Almond Production: कश्मीर में बादाम की बंपर पैदावार से किसानों के चेहरे खिले, बागवानी विभाग ने कही ये बात

Almond Production: कश्मीर में बादाम की बंपर पैदावार से किसानों के चेहरे खिले, बागवानी विभाग ने कही ये बात

कश्मीर में इस साल अनुकूल मौसम और बागवानी विभाग की समय पर दी गई तकनीकी सलाह के चलते बादाम की बंपर पैदावार हुई है. पुलवामा के मुख्य बागवानी अधिकारी रियाज अहमद शाह ने बताया कि पिछले दो-तीन वर्षों की तुलना में उत्पादन काफी बढ़ा है.

Almond Production Kashmir Almond Production Kashmir
क‍िसान तक
  • Noida,
  • Jul 31, 2026,
  • Updated Jul 31, 2026, 4:50 PM IST

कश्मीर में इस साल बादाम की फसल ने किसानों को राहत दी है. अनुकूल मौसम और समय पर अपनाए गए बागवानी उपायों की वजह से पिछले दो-तीन वर्षों की तुलना में बादाम का उत्पादन काफी बेहतर रहा है. इससे बादाम उत्पादकों में उत्साह का माहौल है. पुलवामा के मुख्य बागवानी अधिकारी रियाज अहमद शाह ने बताया कि इस साल मौसम बादाम की खेती के लिए बेहद अनुकूल रहा. पिछले वर्षों में प्रतिकूल मौसम के कारण उत्पादन प्रभावित हुआ था, लेकिन इस बार परिस्थितियां किसानों के पक्ष में रहीं.

उन्होंने कहा कि बागवानी विभाग ने समय-समय पर किसानों तक कृषि विश्वविद्यालय की तकनीकी सलाह पहुंचाई. कीटनाशकों के छिड़काव और उर्वरकों के सही इस्तेमाल से जुड़े सुझाव भी समय पर दिए गए, जिसका सीधा फायदा उत्पादन में देखने को मिला. उन्होंने इस सफलता का श्रेय किसानों की मेहनत को भी दिया.

बादाम की खेती को भी मिले प्राथमिकता: कि‍सान

रियाज अहमद शाह ने कहा कि बेहतर उत्पादन से किसान संतुष्ट हैं, लेकिन उनकी मांग है कि कृषि और बागवानी विभाग बादाम की खेती पर भी उतना ही ध्यान दे, जितना अन्य प्रमुख बागवानी फसलों पर दिया जाता है. उन्‍हाेंने कहा कि अगर बादाम की खेती को लगातार तकनीकी और संस्थागत सहयोग मिले तो इसका रकबा और उत्पादन दोनों बढ़ सकते हैं.

पहले देशभर में जाती थी कश्मीर की बादाम

बादाम की खेती करने वाले किसान गुलाम मोहम्मद भट ने कहा कि इस बार उत्पादन पिछले साल की तुलना में बेहतर रहा है, लेकिन बीते तीन दशकों में बादाम की पैदावार लगातार घटती गई है. उन्होंने बताया कि एक समय अवंतीपोरा, त्राल, बीरवाह, मट्टन और आसपास के करेवा इलाकों में बड़े पैमाने पर बादाम के बाग थे. उस दौर में रोजाना 20 से 25 ट्रक बादाम दिल्ली, कोलकाता और चेन्नई जैसे शहरों के लिए भेजे जाते थे, जहां से इसकी आपूर्ति देश के अन्य हिस्सों में होती थी.

जलवायु परिवर्तन से बढ़ी चुनौती

किसान गुलाम मोहम्मद भट ने कहा कि बदलते मौसम ने बादाम की खेती को सबसे अधिक नुकसान पहुंचाया है. कभी लंबे सूखे और कभी अत्यधिक बारिश जैसी परिस्थितियों ने फसल पर बुरा असर डाला था. उन्होंने कहा कि बढ़ती गर्मी और कई बार 36 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने वाले तापमान के कारण बादाम के पेड़ सूखने लगे, जिससे उत्पादन लगातार प्रभावित हुआ.

सेब की ओर बढ़ा किसानों का रुझान

भट ने बताया कि बादाम की खेती कमजोर पड़ने के साथ कई किसानों ने सेब की बागवानी की ओर रुख कर लिया, क्योंकि उसमें बेहतर उत्पादन और आय मिलने लगी. उन्‍होंने कहा कि वर्षों तक बादाम की खेती के लिए जरूरी तकनीकी मार्गदर्शन और सरकार की तरफ से ध्यान नहीं दिया गया. जिस तरह आज सेब उत्पादकों को नियमित सलाह और मदद दी जाती है, वैसी व्यवस्था पहले बादाम उत्पादकों के लिए नहीं थी, जिसके कारण बादाम के बागों का रकबा धीरे-धीरे घटता चला गया. (पीटीआई)

MORE NEWS

Read more!