महाराष्ट्र में मॉनसून का इंतजार लंबाइस साल दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की रफ्तार काफी धीमी है, जिसके कारण देश के बड़े हिस्सों में बारिश की कमी देखने को मिल रही है. मौसम विभाग के अनुसार, जून महीने में अब तक करीब 71 प्रतिशत इलाकों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है. जहां जून में औसतन 165.3 मिमी बारिश होती है, वहीं पहले 15 दिनों में केवल 42.4 मिमी बारिश ही रिकॉर्ड की गई है. इसका असर खेती, गर्मी और पानी की उपलब्धता पर भी पड़ रहा है.
महाराष्ट्र में भी मॉनसून कमजोर बना हुआ है. राज्य में सामान्य से लगभग 72 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है. हालांकि जालना, बीड, नांदेड़, अकोला और अमरावती जैसे कुछ जिलों में बारिश सामान्य रही है, लेकिन बाकी कई हिस्सों में लोग अभी भी अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं. कई जगहों पर तेज गर्मी और उमस ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है.
भारतीय मौसम विभाग (IMD) का कहना है कि अरब सागर में अनुकूल परिस्थितियां न होने के कारण महाराष्ट्र में मॉनसून की आगे की प्रगति रुक गई है. मॉनसून ओडिशा, झारखंड और बिहार तक पहुंच चुका है, लेकिन महाराष्ट्र में इसकी रफ्तार धीमी पड़ गई है. मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि अगले कुछ दिनों में स्थिति सुधर सकती है और बारिश फिर से बढ़ सकती है.
पुणे शहर में इस बार मौसम ने सभी पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. शिवाजीनगर मौसम केंद्र के अनुसार, जून के पहले 15 दिनों में पहली बार 1958 के बाद शून्य बारिश दर्ज की गई है. यानी करीब 68 साल बाद ऐसा हुआ है जब इस अवधि में बिल्कुल बारिश नहीं हुई.
इतिहास के आंकड़े बताते हैं कि इससे पहले भी 1915 और 1932 में लंबे सूखे जैसे हालात बने थे, लेकिन उन सालों में बाद में जून में अच्छी बारिश हुई थी. उदाहरण के तौर पर 1915 में जून में 362 मिमी बारिश दर्ज की गई थी, जबकि 1958 में यह आंकड़ा 65 मिमी था.
हालांकि पुणे के कुछ इलाकों जैसे लोहेगांव में जून की शुरुआत में भारी बारिश हुई थी, लेकिन शहर के ज्यादातर हिस्सों में सूखे जैसे हालात बने हुए हैं. हडपसर जैसे क्षेत्रों में भी केवल हल्की बारिश हुई है. मौसम विभाग का कहना है कि फिलहाल मॉनसून की हवा इतनी मजबूत नहीं है कि पूरे शहर और राज्य में लगातार बारिश हो सके.
मौसम विभाग के अनुसार, फिलहाल महाराष्ट्र में मॉनसून की स्थिति कमजोर बनी रहेगी, लेकिन अरब सागर में परिस्थितियां बेहतर होने पर 20 जून के बाद बारिश में सुधार हो सकता है. अगर ऐसा होता है तो तटीय इलाकों में बारिश बढ़ सकती है और मॉनसून की रफ्तार फिर से तेज हो सकती है. कुल मिलाकर इस बार मॉनसून की देरी ने महाराष्ट्र और खासकर पुणे में लोगों की चिंता बढ़ा दी है, लेकिन मौसम वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में बारिश फिर से लौट सकती है.
ये भी पढ़ें:
बिहार कृषि एप होगा अपग्रेड: अब मगही, भोजपुरी समेत स्थानीय भाषाओं में मिलेगी जानकारी
धान छोड़ ग्राफ्टेड बैंगन से रचा मुनाफे का रिकॉर्ड: महासमुंद के किसान ने प्रति एकड़ कमाए 6.5 लाख रुपये
Copyright©2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today