Snowfall in Agriculture: इन 5 फसलों के लिए बर्फबारी है फायदेमंद, जानें क्‍यों 

Snowfall in Agriculture: इन 5 फसलों के लिए बर्फबारी है फायदेमंद, जानें क्‍यों 

बर्फबारी को सिर्फ आपदा के तौर पर देखना सही नहीं है. बर्फबारी गेहूं, सेब, केसर, आलू, जौ और सर्दियों की बाकी फसलों के लिए यह कई तरह से फायदेमंद साबित होती है. सही समय और संतुलित मात्रा में हुई बर्फबारी मिट्टी की सेहत सुधारती है, कीट-रोग कम करती है और किसानों की पैदावार व आमदनी बढ़ाने में मदद करती है.

क‍िसान तक
  • New Delhi ,
  • Jan 07, 2026,
  • Updated Jan 07, 2026, 8:00 AM IST

कश्‍मीर और हिमाचल प्रदेश के किसान इस बार बारिश और कम बर्फबारी से खासे परेशान हैं. बर्फबारी न होने से सेब और केसर समेत बाकी फसलों पर खतरा मंडराने लगा है. अब आपको लगता होगा कि भला बर्फबारी से फसलों को क्‍या फायदा होता है. आपको बता दें कि कई लोग बर्फबारी को खेती के लिए नुकसानदायक मानते हैं जबकि हकीकत यह है कि कई फसलों के लिए बर्फ किसी नैचुरल सिक्‍योरिटी कवर की तरह काम करती है. खासकर ठंडे और पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी मिट्टी, नमी और तापमान को संतुलित करके फसलों की पैदावार बढ़ाने में मदद करती है. सही फसल और सही मात्रा में हुई बर्फबारी किसानों के लिए वरदान साबित हो सकती है.

तो यह है बर्फबारी का फायदा 

बर्फबारी को सिर्फ आपदा के तौर पर देखना सही नहीं है. बर्फबारी गेहूं, सेब, केसर, आलू, जौ और सर्दियों की बाकी फसलों के लिए यह कई तरह से फायदेमंद साबित होती है. सही समय और संतुलित मात्रा में हुई बर्फबारी मिट्टी की सेहत सुधारती है, कीट-रोग कम करती है और किसानों की पैदावार व आमदनी बढ़ाने में मदद करती है. आइए आपको बताते हैं कि इन फसलों के लिए बर्फबारी कैसे और क्‍यों फायदेमंद है.  

केसर 

केसर दुनिया की सबसे महंगी फसलों में गिनी जाती है और इसकी खेती के लिए ठंडा मौसम और बर्फबारी बेहद अहम मानी जाती है. जम्मू-कश्मीर के पंपोर क्षेत्र में केसर की खेती का सबसे बड़ा कारण यही जलवायु है. सर्दियों में होने वाली बर्फबारी केसर के कंदों को ठंड से बचाती है और मिट्टी में लंबे समय तक नमी बनाए रखती है. बर्फ पिघलने के बाद मिट्टी भुरभुरी हो जाती है जिससे कंदों का विकास बेहतर होता है. साथ ही बर्फबारी से खरपतवार और कीटों का असर कम होता है, जिससे केसर की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों बढ़ते हैं.

गेहूं 

गेहूं रबी मौसम की मुख्य फसल है और हल्की बर्फबारी इसके लिए फायदेमंद मानी जाती है. बर्फ धीरे-धीरे पिघलकर मिट्टी में नमी पहुंचाती है, जिससे सिंचाई की जरूरत कम होती है. इससे पौधों की जड़ों को पर्याप्त पानी मिलता है और दाने भरने की प्रक्रिया बेहतर होती है. साथ ही ठंड के कारण कई हानिकारक कीट और रोग अपने आप खत्म हो जाते हैं.

सेब और बाकी फल

सेब, नाशपाती, आड़ू, खुबानी और चेरी जैसी फसलों के लिए बर्फबारी बेहद जरूरी होती है. इन फलों को अच्छी पैदावार के लिए एक निश्चित अवधि तक ठंड की आवश्यकता होती है, जिसे चिलिंग आवर कहा जाता है. पर्याप्त बर्फबारी से पौधों में सही समय पर फूल आते हैं और फल का आकार व स्वाद बेहतर होता है. यही वजह है कि हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर जैसे क्षेत्रों में इन फसलों की खेती सफल रहती है.

आलू 

ठंडे इलाकों में आलू की फसल के लिए हल्की बर्फबारी लाभकारी मानी जाती है. बर्फ मिट्टी के तापमान को नियंत्रित रखती है, जिससे कंदों का विकास समान रूप से होता है. इसके अलावा पाला और कीटों से भी फसल को सुरक्षा मिलती है. हालांकि बहुत ज्यादा बर्फ आलू की फसल को नुकसान पहुंचा सकती है इसलिए संतुलित बर्फबारी जरूरी है.

जौ और जई जैसी फसलें

जौ और जई ठंड सहन करने वाली फसलें हैं. बर्फबारी से इन्हें पर्याप्त नमी मिलती है और पौधों की बढ़वार अच्छी होती है. इन फसलों की जड़ें मजबूत बनती हैं जिससे तेज हवा या पाले का असर कम पड़ता है और उत्पादन में बढ़ोतरी होती है.

मिट्टी की सेहत भी रहती है अच्‍छी 

बर्फबारी मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभाती है. बर्फ के पिघलने से मिट्टी में नमी लंबे समय तक बनी रहती है. इससे लाभकारी सूक्ष्म जीव सक्रिय होते हैं और मिट्टी की संरचना सुधरती है. साथ ही बर्फ की ठंडक कई कीटों और उनके अंडों को नष्ट कर देती है जिससे अगली फसल में रोग कम लगते हैं. बर्फ की मोटी परत कई तरह के खरपतवारों की वृद्धि को रोक देती है. ठंडे तापमान में कीट और रोग फैलाने वाले बैक्‍टीरिया जिंदा नहीं रह पाते.इससे किसानों को कीटनाशकों और केमिकल्‍स पर कम खर्च करना पड़ता है.

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