APEDA–IBEF की पहल से इंटरनेशनल ट्रेड फेयर में ‘इंडियन काजू’ को बढ़ावा, वैल्यू-एडेड एक्सपोर्ट पर जोर

APEDA–IBEF की पहल से इंटरनेशनल ट्रेड फेयर में ‘इंडियन काजू’ को बढ़ावा, वैल्यू-एडेड एक्सपोर्ट पर जोर

APEDA और IBEF मिलकर इंटरनेशनल ट्रेड फेयर में ‘इंडियन काजू’ ब्रांड को प्रमोट कर रहे हैं. रोस्टेड, फ्लेवर्ड और वैल्यू-एडेड काजू एक्सपोर्ट पर फोकस, FTAs से जीरो-ड्यूटी मार्केट एक्सेस को बढ़ावा.

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क‍िसान तक
  • New Delhi ,
  • Feb 10, 2026,
  • Updated Feb 10, 2026, 11:55 AM IST

एग्रीकल्चरल एंड प्रोसेस्ड फ़ूड प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट डेवलपमेंट अथॉरिटी (APEDA), इंडिया ब्रांड इक्विटी फ़ाउंडेशन (IBEF) के साथ मिलकर, बड़े इंटरनेशनल ट्रेड फेयर में ‘इंडियन काजू’ ब्रांड को बहुत तेजी से प्रमोट कर रही है, और वैल्यू-एडेड एक्सपोर्ट पर नए सिरे से फोकस कर रही है.

इस पहल का मकसद रोस्टेड, सॉल्टेड, फ्लेवर्ड और दूसरे प्रोसेस्ड काजू प्रोडक्ट्स जैसे ज्यादा वैल्यू वाले सेगमेंट की ओर एक्सपोर्ट को शिफ्ट करना है, जिससे एक्सपोर्ट से होने वाली कमाई बेहतर हो और ग्लोबल मार्केट में भारत की प्रीमियम पोजीशन मजबूत हो.

कोल्लम में ऑर्गनाइज्ड “काजू और वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट प्रमोशन मीटिंग” टाइटल वाले एक इंटरैक्टिव सेशन में, APEDA के अधिकारियों ने एक्सपोर्टर्स को हाल ही में हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स (FTAs) से मिलने वाले बेहतर मार्केट एक्सेस के मौकों के बारे में बताया. UK, ऑस्ट्रेलिया, ओमान, EFTA देशों-स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, आइसलैंड और लिकटेंस्टीन और यूरोपियन यूनियन के साथ ट्रेड एग्रीमेंट्स के तहत अब जीरो-ड्यूटी एक्सेस अवेलेबल है. US के साथ एक इंटरिम ट्रेड एग्रीमेंट का फ्रेमवर्क भी फाइनल हो गया है.

अधिकारियों ने कहा कि ये एग्रीमेंट्स ट्रेडिशनल एक्सपोर्ट डेस्टिनेशन्स से आगे बढ़कर स्ट्रेटेजिक डायवर्सिफिकेशन देते हैं.

इंफ्रा पर कमिटमेंट

हाई-लेवल कंसल्टेटिव मीटिंग का मकसद केरल से काजू प्रोडक्शन, प्रोसेसिंग और एक्सपोर्ट के डेवलपमेंट के लिए एक सस्टेनेबल रोडमैप बनाना था, जिसमें वैल्यू एडिशन पर खास जोर दिया गया.

APEDA के अधिकारियों ने इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट, पोस्ट-हार्वेस्ट मैनेजमेंट, टेक्नोलॉजिकल मॉडर्नाइजेशन और ग्लोबल मार्केट एक्सपेंशन को सपोर्ट करने का अपना कमिटमेंट दोहराया ताकि यह पक्का हो सके कि इंडियन काजू इंडस्ट्री इंटरनेशनल प्रीमियम नट सेगमेंट में एक अहम ताकत बनी रहे.

इससे पहले अपने उद्घाटन भाषण में, केरल एग्रीकल्चर एंड फार्मर्स वेलफेयर डिपार्टमेंट के एग्रीकल्चरल प्रोडक्शन कमिश्नर और प्रिंसिपल सेक्रेटरी, बी. अशोक ने काजू की खेती को बढ़ाने और प्रोसेसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार की पहलों पर रोशनी डाली. उन्होंने जोर देकर कहा कि ग्लोबल कॉम्पिटिटिवनेस बनाए रखने के लिए प्रोसेसिंग यूनिट्स का मैकेनाइजेशन और मॉडर्नाइजेशन जरूरी है.

भारत का कुल काजू प्रोडक्शन बढ़ा

इस प्रोग्राम में एक्सपोर्टर्स, प्रोसेसिंग यूनिट मालिकों और काजू उगाने वालों समेत लगभग 75 पार्टिसिपेंट्स ने हिस्सा लिया.

2023 में काजू प्रोडक्ट्स को APEDA शेड्यूल में शामिल करने के बाद, अथॉरिटी ने इस सेक्टर में इंडिया की ग्लोबल मौजूदगी को मजबूत करने की कोशिशें तेज कर दी हैं. दुनिया भर में काजू के प्रोडक्शन में भारत का हिस्सा लगभग 19 परसेंट है, जो कोटे डी आइवर और कंबोडिया के बाद दुनिया भर में तीसरे नंबर पर है.

वित्तीय वर्ष 2024–25 के दौरान, भारत का कुल काजू प्रोडक्शन 802,000 टन रहा, जिसमें महाराष्ट्र (23.98%), आंध्र प्रदेश (17.43%) और ओडिशा (16.43%) सबसे आगे रहे. केरल छठे नंबर पर है, जो देश के प्रोडक्शन में 9.31 परसेंट का योगदान देता है.

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