Wheat Crop Loss: हिंगोली में बेमौसम बारिश का कहर, 90 फीसद तक गेहूं की फसल तबाह

Wheat Crop Loss: हिंगोली में बेमौसम बारिश का कहर, 90 फीसद तक गेहूं की फसल तबाह

हिंगोली में बेमौसम बारिश और तेज तूफान से सैकड़ों हेक्टेयर में खड़ी गेहूं, चना और अन्य रबी फसलें बर्बाद हो गईं. कई किसानों की 80 से 90 प्रतिशत तक फसल नष्ट हो गई है. पहले खरीफ में नुकसान झेल चुके किसान अब दोहरी मार से परेशान हैं और सरकार से जल्द सर्वे व मुआवजे की मांग कर रहे हैं.

हिंगोली के किसान दोहरी मार से परेशानहिंगोली के किसान दोहरी मार से परेशान
ज्ञानेश्वर उंडाल
  • Hingoli,
  • Feb 25, 2026,
  • Updated Feb 25, 2026, 8:27 AM IST

महाराष्ट्र के हिंगोली जिले में कल रात हुई बेमौसम बारिश और तेज तूफान ने किसानों की उम्मीदों को तोड़ दिया. खेतों में खड़ी सैकड़ों हेक्टेयर गेहूं की फसल जमीन पर गिर गई और भारी नुकसान हुआ. कई किसानों की लगभग 80 से 90 प्रतिशत फसल बर्बाद हो गई है. पहले ही सोयाबीन की फसल खराब हो चुकी थी और अब साल भर खाने के लिए बोया गया गेहूं भी नष्ट हो गया है. ऐसे में किसानों के सामने बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि अब वे अपने परिवार का गुजारा कैसे करेंगे.

किसान प्रकाश पवार की दर्दभरी कहानी

भटसावंगी गांव के किसान प्रकाश पवार अपने खेत में गिरी हुई गेहूं की फसल को खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने अपने 6 एकड़ खेत में गेहूं की बुवाई की थी. जुताई, बीज, खाद और मजदूरों की दिहाड़ी मिलाकर प्रति एकड़ लगभग 20 से 25 हजार रुपये खर्च हो चुके थे. इस साल फसल भी अच्छी तैयार हुई थी और कुछ ही दिनों में कटाई होने वाली थी. लेकिन अचानक आए तूफान और बारिश ने उनकी करीब 90 प्रतिशत फसल बर्बाद कर दी.

प्रकाश पवार का परिवार पूरी तरह खेती पर निर्भर है. उनकी साल भर की मेहनत और उम्मीदें एक ही रात में मिट्टी में मिल गईं. वे बताते हैं कि खरीफ और रबी, यही दो मौसम उनके लिए सबसे अहम होते हैं. इस साल पहले खरीफ में बाढ़ और बारिश से नुकसान हुआ और अब रबी की फसल भी बर्बाद हो गई. लगातार दो बार हुए नुकसान से उनका मनोबल टूट गया है.

जिले भर में यही हाल

सिर्फ प्रकाश पवार ही नहीं, बल्कि जिले के कई किसानों की कहानी यही है. अचानक आई बारिश और तेज हवाओं ने गेहूं के साथ-साथ चना, ज्वार और आम की फसलों को भी नुकसान पहुंचाया है. कई खेतों में फसल पूरी तरह जमीन पर गिर चुकी है. किसान परेशान और चिंतित हैं क्योंकि यह फसल उनके साल भर की आय का मुख्य जरिया थी.

मुआवजे की मांग और प्रशासन से नाराजगी

किसानों का कहना है कि इतने बड़े नुकसान के बावजूद अब तक कोई अधिकारी या कर्मचारी खेतों में पंचनामा करने नहीं पहुंचा है. वे सरकार से मांग कर रहे हैं कि जल्द से जल्द नुकसान का सर्वे किया जाए और उचित मुआवजा दिया जाए. किसानों का कहना है कि अगर समय पर सहायता नहीं मिली तो उनके लिए आने वाला समय और भी कठिन हो सकता है.

बदलते मौसम से बढ़ी चिंता

बेमौसम बारिश और तूफान जैसी घटनाएं अब बार-बार होने लगी हैं. इससे किसानों की चिंता और बढ़ गई है. खेती पूरी तरह मौसम पर निर्भर है और ऐसे प्राकृतिक बदलाव किसानों की कमर तोड़ देते हैं. हिंगोली के किसान अब सरकार से राहत और मदद की उम्मीद लगाए बैठे हैं, ताकि वे फिर से अपने पैरों पर खड़े हो सकें.

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