

उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (ICAR-IVRI), बरेली के निदेशक डॉ. त्रिवेणी दत्त को सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, मेरठ का नया कुलपति नियुक्त किया है. राजभवन द्वारा जारी आदेश के अनुसार, डॉ. दत्त की यह नियुक्ति उनके कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से तीन वर्ष की अवधि के लिए प्रभावी होगी. डॉ. त्रिवेणी दत्त का करियर पशु विज्ञान और अनुसंधान के क्षेत्र में बेहद शानदार रहा है. इस नई जिम्मेदारी से पहले वह आई.सी.ए.आर.-आई.वी.आर.आई. (IVRI), बरेली में निदेशक और कुलपति के पद पर कार्यरत थे. उनके पास अध्यापन, अनुसंधान और विस्तार कार्यों का 33 वर्षों से अधिक का लंबा अनुभव है, जिसमें 15 वर्षों से अधिक समय उन्होंने अनुसंधान प्रबंधन पदों पर बिताया है. आई.वी.आर.आई. में उन्होंने संयुक्त निदेशक अकादमिक और डीन के साथ-साथ संयुक्त निदेशक विस्तार शिक्षाजैसी महत्वपूर्ण भूमिकाएं भी निभाई हैं.
पशु विज्ञान और कृषि के क्षेत्र में डॉ. दत्त का योगदान अद्वितीय है. उन्होंने 'वृंदावनी' गाय की नस्ल, सूअर की 'लैंडली' नस्ल और 'रोहिलखंडी' व 'चौगार्खा' बकरी जैसी स्थानीय नस्लों के विकास और पंजीकरण में मुख्य भूमिका निभाई है. उनके नाम 2 पेटेंट, 41 कॉपीराइट और 109 से अधिक डिजिटल शैक्षणिक उपकरण जैसे मोबाइल ऐप और चैटबॉट)दर्ज हैं. उन्होंने 337 से अधिक शोध पत्र और 29 पुस्तकें प्रकाशित की हैं, जो उनके अकादमिक कद को दर्शाती हैं.डॉ. दत्त को उनकी उपलब्धियों के लिए कई राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है, जिनमें राजर्षि टंडन राजभाषा पुरस्कार और डॉ. राजेंद्र प्रसाद पुरस्कार प्रमुख हैं. मेरठ स्थित कृषि विश्वविद्यालय में उनकी नियुक्ति से उम्मीद जताई जा रही है कि संस्थान में नई शिक्षा नीति-2020 का कार्यान्वयन और बेहतर होगा तथा अनुसंधान एवं स्टार्ट-अप संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा. उनकी इस नियुक्ति पर विश्वविद्यालय और कृषि जगत में खुशी की लहर है.

डॉ. त्रिवेणी दत्त की मेरठ में नियुक्ति के बाद अब प्रदेश के अन्य कृषि विश्वविद्यालयों में भी स्थायी नेतृत्व की उम्मीद जग गई है. विशेष रूप से कुशीनगर में महात्मा बुद्ध कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय की स्थापना के बाद से वहां अभी तक कुलपति की नियुक्ति नहीं हो पाई है, जिससे विश्वविद्यालय के प्रशासनिक और शोध कार्यों की गति धीमी है. इसी तरह नरेन्द्र देव कृषि विश्वविद्धालय अयोध्या और सीएसए कानपुर कृषि विश्वविद्यालयों में भी रिक्त पड़े इन महत्वपूर्ण पदों को भरने की प्रक्रिया पर लोगों की नजरें टिकी हुई हैं.अनुसंधान के दृष्टिकोण से देखें तो इन नियुक्तियों का महत्व और भी बढ़ जाता है, क्योंकि एक अनुभवी कुलपति न केवल प्रशासनिक ढांचा सुधारता है बल्कि शोध की गुणवत्ता को भी नई ऊंचाई देता है. कुशीनगर जैसे नए विश्वविद्यालयों में स्थाई कुलपति न होने से नीतिगत फैसले लेने और नए अनुसंधान केंद्रों की स्थापना में बाधा आती है.
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