
देश के गेहूं किसानों के लिए बड़ी खबर सामने आई है. केंद्र सरकार ने घरेलू बाजार में गेहूं की गिरती कीमतों को स्थिर करने और किसानों को अच्छा रिटर्न दिलाने के लिहाज से 25 लाख मीट्रिक टन (LMT) गेहूं और 5 LMT गेहूं के प्रोडक्ट्स के निर्यात को मंजूरी दी है. इस समय देश में गेहूं का पर्याप्त भंडारण है और कीमतें भी बहुत ज्यादा नहीं है. साथ ही चालू रबी सीजन में भी गेहूं की रिकॉर्ड बुवाई हुई है और रिकॉर्ड उत्पादन का अनुमान है. साथ ही सरकार ने चीनी के निर्यात को भी मंजूरी दी है, जो चीनी मिल मालिकों और गन्ना किसानों के लिए राहत की खबर है.
सरकार ने एक बयान जारी कर कहा कि 2025-26 के दौरान निजी कंपनियों के पास लगभग 75 लाख मीट्रिक टन गेहूं स्टॉक में होगा, जो पिछले साल इसी समय के मुकाबले लगभग 32 लाख मीट्रिक टन ज्यादा है. साल-दर-साल के लिहाज से यह बड़ी बढ़ोतरी है, जो देश में अच्छी सप्लाई का संकेत देती है. सरकार ने कहा है कि 1 अप्रैल 2026 तक FCI के सेंट्रल पूल में गेहूं की कुल उपलब्धता लगभग 182 LMT रहने का अनुमान है. ऐसे में इस मंजूरी से घरेलू जरूरतों पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा.
केंद्र सरकार के इस फैसले को घरेलू गेहूं बाजार में संतुलन बनाए रखने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है. जानकारों के मुताबिक, फिलहाल देश में गेहूं की उपलब्धता जरूरत से ज्यादा बनी हुई है, जबकि खुले बाजार में भाव दबाव में हैं. ऐसे में सीमित मात्रा में निर्यात की अनुमति देने से बाजार में मांग को सहारा मिलेगा और किसानों को बेहतर दामों पर फसल बेचने से राहत मिल सकेगी.
इसके अलावा चालू रबी सीजन में गेहूं की बुवाई रकबे में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है. अधिक रकबा, अनुकूल मौसम और सरकारी खरीद व्यवस्था के चलते इस बार भी रिकॉर्ड उत्पादन की संभावना जताई जा रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि उत्पादन बढ़ने की स्थिति में निर्यात एक जरूरी विकल्प बन जाता है, ताकि बाजार में अतिरिक्त आपूर्ति के कारण कीमतों में तेज गिरावट न आए.
सरकार ने चीनी निर्यात को बढ़ावा देने के उद्देश्य से चालू शुगर सीजन 2025-26 में इच्छुक चीनी मिलों को अतिरिक्त 5 लाख मीट्रिक टन चीनी निर्यात करने की अनुमति देने का फैसला किया है. इससे पहले इसी सीजन में 15 लाख मीट्रिक टन चीनी के निर्यात को मंजूरी दी जा चुकी थी, लेकिन चीनी मिलें अब तक इसका पूरा लाभ नहीं ले पाई.
आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2026 के अंत तक कुल निर्यात सीमित रहा है, जबकि कुछ मात्रा के लिए ही अग्रिम अनुबंध किए गए हैं. ऐसे में सरकार ने निर्यात को गति देने के लिए नई मात्रा जारी की है, जिसमें शर्त रखी गई है कि मिलों को तय समय सीमा के भीतर अपने आवंटन का बड़ा हिस्सा विदेश भेजना होगा.
यह कोटा इच्छुक मिलों में अनुपात के आधार पर बांटा जाएगा और इसे किसी दूसरी मिल को ट्रांसफर नहीं किया जा सकेगा. इस कदम से देश में अतिरिक्त चीनी स्टॉक को खपाने, मिलों की नकदी स्थिति सुधारने और गन्ना किसानों के भुगतान में तेजी लाने में मदद मिलेगी.
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