
देश में रबी सीजन 2025-26 की बुवाई लगभग अपने अंतिम चरण में पहुंचती दिख रही है और अब तक सामने आए सरकारी आंकड़े फसली रुझानों की साफ तस्वीर पेश कर रहे हैं. कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 2 जनवरी 2026 तक कुल रबी फसलों का प्रोग्रेसिव रकबा 634.14 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया है, जो पिछले सीजन 2024-25 की इसी अवधि के 617.74 लाख हेक्टेयर की तुलना में 16.40 लाख हेक्टेयर अधिक है. प्रतिशत के लिहाज से देखें तो कुल रबी बुवाई में करीब 2.65 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई है.
रबी सीजन की सबसे प्रमुख फसल गेहूं के रकबे में बढ़ोतरी बरकरार है. 2025-26 में अब तक गेहूं की बुवाई 334.17 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इसी समय यह आंकड़ा 328.04 लाख हेक्टेयर था. यानी गेहूं के रकबे में 6.13 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी हुई है, जो करीब 1.87 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाती है. इससे संकेत मिलता है कि किसान इस बार भी गेहूं को लेकर आश्वस्त नजर आ रहे हैं.
दलहन फसलों की बात करें तो कुल दालों का रकबा 134.30 लाख हेक्टेयर रहा है, जो पिछले साल के 130.87 लाख हेक्टेयर से 3.44 लाख हेक्टेयर ज्यादा है. यह बढ़त करीब 2.6 प्रतिशत की है. चने की बुवाई में खास उछाल देखने को मिला है, जहां रकबा 95.88 लाख हेक्टेयर पहुंच गया है, जो बीते साल से 4.66 लाख हेक्टेयर ज्यादा है. हालांकि, कुल्थी और उड़द में हल्की गिरावट दर्ज की गई है.
वहीं, श्री अन्न यानी मोटे अनाजों की स्थिति थोड़ी मिश्रित रही है. इस श्रेणी का कुल रकबा 51.79 लाख हेक्टेयर रहा, जो पिछले साल के 50.66 लाख हेक्टेयर से 1.13 लाख हेक्टेयर अधिक है यानी करीब 2.2 प्रतिशत की बढ़त. मक्का और जौ की बुवाई में इजाफा देखने को मिला है. मक्का 23.32 लाख हेक्टेयर और जौ 6.78 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है. वहीं, ज्वार के रकबे में 1.26 लाख हेक्टेयर की गिरावट दर्ज की गई है.
विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, तिलहन फसलों में भी सकारात्मक रुझान दिख रहा है. 2025-26 में तिलहनों का कुल रकबा 96.30 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया है, जो पिछले साल की इसी अवधि से 3.04 लाख हेक्टेयर अधिक है. सरसों की बुवाई 89.36 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गई है, जिसमें करीब 2.79 लाख हेक्टेयर की बढ़त दर्ज की गई.
हालांकि, मूंगफली और तिल जैसी कुछ फसलों में मामूली गिरावट देखी गई है. अगर पिछले सीजन के फाइनल आंकड़ों से तुलना करें तो 2024-25 में कुल रबी फसलों का अंतिम रकबा 659.39 लाख हेक्टेयर रहा था, जबकि सामान्य रबी रकबा 637.81 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया था.