जो हर साल अच्छे फल देते हैं.
किसानों को आम के पेड़ों की देखभाल के लिए नई तकनीकें भी बताई गई हैं. इनमें चंदवा प्रबंधन, उच्च घनत्व रोपण, संतुलित पोषक तत्व और जल प्रबंधन जैसी पद्धतियां शामिल हैं. इसके अलावा जलवायु-लचीली तकनीक के तहत छंटाई की जाती है और नियमित रूप से फूल बनने को प्रेरित करने के लिए नैनोफ्लोरिन का प्रयोग किया जाता है. अगले मौसम में अच्छे फूल और फल पाने के लिए मटर के चरण में पैक्लोबुट्राज़ोल का प्रयोग भी किया जाता है.
इन कदमों और तकनीकों से किसानों को यह फायदा होता है कि उनके आम के पेड़ हर साल फल दें और उनकी फसल अच्छी हो. इससे किसानों की आम की पैदावार बढ़ती है और उनकी आय में सुधार होता है. रोग मुक्त और मजबूत पौध सामग्री के कारण आम के पेड़ लंबे समय तक स्वस्थ रहते हैं और फल अधिक और स्वादिष्ट होते हैं.
द्विवार्षिक फलने की समस्या केवल कुछ क्षेत्रों में है और इसका असर पूरे देश में नहीं है. आईसीएआर और राज्य सरकार की पहल से इस समस्या का समाधान किया जा रहा है. नए किस्मों और संकरों के विकास, पौध सामग्री का वितरण और बेहतर बागवानी प्रबंधन से आम की खेती मजबूत हो रही है. किसान अब सुरक्षित और मजबूत पौधों के माध्यम से हर साल अच्छे फल उगा सकते हैं. इससे आम की पैदावार बढ़ेगी, किसानों की आय में सुधार होगा और आम की गुणवत्ता भी अच्छी बनी रहेगी.
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