किसान का कमाल: 30,000 वर्ग फीट खेत में उगाईं 42 गेहूं की किस्में, सिंधु घाटी की ‘पैगंबरी’ भी शामिल

किसान का कमाल: 30,000 वर्ग फीट खेत में उगाईं 42 गेहूं की किस्में, सिंधु घाटी की ‘पैगंबरी’ भी शामिल

कर्नाटक के हुबली के पास मलाली गांव के किसान चंद्रप्पा हादिमनी ने अपने 30,000 वर्ग फीट खेत में 42 गेहूं की किस्में उगाकर अनोखा प्रयोग किया है. इनमें सिंधु घाटी सभ्यता में उगाई जाने वाली दुर्लभ पैगंबरी किस्म भी शामिल है. किसान अलग-अलग राज्यों से लाई गई वैरायटी की उपज, ग्रोथ और स्थानीय मौसम के अनुसार अनुकूलता का परीक्षण कर रहे हैं.

गेहूं की खेतीगेहूं की खेती
क‍िसान तक
  • New Delhi ,
  • Feb 26, 2026,
  • Updated Feb 26, 2026, 2:14 PM IST

कर्नाटक के हुबली जिला हेडक्वार्टर से 15 किमी दूर मलाली गांव के किसान चंद्रप्पा हादिमनी ने बड़ा कमाल किया है. इस किसान ने अपने 30,000 वर्ग फीट के खेत में गेहूं की 42 किस्में उगाई हैं, ताकि यह टेस्ट किया जा सके कि कौन सी किस्म वहां की मिट्टी और मौसम के हिसाब से सही रहेगी. इनमें कुछ दुर्लभ किस्में भी शामिल हैं, जिसमें पैगंबरी भी शामिल है, जो पुरानी सिंधु घाटी में उगाई जाने वाली फसल है. हादिमनी की गेहूं की फसल कुछ ही हफ्तों में कटाई के लिए तैयार हो जाएगी.

किसान हादिमनी ने किसानों के नेटवर्क, सहज समृद्ध केंद्र से इकट्ठा किए गए बीजों से गेहूं की सभी किस्में उगाई हैं. सहज समृद्ध के डायरेक्टर जी कृष्ण प्रसाद ने कहा, “यह दूसरा साल है जब वह गेहूं की इतनी सारी किस्में उगा रहे हैं. पिछले साल भी ऐसा ही एक प्रयोग किया गया था, लेकिन पैदावार ठीक नहीं थी. इस साल, हमें उम्मीद है कि यह बहुत सफल होगा.”

कई राज्यों के गेहूं उगाए

हादिमनी ने कहा कि उन्होंने इन किस्मों को रबी की फसल के तौर पर उगाया था. उन्होंने बताया, “गेहूं एक टेंपरेट फसल है जो मॉनसून के बाद उगाई जाती है, और इसे ज्यादा पानी की जरूरत नहीं होती. हमने ये सभी वैरायटी देश के अलग-अलग हिस्सों से मंगाई हैं, जिनमें कर्नाटक, ओडिशा, गुजरात, महाराष्ट्र, पंजाब और असम शामिल हैं.”

उन्होंने कहा, खेती से पहले प्लॉट को बांटा गया और नंबर दिए गए. “हम ग्रोथ और पैदावार की स्टडी कर रहे हैं और लोकल खेती के लिए सबसे अच्छी वैरायटी ढूंढने के लिए उन्हें कैटेगरी में बांट रहे हैं. कुछ वैरायटी बहुत यूनिक हैं. हदीमनी द्वारा उगाए गए काले गेहूं में एंटी-कैंसर प्रॉपर्टीज होती हैं.

खेत का दौरा करने वाले एक सीनियर एग्रो साइंटिस्ट कुमार लमानी ने हदीमनी की कोशिशों की तारीफ की. उन्होंने कहा, “वैज्ञानिकों ने एक ऐसी फसल तैयार की है जिसके लिए सिंचाई की अधिक जरूरत होती है, लेकिन यह किस्म जानवरों के चारे के लिए अच्छी नहीं है. उन्होंने कहा, “सिर्फ सूखी जमीन की किस्में ही इंसानों के खाने और जानवरों के चारे के लिए सबसे अच्छी होती हैं.”

कुछ किस्मों का अनोखा इतिहास

कुछ किस्मों का एक अनोखा इतिहास भी होता है. उदाहरण के लिए, अन्निगेरी और उसके आस-पास उगाया जाने वाला अमृत गेहूं अन्नोगेरे के मंदिर के देवता, भगवान अमृतेश्वर से जुड़ा है. बिजिगा, एक और किस्म, सवादत्ती के किसानों के बीच पॉपुलर है. कुछ किस्में गुजरात जैसी जगहों से आई हैं.

पैगंबरी एक गोल दाने वाली गेहूं की किस्म है जिसकी खेती तब बड़े पैमाने पर की जाती थी जब सिंधु घाटी सभ्यता अपने पीक पर थी. “इसे गुजरात के एक एग्रीकल्चर एक्सपर्ट पदम जैन ने खोजा था. उन्होंने यह किस्म हमारे साथ शेयर की. यह विजयपुरा जिले के इंडी तालुक में खेती के लिए सही है क्योंकि वहां का क्लाइमेट अच्छा है. पैगंबरी की खेती ज्यादातर उत्तर-पश्चिम भारत – सिंध, पंजाब और सौराष्ट्र में होती थी. प्रसाद ने कहा, “यह काले और लाल दोनों दानों में मिलता है.”

खेत में मिलने वाली कुछ दूसरी गेहूं की किस्में हैं सरबती, मुंडा पीसा, गोदावरी, डबली, लाल अमृत, बरनाला, गरूर, जावे, स्वर्ण और कुदरत आदि.

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