
जम्मू और कश्मीर में पर्पल रेवोल्यूशन से जुड़े किसानों ने केंद्र से एक बड़ी अपील की है. किसानों ने मांग की है कि लैवेंडर पर इंपोर्ट ड्यूटी को बढ़ाया जाए. साथ ही साथ फरवरी में पेश होने वाले आम बजट 2026-27 में पॉलिसी सपोर्ट देने की गुजारिश भी की गई है. किसानों का कहना है कि रिटर्न में भारी गिरावट से इस महंगी फसल के टिकाऊपन को खतरा है.आपको बता दें कि पर्पल रेवॉल्यूशन में पिछले कुछ दिनों में खासी तेजी आई है. घाटी के मौसम और बढ़ती आय की वजह से अब ज्यादा से ज्यादा किसान इससे जुड़ने लगे हैं.
डोडा जिले के भद्रवाह के किसानों ने कहा कि सस्ता इंपोर्टेड लैवेंडर तेल के आने से घरेलू कीमतों पर बहुत बुरा असर पड़ा है. इससे उनकी आय में कमी आई है. साथ ही खेती करने वाले नए किसानों की संख्या में भी कमी आई है. भद्रवाह के किसानों की मानें तो लैवेंडर ने शुरू में उनकी जिंदगी बदल दी. इसमें कम पानी लगता था, मक्के से बेहतर रिटर्न मिलता था और बाजार में नए मौके भी मिलते थे. लेकिन बिना रोक-टोक के आयात से कीमतें गिर गई हैं. अब हालात ये हैं कि कई किसानों को तो अपनी लागत तक निकालने के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है
नेशनल मिशन प्रोग्राम के तहत प्रमोट किए गए पर्पल रेवोल्यूशन ने लैवेंडर को जम्मू और कश्मीर में पहाड़ी खेती के लिए, खासकर भद्रवाह के टेम्परेट बेल्ट में, एक गेम-चेंजर के तौर पर पेश किया. किसानों की मानें तो इस फसल ने खेती में अलग-अलग तरह के बदलाव लाने, कम कीमत वाले अनाज पर निर्भरता कम करने और गांव में, खासकर महिलाओं के लिए रोज़गार पैदा करने में मदद की. हालांकि, उगाने वालों का आरोप है कि आयातित लैवेंडर ऑयल और कच्चा माल, ज्यादातर विदेशी मार्केट से, कम टैरिफ पर भारत में आ रहा है. इससे लोकल लेवल पर बनने वाले तेल की कीमत कम हो रही है.
एक लैवेंडर डिस्टिलर ने कहा, 'हम उन देशों से मुकाबला कर रहे हैं जहां प्रोडक्शन कॉस्ट बहुत कम है. टैरिफ प्रोटेक्शन के बिना भारतीय किसान जिंदा नहीं रह सकते. किसानों ने बराबरी का मौका पक्का करने के लिए लैवेंडर ऑयल और उससे जुड़े प्रोडक्ट्स पर आयात शुल्क में सही बढ़ोतरी की मांग की है. उन्होंने कीमतों को स्थिर करने के लिए पक्की खरीद, मिनिमम सपोर्ट सिस्टम और घरेलू वैल्यू चेन को बढ़ाने की भी मांग की है. जानकारों का कहना है कि चेतावनी देते हैं कि लैवेंडर किसानों को नज़रअंदाज़ करने से इकोलॉजिकली सेंसिटिव इलाकों में बढ़ावा दिए जा रहे दूसरे फसल मॉडल पर भरोसा कम हो सकता है. लैवेंडर किसानों का कहना है कि जम्मू और कश्मीर में पर्पल रेवोल्यूशन को बनाए रखने और खुशबूदार फसल के आस-पास बनी रोजी-रोटी को बचाने के लिए समय पर दखल देना जरूरी है.
यह भी पढ़ें-