
इस रबी सीजन में देशभर में बड़े स्तर पर गेहूं की बुवाई हुई है और अब फसल पककर अंतिम चरण में पहुंच चुकी है. कई क्षेत्रों में गेहूं कटाई का काम पूरा हो चुका है और भंडारण या बिक्री की तैयारी है. वहीं, कई हिस्सों में कटाई का काम शेष है. इस बीच, मौसम में बदलाव- तेज हवा या बारिश से फसल को नुकसान का खतरा बना हुआ है. ऐसे में यह जरूरी है कि किसान समय पर कटाई और सुरक्षित भंडारण पर ध्यान दें.
भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान, करनाल (IIWBR) ने किसानों को 30 अप्रैल तक जरूरी कार्य पूरे करने की सलाह दी है. IIWBR ने एडवाजरी में कहा है कि किसान फसल पूरी तरह पकने पर कटाई करें और पकी हुई फसल में सिंचाई न करें. जहां फसल गिर गई है, वहां पहले कटाई करें और उसे सुरक्षित रखें, ताकि नुकसान कम हो सके.
कटाई के बाद गेहूं को अच्छी तरह सुखाकर ही भंडारण करें. अनाज में नमी का स्तर 12 से 13 प्रतिशत के बीच रखें. भंडारण से पहले गोदाम, बोरियां और भंडारण स्थान की सफाई करें और उन्हें धूप में सुखाकर कीट मुक्त रखें.
अगर गेहूं को बीज के रूप में रखना है तो उसे अच्छी तरह सुखाकर नमी 10 प्रतिशत से कम रखें. नए बीज या अनाज को पुराने के साथ न रखें. साथ ही भंडारण से पहले बीज की जांच करें और संक्रमण मिलने पर फ्यूमिगेशन करें.
भंडारण के दौरान कीटों से बचाव के लिए एल्युमिनियम फॉस्फाइड से फ्यूमिगेशन करें. इसके लिए 3 ग्राम की 2 से 3 गोलियां प्रति टन बीज के हिसाब से 7 से 15 दिन तक रखें. फ्यूमिगेशन के बाद 40 मिली मेलाथियान, 38 मिली डेल्टामेथ्रिन या 15 मिली बाइफेन्थ्रिन को एक लीटर पानी में मिलाकर बोरियों पर छिड़काव करें. बीज उपचार के लिए 6 मिली मेलाथियान या 4 मिली डेल्टामेथ्रिन को 500 मिली पानी में मिलाकर प्रति क्विंटल बीज पर उपयोग करें.
कटाई के बाद बचे फसल अवशेष को न जलाएं. इन्हें खेत में मिलाएं और यदि संभव हो तो दलहन फसल की बुवाई करें, इससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ेगी. इस तरह गेहूं की पकी हुई फसल के अंतिम चरण में समय पर कटाई, सही भंडारण और कीट प्रबंधन अपनाकर नुकसान को कम किया जा सकता है और अनाज की गुणवत्ता बनाए रखी जा सकती है.