बेमौसम बारिश का असर: सरकार ने घटाया गेहूं उत्पादन अनुमान, 120 मिलियन टन रहने के आसार

बेमौसम बारिश का असर: सरकार ने घटाया गेहूं उत्पादन अनुमान, 120 मिलियन टन रहने के आसार

बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि के चलते केंद्र सरकार ने गेहूं उत्पादन का अनुमान घटाया है. अब उत्पादन 110-120 मिलियन टन के बीच रहने की संभावना है, हालांकि पर्याप्त भंडार से सप्लाई पर असर सीमित रहेगा.

क‍िसान तक
  • New Delhi,
  • Apr 24, 2026,
  • Updated Apr 24, 2026, 7:43 PM IST

केंद्र सरकार ने देश में गेहूं उत्पादन का अनुमान पहले से घटा दिया है. हाल के दिनों में सरकार ने बताया था कि गेहूं उत्पादन 120.21 मिलियन टन तक जा सकता है. लेकिन शुक्रवार के ताजा अनुमान में इसे अधिक से अधिक 120 मिलियन टन बताया गया है. खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने शुक्रवार को इसकी जानकारी दी. 

खाद्य सचिव ने बताया कि 2025-26 फसल वर्ष के लिए भारत का गेहूं उत्पादन 110 से 120 मिलियन टन के बीच रहने की संभावना है. प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्यों में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि के कारण फसलों को हुए नुकसान को देखते हुए यह अनुमान लगाया गया है.

रोलर फ्लोर मिलर्स का अनुमान

रोलर फ्लोर मिलर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया ने इस साल के लिए गेहूं उत्पादन का अनुमान 110.65 मिलियन टन लगाया है. हाल के दिनों में मौसम की वजह से नुकसान को ध्यान में रखते हुए, यह आंकड़ा 2024-25 में उगाए गए 109.63 मिलियन टन से थोड़ा ही अधिक है.

खराब मौसम का असर पड़ने से पहले, कृषि मंत्रालय ने उत्पादन का अनुमान 120.21 मिलियन टन लगाया था, जो पिछले साल के 117.94 मिलियन टन से अधिक था.

इससे पहले समाचार एजेंसी रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में बताया गया कि साल 2025 के मुकाबले 2026 में गेहूं का उत्पादन 5% से 10% तक घट सकता है. इसकी बड़ी वजह गेहूं की कटाई से ठीक पहले हुई बारिश और ओलावृष्टि बताई जा रही है. इससे फसल को नुकसान पहुंचा है और सरकार के उत्पादन बढ़ने के अनुमान पूरे होते नजर नहीं आ रहे हैं.

गेहूं खरीद पर असर

कम उत्पादन का असर सरकारी एजेंसियों की गेहूं खरीद पर पड़ सकता है. वैसे भी पिछले चार सालों से सरकारी एजेंसियां अपने तय खरीद लक्ष्य हासिल नहीं कर पाई हैं. हालांकि, राहत की बात यह है कि देश में गेहूं की कमी होने की आशंका नहीं है, क्योंकि भारत के पास इस समय जरूरत से लगभग तीन गुना ज्यादा गेहूं का भंडार मौजूद है.

नौ राज्यों में मौसम का असर

रोलर फ्लोर मिलर्स फेडरेशन  की ओर से जारी सर्वे के अनुसार, फरवरी और अप्रैल के बीच बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि के कारण नौ राज्यों (पंजाब, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र) में गेहूं की फसल पर मध्यम से लेकर काफी ज्यादा असर पड़ा.

सरकार ने मौजूदा रबी मार्केटिंग सीजन (अप्रैल-मार्च) में अब तक 16.4 मिलियन टन गेहूं खरीदा है और अपने खरीद लक्ष्य को पहले के 30 मिलियन टन के लक्ष्य से बढ़ाकर 34.5 मिलियन टन कर दिया है.

राज्यों में खरीद लक्ष्य बढ़े

खरीद लक्ष्य मध्य प्रदेश (7.8 मिलियन टन से 10 मिलियन टन), उत्तर प्रदेश (1 मिलियन टन से 2.5 मिलियन टन), राजस्थान (2.1 मिलियन टन से 2.35 मिलियन टन), बिहार (18,000 से 1,80,000 टन) और उत्तराखंड (1,000 टन से 50,000 टन) में बढ़ाए गए हैं, और सरकार ने उत्तराखंड को छोड़कर बाकी सभी चार राज्यों के लिए खरीद के नियमों में ढील दी है.

गेहूं का निर्यात

सरकार ने 50 लाख टन गेहूं और 10 लाख टन गेहूं उत्पादों के निर्यात की अनुमति दी है. सेक्रेटरी ने आगे कहा कि सरकार अगले दो महीनों के अंदर गेहूं के लिए एक नई ओपन मार्केट सेल स्कीम पॉलिसी लाने की योजना बना रही है, और उन्होंने मिल मालिकों से अपील की कि वे सप्लाई के लिए इस स्कीम पर निर्भर रहने के बजाय गेहूं की खरीद में ज्यादा बड़ी भूमिका निभाएं. 31 मार्च तक सरकार के पास 22.2 मिलियन टन गेहूं का स्टॉक था.(PTI इनपुट के साथ)

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