
बागवानी देश में किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने का सबसे सशक्त माध्यम है, क्योंकि देश के फल उत्पादन क्षेत्र के लगभग एक-तिहाई हिस्से में केवल आम की खेती होती है. भारत में आम केवल एक फल नहीं, बल्कि लाखों किसानों की आय का मुख्य आधार है. डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा, बिहार में प्लांट पैथोलॉजी हेड डॉ एस.के. सिंह ने बताया कि जनवरी का समय आम के पेड़ों के लिए 'प्री-फ्लावरिंग' यानी बौर आने से ठीक पहले का सबसे अहम चरण होता है. इस समय की गई थोड़ी सी मेहनत और सही वैज्ञानिक प्रबंधन यह तय करता है कि आपके बाग में मंजर बौर कितना आएगा और फलों की क्वालिटी कैसी होगी. अगर आप इस दौरान लापरवाही करते हैं, तो कीट और बीमारियां आपकी पूरी फसल बर्बाद कर सकती हैं. अगर किसान इस समय सही प्रबंधन, सही देखभाल और कीट नियंत्रण पर ध्यान दें, तो न केवल बौर की मात्रा बढ़ेगी, बल्कि फलों की गुणवत्ता और आकार में भी भारी सुधार होगा जिसके बारे डॉ एस.के. सिंह ने खास सुझाव दिया है.
आम में मंजर को ताकत देने के लिए पेड़ों को सही 'डाइट' देना जरूरी है. इस समय पोटाश की हल्की मात्रा और सूक्ष्म पोषक तत्व जैसे बोरॉन (0.2%) का छिड़काव मंजर की गुणवत्ता को कई गुना बढ़ा देता है. बोरॉन के छिड़काव से फूल झड़ने की समस्या कम होती है और फल भी सुंदर व चमकदार बनते हैं. अगर आप जैविक तरीके अपनाना चाहते हैं, तो प्रति पेड़ 10-15 किलो वर्मी कम्पोस्ट और 2 किलो नीम की खली देना सबसे बेहतर विकल्प है.
जनवरी के महीने में बाग की हल्की जुताई करना बहुत फायदेमंद होता है. इससे मिट्टी में छिपे कीड़ों के अंडे और लार्वा धूप लगने से नष्ट हो जाते हैं. साथ ही, पेड़ों के आसपास उगे खरपतवारों को हटाकर बाग से बाहर नष्ट कर दें, क्योंकि ये खरपतवार पेड़ों के हिस्से का खाद-पानी चोरी करते हैं और बीमारियों को न्योता देते हैं. बाग को साफ-सुथरा रखने से पेड़ों में हवा का संचार बढ़ता है, जिससे फफूंद लगने का खतरा कम हो जाता है.
आम में मीलीबग एक ऐसा सफेद कीट है जो बौर और छोटे फलों का रस चूसकर उन्हें सुखा देता है. इसे रोकने का सबसे बढ़िया समय जनवरी ही है. वैज्ञानिक सलाह है कि पेड़ों के तने पर जमीन से कुछ ऊपर अल्केथेन शीट यानि प्लास्टिक की पट्टी कसकर बांध दें और उसके निचले हिस्से पर ग्रीस लगा दें. इससे कीट पेड़ पर नहीं चढ़ पाएंगे. अगर प्रकोप ज्यादा हो, तो विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार कीटनाशक का छिड़काव करें. याद रखें कि मीलीबग को नीचे रोकना, बाद में दवा छिड़कने से कहीं ज्यादा आसान और सस्ता है.
आम के बाग में अक्सर टहनियां ऊपर से सूखने लगती हैं, जिसे 'डाई-बैक' कहते हैं. इसके लिए सूखी हुई टहनियों को स्वस्थ हिस्से से 5-10 सेमी नीचे से काटकर हटा दें और कटे हुए भाग पर कॉपर ऑक्सीक्लोराइड का लेप लगाएं. वहीं, अगर तने से गोंद जैसा रस निकल रहा हो, तो उस हिस्से को खुरचकर साफ करें और बोर्डो पेस्ट लगाएं. इन छोटे उपायों से पेड़ों की उम्र बढ़ती है और वे मंजर देने के लिए पूरी तरह स्वस्थ और तैयार रहते हैं.
बौर आने के समय नमी का संतुलन बनाना बहुत जरूरी है. न तो बाग में जलजमाव होना चाहिए और न ही मिट्टी पूरी तरह सूखनी चाहिए. इसके अलावा, 'तना छेदक' और 'पुष्प मिज' जैसे कीटों पर पैनी नजर रखें. अगर तने में छेद दिखे, तो उनमें दवा डालकर मिट्टी से बंद कर दें. समय पर की गई ये छोटी सावधानियां आपके उत्पादन को 20% से 40% तक बढ़ा सकती हैं. याद रखें कि जनवरी की सजगता ही गर्मियों में मीठे और भरपूर आमों की गारंटी है.
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