
किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) ने चालू वित्त वर्ष 2025–26 में संगठित कमोडिटी ट्रेडिंग के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की है. अब तक 740 एफपीओ ने नेशनल कमोडिटी एंड डेरिवेटिव्स एक्सचेंज (NCDEX) के प्लेटफॉर्म पर 1,25,164 मीट्रिक टन कृषि उपज का व्यापार करते हुए कुल 661 करोड़ रुपये का कारोबार किया है. यह उपलब्धि भारतीय कृषि को संगठित, बाजार-आधारित और किसान-स्वामित्व वाले व्यवसाय मॉडल की दिशा में तेजी से आगे बढ़ने का संकेत देती है. NCDEX पर व्यापार करने वाले सभी 740 एफपीओ भारत सरकार की केंद्रीय प्रायोजित योजना '10,000 किसान उत्पादक संगठनों का गठन एवं संवर्धन” के अंतर्गत गठित और समर्थित हैं. इस योजना का मकसद किसानों को पेशेवर मैनेजमें, वित्तीय संसाधनों और राष्ट्रीय बाजारों से जोड़न है ताकि वो मजबूत और टिकाऊ कमर्शियल ऑर्गनाइेशंस के तौर पर विकसित हो सकें.
वित्त वर्ष के दौरान एफपीओ के कारोबार में निरंतर वृद्धि दर्ज की गई है. अप्रैल से जून की अवधि में एफपीओज ने 31,254 मीट्रिक टन कृषि उपज का व्यापार किया. इसकी कुल कीमत 152.01 करोड़ रुपये रही. वहीं जुलाई से सितंबर तिमाही में यह आंकड़ा बढ़कर 43,603 मीट्रिक टन और 227.49 करोड़ रुपये तक पहुंच गया. सबसे तेज उछाल नवंबर–दिसंबर के महीनों में देखने को मिला. इस दौरान सिर्फ दो महीनों में ही FPOs ने 200 करोड़ रुपये से ज्यादा का बिजनेस किया. इसके साथ ही कुल व्यापार मूल्य 661 करोड़ रुपये और ट्रेडेड वॉल्यूम 1,25,164 मीट्रिक टन तक पहुंच गया. यह आंकड़ा किसान संगठनों की बढ़ती बाजार क्षमता और व्यावसायिक मजबूती को बयां करता है.
कार्यक्रम से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, यह रुझान किसानों के बाजार से जुड़ने के तरीके में एक बड़े संरचनात्मक बदलाव की ओर इशारा करता है. अधिकारियों का कहना है कि NCDEX जैसे राष्ट्रीय प्लेटफॉर्म पर ट्रेडिंग से FPOs को पारदर्शी मूल्य निर्धारण, सुरक्षित लेनदेन और देशभर के खरीदारों तक सीधी पहुंच मिल रही है. इससे किसान संगठन संगठित कमोडिटी बाजार में आत्मविश्वास के साथ भागीदारी कर पा रहे हैं.
आंकड़ों के अनुसार, कई FPOs बड़े पैमाने पर कारोबार करने वाली किसान-स्वामित्व वाली कंपनियों के रूप में उभरकर सामने आए हैं. नादब्रह्मा एग्रो फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड ने 75 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार कर शीर्ष स्थान हासिल किया. वहीं, सोयामास एग्रो फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड ने ₹44 करोड़ से अधिक का व्यापार दर्ज किया. इसके अलावा संतालपुर फार्मर्स प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड (लगभग ₹22 करोड़) और संभल कृषि विकास प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड (करीब 18 करोड़ रुपये) ने भी उल्लेखनीय प्रदर्शन किया. महात्मा फुले कृष-ई FPO, कृषि कुंभ प्रोड्यूसर कंपनी और कर्णिका एग्रो एफपीओ ने भी बहु-करोड़ रुपये का कारोबार किया.
हाल ही में ट्रेडिंग से जुड़े एफपीओ ने भी कम समय में शानदार उपलब्धि हासिल की है. डांग आहवा फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड ने लगभग 15 करोड़ रुपये जबकि छिपाबरोड़ किसान उत्पादक कंपनी लिमिटेड ने 11 करोड़ रुपये से ज्यादा का बिजनेस किया. चालू वित्त वर्ष में अब तक 661 करोड़ रुपये से ज्यादा का बिजनेस और 1.25 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा ट्रेडेड वॉल्यूम यह दर्शाता है कि वित्तीय वर्ष 2025–26 किसान-नेतृत्व वाली कमोडिटी ट्रेडिंग के लिए एक ऐतिहासिक वर्ष साबित हो सकता है. एफपीओ और कमोडिटी एक्सचेंजों के बीच मजबूत होता यह जुड़ाव किसानों की आय बढ़ाने, सौदेबाजी की शक्ति मजबूत करने और उन्हें बेहतर व निष्पक्ष मूल्य दिलाने में अहम भूमिका निभा रहा है.
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