गुजरात के इन दो मसालों को मिला GI टैग, 20-30% तक बढ़ेगी किसानों की कमाई

गुजरात के इन दो मसालों को मिला GI टैग, 20-30% तक बढ़ेगी किसानों की कमाई

उत्तर गुजरात के उंझा के जीरा और सौंफ को मिला प्रतिष्ठित जीआई टैग. इस मान्यता से अंतरराष्ट्रीय बाजार में जालसाजी रुकेगी और किसानों को अपनी फसल का 20 से 30 फीसदी अधिक दाम मिल सकेगा. यह खबर राज्य की कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है.

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क‍िसान तक
  • New Delhi,
  • Jul 14, 2026,
  • Updated Jul 14, 2026, 11:45 AM IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'वोकल फॉर लोकल' और 'लोकल टू ग्लोबल' के विजन को देखते हुए, गुजरात ने कृषि क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है. उत्तर गुजरात के मशहूर मसाला उत्पादों 'उंझा जीरा' (Unjha Cumin) और 'उंझा सौंफ' (Unjha Fennel) को भारत सरकार की जीआई रजिस्ट्री द्वारा प्रतिष्ठित 'भौगोलिक संकेतक' (GI Tag) दिया गया है. यह उपलब्धि न केवल इन प्रोडक्ट की शुद्धता पर मुहर लगाती है, बल्कि स्थानीय किसानों के लिए आय के नए द्वार भी खोलती है.

जीआई टैग क्यों है इतना महत्वपूर्ण?

जीआई टैग उस प्रोडक्ट को दिया जाता है जिसकी क्वालिटी, प्रतिष्ठा और विशेषताएं किसी विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्र से गहराई से जुड़ी होती हैं. यह एक प्रकार का 'बौद्धिक संपदा अधिकार' है, जो किसी अन्य क्षेत्र के उत्पादों को इस नाम का गलत इस्तेमाल करने से रोकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस टैग के मिलने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में उंझा के जीरा और सौंफ की ब्रांड वैल्यू में भारी उछाल आएगा. दुनिया के खरीदार अब इन मसालों को उनकी 'भौगोलिक प्रामाणिकता' के आधार पर खरीद सकेंगे, जिससे जालसाजी पर लगाम लगेगी.

किसानों की आय में होगी 20-30% की बढ़ोतरी

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, जीआई टैग मिलने के बाद प्रोडक्ट की साख बढ़ने से उनकी कीमतों में सामान्य के मुकाबले 20 से 30 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी होना तय है. उत्तर गुजरात के किसान, जो दशकों से अपनी मेहनत से इन मसालों की खेती कर रहे हैं, अब उन्हें अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिल सकेगा. यह सीधा लाभ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा और कृषि आधारित निर्यात को बढ़ावा देगा.

उंझा: एशिया की सबसे बड़ी मसाला मंडी

उंझा को एशिया की सबसे बड़ी मसाला मंडी माना जाता है. यहां की कृषि उपज मंडी समिति (APMC) न केवल भारत बल्कि दुनिया भर के मसाला व्यापारियों का केंद्र है. राज्य सरकार के बागवानी विभाग, सरदार कृषिनगर दांतीवाड़ा कृषि विश्वविद्यालय और भारतीय उद्यमिता विकास संस्थान (EDII) ने मिलकर एक लंबी कानूनी और तकनीकी प्रक्रिया के बाद यह सम्मान हासिल किया है.


मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने इस उपलब्धि पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि, "यह प्रमाणपत्र केवल एक कागज का टुकड़ा नहीं है, बल्कि यह हमारे किसानों के पसीने और उंझा की मिट्टी की सुगंध का वैश्विक सम्मान है."

गुजरात के अन्य GI टैग प्राप्त प्रोडक्ट

गुजरात ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी सांस्कृतिक और खेती से जुड़ी खास चीजों को बचाने के लिए कई प्रोडक्ट को जीआई टैग दिलाया है. इसमें गिर केसर आम, भालिया गेहूं, कच्छी खारेक और अमलसाडी चीकू पहले से ही शामिल हैं. उंझा के जीरा और सौंफ के जुड़ने से गुजरात के नामी प्रोडक्ट की लिस्ट और भी बड़ी हो गई है, जो दुनिया के मंच पर 'मेड इन इंडिया' का परचम लहरा रहे हैं.

इन प्रोडक्ट को मिल चुका है जीआई टैग

इससे पहले गुजरात के कुछ और कृषि प्रोडक्ट को जीआई टैग मिल चुका है. इन उत्पादों में शामिल हैं-
    • गिर केसर आम (Gir Kesar mangoes)
    • भालिया गेहूं (Bhalia wheat)
    • कच्छी खारेक (Kachchhi Kharek)
    • अमलसाडी चीकू (Amalsadi Chikoo)

इसमें गिर केसर आम बहुत मशहूर है जिसकी मांग दुनिया के कई देशों में है. यह आम अपने रंग, स्वाद और खुशबू के लिए जाना जाता है. साथ ही, बाजार में अच्छी कीमत मिलने से किसानों को बेहतर आय होती है.

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