खरीफ की बुवाई पिछड़ने पर बोले शिवराज- अभी रिकवरी की संभावना, इस तारीख से आएगी तेजी!

खरीफ की बुवाई पिछड़ने पर बोले शिवराज- अभी रिकवरी की संभावना, इस तारीख से आएगी तेजी!

कमजोर मॉनसून की वजह से इस साल खरीफ फसलों की बुवाई अब तक 16 फीसदी पीछे चल रही है. हालांकि केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उम्मीद जताई है कि 15 अगस्त तक चलने वाली बुवाई और 20 जुलाई के बाद संभावित अच्छी बारिश से रकबे की कमी काफी हद तक पूरी हो सकती है.

Shivraj singh chouhanShivraj singh chouhan
क‍िसान तक
  • Noida,
  • Jul 15, 2026,
  • Updated Jul 15, 2026, 7:33 PM IST

देश के कई हिस्सों में जून के दौरान कमजोर मॉनसून की वजह से खरीफ फसलों की बुवाई की रफ्तार धीमी रही है, लेकिन केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उम्मीद जताई है कि आने वाले दिनों में स्थिति बेहतर हो सकती है. उन्होंने कहा कि खरीफ फसलों की बुवाई 15 अगस्त तक जारी रहती है, इसलिए अभी रकबे में आई कमी की भरपाई की संभावना बनी हुई है. सरकार लगातार बारिश और बुवाई की प्रगति पर नजर रख रही है.

20 जुलाई के बाद अच्छी बारिश की उम्मीद

आईसीएआर के एक कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से अलग से बातचीत में शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि जून में सामान्य से कम बारिश हुई थी, लेकिन जुलाई के पहले हफ्ते में कई क्षेत्रों में अच्छी बारिश दर्ज की गई है. उन्होंने बताया कि 20 जुलाई के बाद भी अच्छी बारिश होने की संभावना है. अगर मौसम अनुकूल रहा तो किसानों को बुवाई पूरी करने का पर्याप्त अवसर मिलेगा और वर्तमान कमी काफी हद तक कम हो सकती है.

सरकार ने इनपुट उपलब्ध कराने का भरोसा दिया

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार राज्यों के साथ मिलकर हालात की लगातार समीक्षा कर रही है. किसानों को समय पर बीज, खाद और अन्य कृषि इनपुट उपलब्ध कराए जा रहे हैं, ताकि बारिश मिलते ही बुवाई में तेजी लाई जा सके. उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात पर सरकार की लगातार नजर है और किसानों को किसी तरह की कमी नहीं होने दी जाएगी.

अब तक खरीफ बुवाई 16 फीसदी पीछे

कृषि मंत्रालय के 10 जुलाई तक के आंकड़ों के अनुसार, इस खरीफ सीजन में कुल बुवाई का रकबा 531.25 लाख हेक्टेयर रहा है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में करीब 16 प्रतिशत कम है. इस बार कमजोर मॉनसून और अल नीनो के प्रभाव के कारण कई राज्यों में बुवाई समय पर शुरू नहीं हो सकी, जिससे अधिकांश प्रमुख फसलों का रकबा प्रभावित हुआ है.

धान, दलहन, तिलहन और कपास सभी प्रभावित

आंकड़ों के अनुसार, धान की बुवाई 114.69 लाख हेक्टेयर में हुई है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 125.53 लाख हेक्टेयर थी. दलहन का रकबा घटकर 56.63 लाख हेक्टेयर रह गया है. अरहर, उड़द और मूंग जैसी प्रमुख दालों की बुवाई भी पिछले साल से कम दर्ज की गई है. मोटे अनाज का रकबा 98.69 लाख हेक्टेयर और तिलहनों का रकबा 117.83 लाख हेक्टेयर रहा है. सोयाबीन की बुवाई भी करीब 16 प्रतिशत घटकर 90.51 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गई है.

गन्ना और जूट में बढ़ोतरी, कपास अब भी पीछे

जहां अधिकांश खरीफ फसलों का रकबा घटा है, वहीं गन्ने की बुवाई में मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई है. गन्ने का रकबा बढ़कर 57.58 लाख हेक्टेयर हो गया है, जबकि जूट और मेस्ता का रकबा भी पिछले वर्ष के मुकाबले थोड़ा बढ़ा है. दूसरी ओर कपास की बुवाई अब भी पिछड़ रही है. इस सीजन में अब तक 79.54 लाख हेक्टेयर में कपास बोई गई है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 93.95 लाख हेक्टेयर था. (पीटीआई)

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